Edited By Urmila,Updated: 17 Feb, 2026 10:41 AM

बाजार में बिकने वाले अनगिनत बेकरी प्रोडक्ट्स की न तो निर्माण की तिथि और न ही एक्सपायरी डेट डिस्प्ले की जाती है, इसके बावजूद ऐसे उत्पाद बाजार में खुलेआम बिक रहे हैं।
लुधियाना (सहगल): बाजार में बिकने वाले अनगिनत बेकरी प्रोडक्ट्स की न तो निर्माण की तिथि और न ही एक्सपायरी डेट डिस्प्ले की जाती है, इसके बावजूद ऐसे उत्पाद बाजार में खुलेआम बिक रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इनकी समय-समय पर सैंपलिंग न करने से बेकरी निर्माण और बिक्री का कार्य करने वालों के हौसले बुलंद हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार बेकरी निर्माण की वस्तुओं में साफ-सफाई का ध्यान न रखने और घटिया तेल के इस्तेमाल से भरपूर मात्रा में ट्रांसफैट पाया जाता है जिनकी समय-समय पर जांच जरूरी है।
जिस तरह सब्जियों में पैस्टीसाइड की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग कोई विशेष दिलचस्पी नहीं दिखाता, इस तरह बेकरी प्रोडक्ट्स की वस्तुओं का निर्माण करने वालों पर भी काफी मेहरबान दिखाई देता है जिसका उदाहरण 18 अक्तूबर 2024 से 1 जनवरी 2026 तक स्वास्थ्य विभाग ने बेकरी प्रोडक्ट्स के सिर्फ 49 सैंपल लिए हैं जो काफी कम हैं। आर.टी.आई. एक्टीविस्ट रोहित सभ्रवाल द्वारा आर.टी.आई. के माध्यम से प्राप्त की गई जानकारी से यह खुलासा हुआ है कि शहर में सैंकड़ों बेकरियां होने के बावजूद उनकी संख्या को मद्देनजर रखते हुए कभी सैंपलिंग नहीं की गई इसके अलावा पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग के फूड कमिश्नरेट से प्राप्त निर्देशों के अनुसार राज्य भर में बार-बार इस्तेमाल होने वाले तेल के सैंपल लिए गए जिसमें से अधिकतर फेल सिद्ध हुए एक बार की गई इस प्रैक्टिस के बाद स्वास्थ्य विभाग ने फिर से मौन धारण कर लिया है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार इस्तेमाल होने वाले तेल से बनी वस्तुएं सेहत के लिए काफी घातक है। इसके अलावा बेकरी उत्पादों में ट्रांसफैट होने के कारण यह हृदय रोगों को बढ़ावा देती है जिसकी निरंतर जांच की आवश्यकता है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर आर पी सिंह इस पर एक स्टडी भी प्रस्तुत कर चुके हैं।
क्या कहते हैं आर.टी.आई. एक्टिविस्ट
आर.टी.आई. एक्टिविस्ट और समाज सेवक रोहित सभ्रवाल का कहना है कि विभाग द्वारा प्राप्त उत्तर में यह कहा गया कि 49 सैंपल में से जिन लोगों के सैंपल फेल हुए होने पर फूड सेफ्टी एक्ट के तहत आवश्यक कार्रवाई की गई है परंतु सवाल यह है कि महीने में कम से कम 10 सैंपल विभिन्न बेकरियों से लिए जाने चाहिएं और इससे पहले एक व्यापक अभियान चलाए जाने की जरूरत है जिसमें व्यापक सैंपलिंग हो।
इस मुहिम के अंतर्गत लोगों को भी जागरूक किया जा सके ताकि ऐसे उत्पादों को खरीदने से पहले उसके निर्माण और एक्सपायरी डेट के बारे में विक्रेता से अवश्य पूछें और किसी प्रकार की कमी पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करें। उन्होंने कहा कि जन सेहत का मुद्दा काफी अहम है इसमें स्वास्थ्य विभाग की भी काफी महत्वपूर्ण भूमिका है। उच्चाधिकारियों को भी चाहिए कि वे जिला स्तरीय टीमों को इस दिशा में एक्टिव रखें।
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