Edited By VANSH Sharma,Updated: 24 Mar, 2026 07:10 PM

पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच अब आयोजनों में भी बदलाव साफ दिखाई देने लगा है।
लुधियाना/चंडीगढ़ (गणेश): पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच अब आयोजनों में भी बदलाव साफ दिखाई देने लगा है। “जीरो वेस्ट इवेंट” की अवधारणा तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जिसमें प्लास्टिक के उपयोग को पूरी तरह समाप्त करने पर जोर दिया जा रहा है।
प्लास्टिक बोतलों की जगह पारंपरिक व्यवस्था
ऐसे आयोजनों में प्लास्टिक की बोतलों को पूरी तरह हटाकर उनकी जगह पारंपरिक मटके (घड़े) और स्टील के गिलास का उपयोग किया जा रहा है। इससे न केवल प्लास्टिक कचरे में कमी आती है, बल्कि भारतीय परंपराओं को भी बढ़ावा मिलता है।
सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध
जीरो वेस्ट इवेंट का सबसे अहम पहलू यह है कि पूरे कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार के सिंगल यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया जाता। डिस्पोजेबल प्लेट, कप, चम्मच और अन्य प्लास्टिक सामग्री को पूरी तरह बाहर रखा जाता है, जिससे आयोजन के बाद कचरे का बोझ न्यूनतम रहता है।
पानी बचाने के लिए अपनाया जा रहा ‘3-बकेट सिस्टम’
पानी की बचत को ध्यान में रखते हुए बर्तन धोने के लिए 3-बकेट वॉशिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में एक बाल्टी में प्राथमिक सफाई, दूसरी में साबुन से धुलाई और तीसरी में साफ पानी से कुल्ला किया जाता है। इससे पानी की खपत में उल्लेखनीय कमी आती है।
पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रयास न केवल प्रदूषण को कम करने में सहायक हैं, बल्कि समाज को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने का संदेश भी देते हैं। यदि इसी मॉडल को बड़े स्तर पर अपनाया जाए, तो शहरों में कचरे की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
जीरो वेस्ट इवेंट केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकता बनता जा रहा है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
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