सेहत विभाग ने पहली बार सख्त फैसला लेते हुए 23 लैब टेक्नीशियन को किया बर्खास्त

Edited By Mohit,Updated: 19 Jun, 2020 09:59 PM

health department taking strict decision dismissed 23 lab technicians

सेहत विभाग ने फरमान जारी करते हुए अमृतसर के जलियांवाला बाग मेमोरियल सिविल.............

अमृतसर (दलजीत शर्मा): सेहत विभाग ने फरमान जारी करते हुए अमृतसर के जलियांवाला बाग मेमोरियल सिविल अस्पताल में कार्यरत 23 लैब टेक्निशियन को बर्खास्त करने का फैसला कर लिया है। विभाग द्वारा इतिहास में पहली बार ऐसा सख्त फैसला किया गया है। उधर दूसरी ओर बर्खास्त हुए कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले का ​कड़ा विरोध जताया है, वहीं कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली वेलफेयर एसोसिएशन स्वास्थ्य विभाग के चेयरमैन व सिविल अस्पताल में कार्यरत एप्थेलेमिक आॅफिसर राकेश शर्मा ने कहा कि यह सरासर अन्याय हैं। 

जानकारी अनुसार विभाग के सचिव द्वारा डायरेक्टर सेहत सेवाओं को लिखे गए पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सिविल अस्पताल में जो लैबोरेट्री टेक्निशियन सैक्शन पोस्ट के अलावा डेपुटेशन पर लगे हैं उनकी सेवाएं तुरंत डिसमिस कर दी जाए। उधर दूसरी ओर एसोसिएशन के चेयरमैन पंडित राकेश शर्मा ने कहा कि बर्खास्त किए गए कर्मचारियों को डेपुटेशन पर सिविल अस्पताल में इसलिए लगाया गया, ताकि सिविल अस्पताल का काम प्रभावित न हो। जब भी मंत्री, सेक्रेट्री अथवा डायरेक्टर सिविल अस्पताल आए, हमने उन्हें मांगपत्र देकर कहा कि सिविल अस्पताल में स्टाफ की सेंक्शन पोस्ट की जाएं। आश्वासन देकर मंत्री व अधिकारी जाते रहे, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। सिविल अस्पताल का कामकाज चलाने के लिए डेपुटेशन पर इन कर्मचारियों को लगाया गया। किसी का कोई राजनीतिक रसूख नही। 

यदि स्वस्थ्य विभाग पैरा मेडिकल स्टाफ की सेंक्शन पोस्ट नहीं कर सकता तो सिविल अस्पताल को बंद कर दे। यदि विभाग ने बर्खास्ती का फैसला लागू किया तो समूह कर्मचारी सिविल अस्पताल का काम ठप कर देंगे। वहीं बर्खास्त किए गए कर्मचारियों का कहना है कि सिविल अस्पताल में डेपुटेशन तो कर्मचारी लगवाना ही नहीं चाहते। यहां काम ज्यादा है, इसलिए कर्मचारी भागते हैं। इसके बावजूद हम पूरी निष्ठा से यहां काम कर रहे हैं। सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे, क्योंकि कोरोना काल में सिविल अस्पताल के कर्मचारियों ने जिस निष्ठा से काम किया है, वह एक उदाहरण है। उधर सिविल सर्जन डॉक्टर जुगल किशोर से इस संबंध में जब संपर्क करना चाहा तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

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