Edited By Urmila,Updated: 05 Apr, 2025 11:44 AM

सिविल अस्पताल में लगातार बढ़ रही लापरवाहियों के मामलों में यदि कोई जांच कमेटी बैठती है, तो देखने में आता है कि कमेटी पूरी कोशिश करती है कि उनके कैडर पर कोई आरोप सिद्ध न हो।
जालंधर (विशेष): सिविल अस्पताल में लगातार बढ़ रही लापरवाहियों के मामलों में यदि कोई जांच कमेटी बैठती है, तो देखने में आता है कि कमेटी पूरी कोशिश करती है कि उनके कैडर पर कोई आरोप सिद्ध न हो। उक्त आरोप लगाते हुए रेलवे रोड मार्केट एसोसिएशन के प्रधान ललित मेहता ने बताया कि कुछ महीने पहले सिविल अस्पताल वार्ड में भर्ती मरीज, जिनकी पहचान अनमोल और उदय के तौर पर हुई थी, को अस्पताल प्रशासन के इशारे पर अस्पताल के मेन गेट के बाहर फेंक दिया गया। सर्दी के कारण दोनों की हालत और बिगड़ने लगी। जब मीडिया ने इस खबर को प्रकाशित किया, तो दोनों को ओल्ड रेलवे रोड स्थित रैन बसेरा के बाहर छोड़ दिया गया।
ललित मेहता ने बताया कि जैसे ही उन्हें इस घटना की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत एम्बुलेंस मंगवाई और दोनों मरीजों को दोबारा सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया ताकि उनकी जान बचाई जा सके। लेकिन अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण अनमोल की मौत हो गई। ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसलिए उन्होंने इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग से की।
इस मामले की जांच के लिए सिविल सर्जन कार्यालय से मेडिकल सुपरिंटैंडैंट के कार्यालय में एक जांच कमेटी गठित की गई, जिसने जो रिपोर्ट पेश की, वह चौंकाने वाली है। रिपोर्ट में लिखा गया है कि वार्ड अटैंडेंट ओमप्रकाश ने मरीजों को रोकने की कोशिश नहीं की, न ही डॉक्टर या स्टाफ को सूचित किया। इसके अलावा, पेस्को सुरक्षा गार्ड अवतार सिंह ने भी अपना कर्तव्य ठीक से नहीं निभाया क्योंकि अस्पताल से बाहर आए दोनों मरीजों को अस्पताल वापस भेजने के बजाय उन्हें रैन बसेरा जाने की अनुमति दे दी। इसलिए, बोर्ड ने सिफारिश की है कि ओमप्रकाश और अवतार सिंह अपने कर्तव्यों को निभाने में विफल रहे और नियमों के अनुसार उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
डॉक्टरों पर मेहरबानी क्यों?
शिकायतकर्ता ललित मेहता का कहना है कि आयोग ने उनसे भी जुलाई महीने तक जवाब मांगा है और वे आयोग को बताएंगे कि इस घटना के बाद न केवल अनमोल की, बल्कि एक बुजुर्ग की भी मौत हुई थी, जिसे सिविल अस्पताल प्रशासन के इशारे पर बाहर फेंका गया था। उचित इलाज न मिलने के कारण उसकी भी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद ऐसी घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं, क्योंकि अस्पताल प्रशासन इन मामलों को गंभीरता से नहीं लेता। आए दिन कोई न कोई लापरवाही सामने आती रहती है, जिससे मरीजों को इलाज के दौरान गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
वार्ड अटैंडेंट को आरोपी बनाए जाने पर स्टाफ में रोष
सिविल अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक, वार्ड अटैंडेंट ओमप्रकाश को आरोपी बनाए जाने से अन्य अटैंडेंटों में रोष है। उनका कहना है कि सिविल अस्पताल में पहले से ही अटैंडेंटों की भारी कमी है, और जो कर्मचारी ड्यूटी पर हैं, वे सुबह से रात तक सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उनका सवाल है कि क्या इस मामले में कोई डॉक्टर या अन्य अस्पताल स्टाफ जिम्मेदार नहीं है? पूरा अस्पताल जानता है कि ओमप्रकाश ने अपने पूरे जीवन में अपनी ड्यूटी अच्छे तरीके से निभाई है। लेकिन जिस तरह से बोर्ड ने उन्हें दोषी ठहराया है, वह गलत है।
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