भाई तारू सिंघ जी की शहादत को लेकर लाइव टेलिविजन पर सिरसा के विवादित बोल

Edited By Yaspal,Updated: 29 Jul, 2020 06:48 PM

disputes of sirsa on live television regarding the martyrdom of bhai taru singh

बादलों के पदचिह्नों पर चलते हुए उनके हथठोके दिल्ली गुरद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान मनजिंदर सिंघ सिरसा द्वारा श्री अकाल तख्त साहब की आज्ञा को धत्ता बताते हुए लाइव टेलिविजन पर फिर से सिख इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश किया। इस बार उसने भाई तारू सिंघ...

नई दिल्लीः बादलों के पदचिह्नों पर चलते हुए उनके हथठोके दिल्ली गुरद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान मनजिंदर सिंघ सिरसा द्वारा श्री अकाल तख्त साहब की आज्ञा को धत्ता बताते हुए लाइव टेलिविजन पर फिर से सिख इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश किया। इस बार उसने भाई तारू सिंघ की शहादत के बारे में गलत बयानी की। खबरों में बने रहने की इच्छा का कीड़ा सिरसा जी को सदा ही काटता रहता है। इस बार उसने भाई मनी सिंघ जी और भाई तारू सिंघ जी की शहादत को ही राष्ट्रीय टैलिविज़न पर आपस में बदल डाला।

सिरसा ने समाचार चैनल पर भाई तारू सिंघ जी के बारे में कहा कि उनको बंद बंद काट कर शहीद किया गया। दिल्ली कमेटी के प्रधान सिरसा को इतना भी ज्ञान नहीं है कि जल्लादों ने भाई तारू सिंघ जी की खोपड़ी रंबीयो से उतारी थी! सिरसा के लिए सिख इतिहास और शहादतें मात्र एक कथा कहानियां ही हैं!

दिल्ली अकाली दल के जनरल सकत्तर सरदार हरविंदर सिंघ सरना ने कहा ' सिरसा के लिए इसका कोई महत्व नहीं कि वह गुरू अर्जुन साहब की शहादत को तोड़ मरोड़ कर पेश करे, श्री गुरु तेगबहादुर साहब की शहादत से पहले उनके दहीं से स्नान करने की मनगढंत कथा घढ़ ले, इसका भी कोई पश्चाताप नहीं कि गुरू हरकरिशन पातशाह को 'होम क्वारंटीन 'में भेजने की फालतू बात करे, उसके लिए यह बात भी कोई मायने नहीं रखती कि वह अपने समाचार पत्र कॉलम में बाबा बकाला और गुरू गोबिंद सिंघ की जीवनी को ही सिख इतिहास से गायब कर दे और गुरुबाणी शलोकों को गलत ढंग से पेश कर दे?? उसे कोई परवाह नहीं कि वह गुरू के लंगर की उद्योगपतियों द्वारा बोली लगवाये और उसे श्री अकाल तख्त साहब की उस पर सिख इतिहास,धर्म और गुरबाणी पर बोलने की रोक की  भी अवज्ञा करने की भी कोई परवाह नहीं।

सरदार सरना ने जत्थेदार सिंघ साहब ज्ञानी हरपरीत सिंघ जी द्वारा इस अवज्ञा पर सिरसा पर कोई फैसलाकुन कार्रवाई किए जाने की आशा जताई है जिसने कि अकाल तख्त साहब के हुक्म की उल्लंघना करते हुये एक बार फिर से जनतक तौर पर सिखी और सिख इतिहास पर घृणित ब्यानबाज़ी की है।

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