Edited By Urmila,Updated: 12 Apr, 2026 02:49 PM
कभी-कभी जिंदगी इंसान को ऐसे मोड़ पर ले जाती है, जहां खुशी के आंसुओं में दर्द की खामोशी घुली होती है… कपूरथला के शिव दयाल वाला गांव में हुई यह घटना भी कुछ ऐसी ही है।
कपूरथला (गुरप्रीत) : कभी-कभी जिंदगी इंसान को ऐसे मोड़ पर ले जाती है, जहां खुशी के आंसुओं में दर्द की खामोशी घुली होती है… कपूरथला के शिव दयाल वाला गांव में हुई यह घटना भी कुछ ऐसी ही है—एक तरफ हंसा सिंह 25 साल बाद घर लौटा, तो दूसरी तरफ समय के साथ जिंदगी, रिश्ते और असलियत बदल गई।
दिमागी तौर पर परेशान हंसा सिंह जब 25 साल बाद अपने घर की गलियों में लौटा, तो यह उसके लिए सिर्फ वापसी नहीं थी—यह एक ऐसा सच था जो उसके दिल को चीर कर रख देगा। जिस घर को वह अपना समझता था, उसी में उसकी पत्नी अब किसी और की जीवन साथी बन चुकी थी—वह भी उसके अपने छोटे भाई की। परिवार ने उसे सालों पहले मरा हुआ मान लिया था। रीति-रिवाजों और मजबूरियों के बीच पत्नी की शादी छोटे भाई से कर दी गई। 22 साल की इस नई जिंदगी में उनके बच्चे भी हैं और एक भरा-पूरा परिवार बन चुका है।
जब हंसा सिंह वापस आया तो खुशी का पल था, लेकिन इस खुशी के साथ कई सवाल भी उठे…
कपूरथला जिले का रहने वाला हंसा सिंह 25 साल पहले अचानक गायब हो गया था। परिवार ने उसे हर जगह ढूंढा लेकिन कोई पता नहीं चला। तीन साल इंतजार करने के बाद परिवार ने उम्मीद छोड़ दी और उसे मरा हुआ मान लिया। सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार, उसकी पत्नी की शादी उसके छोटे भाई से कर दी गई। यह शादी अब 22 साल से चल रही है और दोनों के दो बच्चे हैं। सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक हंसा सिंह 25 साल बाद वापस आ गया।
भिखारी जैसी हालत में मिला
उत्तर प्रदेश के नरथौर के नए बाजार में एक आदमी फटे कपड़ों और लंबी दाढ़ी के साथ घूमता हुआ मिला। स्थानीय लोगों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। थाना इंचार्ज रविंदर प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे और उस आदमी से बात की। शुरू में वह कुछ भी साफ-साफ नहीं बता सका, लेकिन धीरे-धीरे उसने अपना नाम हंसा सिंह बताया।

पुलिस जांच
पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू की और स्थानीय लोगों की मदद से उसकी पहचान करने की कोशिश की। पंजाब पुलिस से भी संपर्क किया गया। 72 घंटे के अंदर परिवार वाले नरथौर पहुंच गए। पहले तो वे उसे पहचान नहीं पाए क्योंकि 25 साल में उसका हुलिया बदल गया था। लेकिन जब भाइयों और गांव के सरपंच ने उससे बचपन की यादों और घटनाओं के बारे में पूछा, तो वह भावुक हो गया और उसकी आंखों में आंसू आ गए।
खुशी के साथ एक बड़ी प्रॉब्लम
परिवार के लिए यह बहुत खुशी का पल था कि जो सदस्य हमेशा के लिए खो गया था, वह वापस मिल गया। लेकिन इससे एक बड़ी प्रॉब्लम भी खड़ी हो गई। विमला देवी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अब वह किसे तरजीह दें? एक तरफ उनके पहले पति हंसा सिंह हैं जो 25 साल बाद लौटे हैं, दूसरी तरफ सुख सिंह हैं जिन्होंने 22 साल तक उनका साथ दिया और उनके तीन बच्चों के पिता हैं।
भावनात्मक उलझन का माहौल
इस घटना ने न सिर्फ भावनात्मक लेवल पर, बल्कि सोशल और लीगल लेवल पर भी एक बड़ी पहेली खड़ी कर दी है। परिवार बहुत मुश्किल में है। इस पूरे मामले में नरथौर पुलिस के रोल की भी काफी तारीफ हो रही है। उन्होंने समझदारी से उस इंसान को पहचाना जिसे लोग भिखारी समझ रहे थे, उसकी देखभाल की, उसे नए कपड़े दिए और सब्र से बात करके उसे उसके परिवार से मिला दिया।
पत्नी का इनकार, भाइयों का सहारा
सबसे दर्दनाक पल तब था जब हंसा सिंह को उसकी पत्नी ने नहीं अपनाया। समय ने उसके लिए एक नया रास्ता बना दिया था, जिसमें हंसा सिंह के लिए कोई जगह नहीं बची थी। ऐसे में हंसा सिंह अब अपने भाइयों के साथ रह रहा है—वही भाई जिनके साथ उसने कभी अपना बचपन खेला-कूदा, आज वही उसका एकमात्र सहारा बने हुए हैं।
भिखारी की हालत से घर की चौखट तक
यह आदमी उत्तर प्रदेश के नरथौर के बाजार में फटे कपड़ों, बिखरी दाढ़ी और उलझी यादों के साथ घूमता हुआ मिला था, किसी को अंदाज़ा नहीं था कि वह किसी परिवार का लापता सदस्य है। पुलिस की समझदारी भरी कार्रवाई और गांव वालों के सहयोग से वह अपने घर की चौखट तक पहुंच गया।
गांव की अपील: इलाज और मदद की जरूरत
इस मामले में गांव के सरपंच मलकीत सिंह, किसान नेता गुरसेवक सिंह शिव दयाल वाला और दूसरे खास लोगों ने भी बातचीत के दौरान बताया कि हंसा सिंह की दिमागी हालत ठीक नहीं है और उसे इलाज की बहुत जरूरत है। उन्होंने सरकार से भी अपील की है कि सरकार उसका इलाज करवाए और उसे कुछ पेंशन या पैसे की मदद दे, ताकि वह अपनी बाकी जिंदगी किसी सहारे के साथ गुजार सके। चूंकि यह परिवार जमीननहीन है, इसलिए उनके नाम पर कोई जमीन या बड़ा सहारा नहीं है। ऐसे में हंसा सिंह की जिंदगी अब पूरी तरह से उसके भाइयों की मेहरबानी पर निर्भर है।

सवाल में रिश्ते और समाज
यह घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा सवाल है—क्या समय के साथ रिश्ते खत्म हो जाते हैं? या वापस लौटने वालों के लिए कोई जगह होनी चाहिए? एक तरफ कानून, दूसरी तरफ सामाजिक रीति-रिवाज और सबसे बढ़कर इंसानी भावनाएं—ये तीनों इस कहानी में एक-दूसरे से टकरा रहे हैं… आखिर में बस एक ही तस्वीर बचती है—एक ऐसा इंसान जो 25 साल बाद अपने घर लौटा है, लेकिन अभी भी अपनी जिंदगी की तलाश में है…
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