पंजाब में खत्म नहीं हुआ आतंकवाद, आतंकियों के नए चेहरे आ रहे सामने

Edited By Vatika,Updated: 09 Nov, 2018 12:11 PM

bipin rawat army cheif

भारतीय सेना के प्रमुख जनरल बिपिन रावत द्वारा गत दिवस पंजाब में खालिस्तान लहर के दोबारा उभरने के दावे ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है। इस दावे से ऐसा लगने लगा है कि आधी सदी के बाद पंजाब में दोबारा वही हालात बन सकते हैं, जिनका संताप पंजाब ने दशकों तक...

जालंधर (बहल, सोमनाथ):  भारतीय सेना के प्रमुख जनरल बिपिन रावत द्वारा गत दिवस पंजाब में खालिस्तान लहर के दोबारा उभरने के दावे ने नई चर्चा को जन्म दे दिया है। इस दावे से ऐसा लगने लगा है कि आधी सदी के बाद पंजाब में दोबारा वही हालात बन सकते हैं, जिनका संताप पंजाब ने दशकों तक भोगा है। सेना प्रमुख के दावे के पीछे कारण पिछले कुछ महीने से पंजाब में बन रहे हालात और विदेश में पंजाब के खिलाफ आईएसआई द्वारा खालिस्तान आतंकियों और कश्मीरी आतंकवादियों के साथ मिलकर रची जा रही साजिशें हैं। ये साजिशें आतंकवाद का चेहरा बदलकर रची जा रही हैं। मतलब पंजाब में आतंकी गतिविधियों के पीछे खिलाड़ी पुराने ही हैं, मगर चेहरे नए सामने आ रहे हैं। अब पंजाब में कश्मीरी आतंकवादियों द्वारा आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है।

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पंजाब की अशांति के नए खलनायक
समय के साथ पुराने आतंकी संगठनों का प्रभाव कम होने के बाद आईएसआई द्वारा नए आतंकी संगठन बनाए जाते रहे हैं, जिनकी कमान नए चेहरों को दी गई। वर्तमान में ये चेहरे खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के हैप्पी पीएचडी, परमजीत सिंह पम्मा, गोपाल सिंह चावला हैं, जिनका संबंध सिख फॉर जस्टिम के गुरपतवंत सिंह पन्नू के साथ है। इसका खुलासा पंजाब पुलिस द्वारा गुरुवार को पटियाला से खालिस्तान गदर फोर्स के आतंकी शबनमदीप सिंह की गिरफ्तारी से हुआ है। पुलिस के दावे के अनुसार, शबनमदीप सिंह उर्फ मनिंदर लाहौरिया को पाकिस्तान स्थित उसके आकाओं ने त्योहारों के आगामी मौसम में पुलिस चौकियों और भीड़भाड़ वाले स्थानों को निशाना बनाने को कहा था। डीजीपी सुरेश अरोड़ा के अनुसार, शबनमदीप सिंह की गिरफ्तारी ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और गुरपतवंत सिंह पन्नू के संगठन सिख फॉर जस्टिस के बीच सांठगांठ का खुलासा किया है, क्योंकि उसके एक हैंडलर ने उसकी पहचान एसएफजे के सदस्य के रूप में की।

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कश्मीरी आतंकियों और खालिस्तान आतंकियों के बीच सांठगांठ के बाद नए संगठन आए सामने
पंजाब की शांति भंग करने के साथ-साथ आईएसआई द्वारा हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाउद्दीन, लश्कर-ए-तैयबा संस्थापक हाफिज सईद और जैश-ए-मोहम्मद के माध्यम से कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। बीते माह जालंधर में स्टूडेंट जाहिद गुलजार, यूसुफ, रफीक भट्ट और मोहम्मद इदरिश की गिरफ्तारी के बाद पंजाब में अल कायदा के कश्मीरी आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (ए.जी.एच.) की जड़ें फैलाए जाने का खुलासा हुआ। इसी तरह, पटियाला में आतंकी शबनमदीप सिंह की गिरफ्तारी से खालिस्तान गदर फोर्स आतंकी संगठन का खुलासा हुआ है। इन संगठनों को फंडिंग विदेश में बैठे इनके आका और आईएसआई द्वारा की जाती है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, अगस्त महीने में यू.के. में सिख रेफरेंडम रैली से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवरसीज पाकिस्तानी वेल्फेयर काउंसिल, वर्ल्ड कश्मीर फ्रीडम मूवमेंट, कश्मीरी पैट्रियेटिक फोरम इंटरनेशनल के नेताओं का साथी खालिस्तानी आतंकी परमजीत सिंह पम्मा भी सामने आया था। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, कश्मीरी आतंकियों और खालिस्तान आतंकियों के हाथ मिलाए जाने के बाद नए संगठन अस्तित्व में आ रहे हैं, जो चिंता का विषय हैं। अस्तित्व में आ रहे नये आतंकी संगठनों द्वारा आतंकी वारदातों के लिए युवा चेहरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।  

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कश्मीर में दबाव बनने के बाद आतंकियों ने किया पंजाब का रुख
कश्मीर में सेना की सख्ती के बाद आतंकियों ने पंजाब का रुख कर लिया है। बीते सितंबर माह में जालंधर के आतंकियों ने मकसूदां पुलिस थाने को निशाना बनाते हुए थाने में एक के बाद एक कई बम विस्फोट किए। सोमवार को जालंधर में पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मकसूदां थाने में बम ब्लास्ट की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है। इस मामले में 4 आतंकियों की गिरफ्तारी हुई है। ये ब्लास्ट जाकिर मूसा द्वारा करवाए गए बताए गए। इसी सिलसिले में लुधियाना में भी गिरफ्तारियां हुई हैं। 

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अभी सुलग रही है चिंगारी 
शिरोमणि सिख विद्वान इकबाल सिंह लालपुरा की मानें तो पंजाब में आतंकवाद कभी खत्म नहीं हुआ। आतंकवाद को दबाया गया था, लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। जो चिंगारी दबी हुई थी, उससे कभी-कभार धुआं उठता रहता है और चिंगारी अभी भी सुलग रही है। सरदार लालपुरा की नजरों में पिछले कुछ महीनों से पंजाब में जो हालात बने हैं, ऐसे ही हालात 80 के दशक में बने थे। पंजाब एक बार फिर आजमाइश के दौर से गुजर रहा है। गुरमीत राम रहीम सिंह को माफी दिए जाने, गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और बरगाड़ी कांड के बाद एक बार फिर भावनाएं भड़काई जा रही हैं। इन मुद्दों को बड़ी ही गंभीरता से हल किए जाने की जरूरत है।  

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