Fastag' की नई स्कीम बनी 'सिरदर्द',  वाहन चालकों को झेलना पड़ रहा बड़ा नुक्सान

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 23 Sep, 2025 08:08 PM

fastag s new annual scheme has become a  headache

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में फास्टैग से जुड़ी वार्षिक पास स्कीम की शुरुआत की गई थी। इस स्कीम का उद्देश्य यात्रियों को सुविधा प्रदान करना था और टोल भुगतान में पारदर्शिता लाना था। लेकिन अब यह स्कीम कई वाहन चालकों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है।

पंजाब डैस्क : केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में फास्टैग से जुड़ी वार्षिक पास स्कीम की शुरुआत की गई थी। इस स्कीम का उद्देश्य यात्रियों को सुविधा प्रदान करना था और टोल भुगतान में पारदर्शिता लाना था। लेकिन अब यह स्कीम कई वाहन चालकों के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। वजह यह है कि इस स्कीम से जुड़े कई तकनीकी खामियों के चलते वाहन मालिकों को हजारों रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
 
दरअसल, फास्टैग गाड़ी के शीशे पर चिपका होता है। यदि किसी वाहन का शीशा टूट जाता है और चालक को नया फास्टैग जारी करवाना पड़ता है, तो उसमें पहले से रिचार्ज किए गए वार्षिक पास के पैसे नए फास्टैग में ट्रांसफर नहीं हो रहे। पोर्टल पर इस प्रक्रिया के लिए कोई विकल्प ही उपलब्ध नहीं है। नतीजा यह है कि जिन वाहन चालकों ने 3,000 रुपये या उससे अधिक की राशि वार्षिक पास में रिचार्ज करवाई हुई है, वे सीधे-सीधे नुकसान में जा रहे हैं।

समस्या सिर्फ शीशा टूटने तक ही सीमित नहीं है। अगर कोई वाहन मालिक अपनी गाड़ी बेच देता है और फास्टैग बंद करवाता है, तब भी उसमें जमा हुए पैसे रिफंड नहीं हो पा रहे। बैंक और फास्टैग ऑपरेटर भी इस प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे। इस कारण, कई वाहन मालिकों के हजारों रुपये फंस चुके हैं।
 
फास्टैग सिस्टम की एक और खामी यह है कि यदि वाहन मालिक नया फास्टैग (डुप्लीकेट) जारी करवाता है, तो भी पुराने फास्टैग में जमा बैलेंस ट्रांसफर नहीं होता। यानी नया फास्टैग जारी जरूर हो जाता है, लेकिन उसमें पहले से डाला गया वार्षिक पास का पैसा ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।
 
इस समस्या से परेशान वाहन चालकों ने सरकार से सवाल उठाए हैं कि आखिर जब वार्षिक पास योजना में पैसे डाले ही गए हैं तो उन्हें डुप्लीकेट फास्टैग में क्यों नहीं ट्रांसफर किया जा रहा? उनका कहना है कि इस स्कीम से लाभ से ज़्यादा नुकसान हो रहा है। कई लोग इसे "सीधे जेब पर चोट" बता रहे हैं।
 
देशभर में हजारों वाहन मालिक इस समस्या से जूझ रहे हैं और अब तक करोड़ों रुपये फास्टैग कंपनियों और ऑपरेटरों के पास अटके हुए हैं। कई गाड़ियों के मालिकों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से शिकायतें दर्ज करवाई हैं, लेकिन समाधान कहीं से नहीं मिल रहा। वाहन मालिकों ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से अपील की है कि पोर्टल पर ऐसा विकल्प जल्द जोड़ा जाए, जिससे डुप्लीकेट फास्टैग या गाड़ी बेचने के बाद भी वार्षिक पास का बैलेंस ट्रांसफर या रिफंड हो सके।

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