संगरूर में दलित युवक की मौत का मामला: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने 15 दिनों में माँगी कार्रवाई रिपोर्ट

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 04 Oct, 2026 07:28 PM

case of dalit youth s death in sangrur national commission for scheduled castes

संगरूर में अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित युवक की मौत के मामले में न्याय की माँग को लेकर पूर्व विधायक एवं भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा, पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष शीतल अंगुराल द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को दी गई शिकायत पर आयोग ने संज्ञान लेते...

नई दिल्ली / जालंधर  : संगरूर में अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित युवक की मौत के मामले में न्याय की माँग को लेकर पूर्व विधायक एवं भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा, पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष शीतल अंगुराल द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को दी गई शिकायत पर आयोग ने संज्ञान लेते हुए जाँच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, भारत सरकार की ओर से जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, आयोग ने इस मामले में संगरूर के उपायुक्त (Deputy Commissioner) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

आयोग द्वारा जारी नोटिस में मामले की निष्पक्ष जाँच, पुलिस कार्रवाई, एफआईआर एवं संबंधित धाराओं, आरोपियों की गिरफ्तारी, चार्जशीट तथा पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआवजा दिए जाने से संबंधित जानकारी माँगी गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय के भीतर जवाब प्राप्त नहीं होने की स्थिति में वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए संबंधित अधिकारियों को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए समन जारी कर सकता है।

शीतल अंगुराल ने कहा कि इस मामले में उनका उद्देश्य पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना और यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी परिवार के साथ अन्याय न हो। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना संवैधानिक जिम्मेदारी है। यदि किसी मामले में लापरवाही हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए और पूरे मामले की जाँच निष्पक्ष, पारदर्शी तथा बिना किसी दबाव के होनी चाहिए। प्रशासन और पुलिस को आयोग द्वारा माँगी गई रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करनी चाहिए, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

शीतल अंगुराल ने कहा कि वह पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए संवैधानिक और कानूनी माध्यमों से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के हस्तक्षेप से मामले की जाँच में तेजी आएगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएँगे।

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