No Insurance, No Fuel: बिना बीमा वाले वाहनों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, केंद्र को दिए निर्देश

Edited By Kamini,Updated: 05 Aug, 2026 10:27 AM

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वाहन चालकों के लिए बेहद ही खास खबर सामने आई है। अब बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर तेल नहीं दिया जाएगा।

पंजाब डेस्क : वाहन चालकों के लिए बेहद ही खास खबर सामने आई है। अब बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर तेल नहीं दिया जाएगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नया पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के फ्यूल नहीं मिलेगा।  

देश में बड़ी संख्या में बिना इंश्योरेंस के चल रहे वाहनों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नई व्यवस्था तैयार करने का सुझाव दिया है। कोर्ट ने कहा कि एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाए, जिसके तहत जिन वाहनों के पास वैध थर्ड पार्टी इंश्योरेंस नहीं है, उन्हें पेट्रोल पंपों पर ईंधन उपलब्ध न कराया जाए। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि उपलब्ध आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। देश में करीब 30.48 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से लगभग 16.54 करोड़ वाहन ऐसे हैं, जिनका इंश्योरेंस वैध नहीं है। कोर्ट ने माना कि ऐसी स्थिति में सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को कानूनी मुआवजा मिलने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

प्राप्त हुए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में 4.87 लाख से अधिक, 2023 में 4.80 लाख और 2022 में 4.61 लाख सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन आंकड़ों को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन कानून के तहत थर्ड पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य होने के बावजूद नियमों का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि पहले सीमित क्षेत्रों या चुनिंदा नेशनल हाईवे पर इस व्यवस्था का परीक्षण किया जाए। इसके साथ ही टोल प्लाजा पर गाड़ियों को रोकने के मौजूदा सिस्टम की जगह, ऐसा ऑटोमैटिक सिस्टम बनाने का भी सुझाव दिया गया, जो गुजरने वाले वाहनों की पहचान कर सके। 

कोर्ट ने नए वाहनों के लिए थर्ड पार्टी बीमा की अनिवार्य अवधि बढ़ाने का भी निर्देश दिया। अब नई कारों के लिए 4 वर्ष और नए दोपहिया वाहनों के लिए 6 वर्ष का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस लागू किया जाएगा। इस संबंध में भारतीय इंश्योरेंस विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के लिए कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वर्ष 2018 में दिए गए अपने आदेश के बावजूद बड़ी संख्या में वाहन आज भी बिना इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसलिए सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के हितों को ध्यान में रखते हुए इंश्योरेंस की अनिवार्य अवधि बढ़ाना आवश्यक माना गया है।  

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