Edited By Subhash Kapoor,Updated: 01 Apr, 2026 06:22 PM

पंजाब में आढ़तियों द्वारा कमीशन बढ़ाने की मांग को लेकर की जा रही हड़ताल के बीच आज मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ उनकी बैठक बेनतीजा रही। बैठक खत्म होने के बाद आढ़तियों ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री पर डराने-धमकाने के आरोप लगाए और कहा कि...
बठिंडा : पंजाब में आढ़तियों द्वारा कमीशन बढ़ाने की मांग को लेकर की जा रही हड़ताल के बीच आज मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ उनकी बैठक बेनतीजा रही। बैठक खत्म होने के बाद आढ़तियों ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री पर डराने-धमकाने के आरोप लगाए और कहा कि हड़ताल खत्म करवाने के लिए सरकार दबाव बना रही है।
यह मामला जैसे ही शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और व्यापार विंग कोर कमेटी के सदस्य मोहित गुप्ता के ध्यान में आया, उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
मोहित गुप्ता ने कहा कि आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री को अपने हक की मांग कर रहे आढ़तियों को “ब्लैकमेलर” कहना शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को कोई अधिकार नहीं है कि वे अपने अधिकार मांग रहे आढ़तियों को ब्लैकमेलर बताएं या उन्हें हड़ताल खत्म करने के लिए डराएं-धमकाएं।
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री की यह कार्रवाई पंजाब और आढ़तियों के खिलाफ है, जिससे साफ होता है कि सरकार सत्ता के अहंकार में आकर हक मांगने वालों की आवाज को दबाना चाहती है। गुप्ता ने कहा कि आढ़तियों और किसानों का रिश्ता बहुत गहरा है और दोनों एक-दूसरे का साथ देते हैं। लंबे समय से आढ़ती अपने कमीशन में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं, जिसके चलते उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि वे आढ़तियों के हक बहाल करें और सरकार के हिस्से में बढ़ोतरी करते हुए कमीशन बढ़ाया जाए। साथ ही केंद्र सरकार से भी मांग की कि पंजाब के किसानों और आढ़तियों को उनका बनता हक दिया जाए।
मोहित गुप्ता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की कार्यप्रणाली के कारण पंजाब का हाल खराब हो चुका है और हर वर्ग सरकार से निराश है। उन्होंने कहा कि आढ़तियों की हड़ताल को दबाव बनाकर खत्म करवाना और उन्हें ब्लैकमेलर कहना निंदनीय है।
अंत में उन्होंने मांग की कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर आढ़तियों का कमीशन बढ़ाएं और उनके अधिकार सुनिश्चित करें, ताकि मंडियों में किसानों की फसल की सुचारू खरीद हो सके और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।