इन मासूमों के साथ जो हुआ आपके बच्चे के साथ ना हो...Parents रखें इन चीजों का ध्यान

Edited By Vatika,Updated: 03 Mar, 2021 05:14 PM

careful parents keep your kids safe

पी.जी.आई. में दो बच्चों की रेयर सर्जरी कर उनकी जान बचाई गई है। 21 महीने के एक बच्चे निहाल के पेट से बादाम तो दूसरे ने स्क्रू निगल लिया था

चंडीगढ़(रवि पाल): पी.जी.आई. में दो बच्चों की रेयर सर्जरी कर उनकी जान बचाई गई है। 21 महीने के एक बच्चे निहाल के पेट से बादाम तो दूसरे ने स्क्रू निगल लिया था, जिसे सर्जरी कर निकाला गया है। अगर वक्त पर सर्जरी नहीं होती तो दोनों बच्चों की जान तक जा सकती थी। पानीपत के रहने वाले 2 साल के एक बच्चे के बादाम खाने के 5 दिन बाद उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। 

साथ ही खांसी की शिकायत होने लगी। परिवार ने लोकल हॉस्पिटल में दिखाया तो उसे 22 फरवरी को पी.जी.आई. रैफर किया गया। पी.जी.आई. एडवांस पीडियाट्रिक सैंटर की एमरजैंसी में उसे लाया गया, जहां उसका डायग्नोज किया गया और चेस्ट का एक्स-रे हुआ। जरनल एनेस्थिसिया देकर उसकी रिजिड ब्रोंकोस्कोपी हुई। एक एंडोस्कोप एयरवे के रास्ते भेजकर लेफ्ट विंडपाइप (सांस की नली) से बादाम के टुकड़े को बाहर निकाला गया। डॉक्टर्स की मानें तो सर्जरी मुश्किल थी क्योंकि बच्चे कीउम्र कम थी, जिसे ट्रीट करना हमेशा चैलेंजिंग होता है। परिवार को सर्जरी को लेकर अवेयर किया गया था, जिनके सहमति देने के बाद सर्जरी हुई। 

लंग्स में फंस गया स्क्रू 
एक दूसरी सर्जरी में से चार साल के लड़के की भी रेयर सर्जरी हुई है। उसके राइट मेन ब्रोन्कस (लंग्स) में एक स्क्रू फंसा हुआ था, जिसकी वजह से उसके पेट में दर्द था। इस क्रिटिकल कंडीशन में बच्चे को पी.जी.आई. लाया गया था। बच्चा अम्बाला का रहने वाला है। डॉक्टर्स ने पहले केस का रैफ्रैंस देते हुए इस बच्चे के परिजन को  इस सर्जरी के बारे में बताया, इसकी कंडीशन के बारे में काऊंसलिंग की। रिजिड ब्रोन्कोस्कोपी प्रोसीजर से ही डॉ. नितिन जे पीटर्स ने उस स्क्रू को बाहर निकाला। एयरवे में फॉरेन बॉडीज (सांस की नली में कोई बाहरी चीज जाना) जान के लिए खतरा होती हैं और रिजिड ब्रोन्कोस्कोपी प्रोसीजर का इस्तेमाल करते हुए उन्हें फौरन बॉडी को बाहर निकाला जरूरी है।

अभिभावक ध्यान दें 
पी.जी.आई. डायरैक्टर डॉ. जगत राम ने इन दोनों सर्जरी को लेकर कहा कि अभिभावकों को जागरूक होना चाहिए। बच्चों के आसपास ऐसी चीजें न रखें, न ही उन्हें कुछ ऐसा खेलने के लिए दें। इस तरह के मामलों में बच्चों की जान भी जा सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि पी.जी.आई. पीडियाट्रिक सर्जन्स ने बेहत काम किया है, जिसकी वजह से बच्चों की जान बच पाई है। पी.जी.आई. में हर साल ऐसे 120 बच्चों के मामले आते हैं, जिसमें बच्चे कुछ चीजें निगल लेते हैं। पी.जी.आई. एडवांस पीडियाट्रिक सैंटर इस तरह के मामलों को हैंडल करने में अहम रोल अदा कर रहा है।

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