गुरुनगरी में बढ़ रहा प्रदूषण का गंभीर संकट, लोगों पर पड़ सकता है भारी!

Edited By Vatika,Updated: 22 Jan, 2026 10:29 AM

air pollution in amritsar

गुरु नगरी को जहां एक तरफ पवित्र शहर घोषित किया गया है, वहीं दुनिया भर से लोग यहां के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के ...

अमृतसर(सर्बजीत): गुरु नगरी को जहां एक तरफ पवित्र शहर घोषित किया गया है, वहीं दुनिया भर से लोग यहां के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों के दर्शन करने और आध्यात्मिक शांति एवं प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने आते हैं, लेकिन आज यह शहर दिन-प्रतिदिन गंभीर प्रदूषण संकट से घिरता जा रहा है। शहर की हवा में फैल रहा जहर अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। बिगड़ता पर्यावरण न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों के लिए भी एक बड़ी समस्या बन सकता है। शहर के कई बुद्धिजीवी मानना हैं कि अभी भी फैक्टरियां व पुराने वाहन जो सरकार द्वारा कंडम कर दिए जाने के बाद भी चलाए जाने से प्रदूषण बढ़ने का सबसे बड़ा कारण यह है। शहर के आस-पास स्थित औद्योगिक इकाइयों और फैक्टरियों से निकलने वाला काला धुआं सीधे हवा में मिल जाता है, जिससे आम लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है। इसके अलावा सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या ने भी इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। हॉल गेट, पुतलीघर, मजीठा रोड, बटाला रोड, रणजीत एवेन्यू और लॉरेंस रोड जैसे शहर के मुख्य चौराहे हमेशा ट्रैफिक जाम और वाहन धुएं से भरे रहते हैं, जिससे आम लोगों के लिए बाहर निकलना एक बड़ी समस्या बन जाता है।

प्रशासनिक लापरवाही व सुरक्षा के सवाल
शहरवासियों का कहना है कि यह स्थिति प्रशासन की लापरवाही के कारण आई है। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा नियमों का उल्लंघन करने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है। सड़कों की मजबूती व बदलवें रास्तों की कमी कारण यातायात समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। हालांकि नाममात्र की गतिविधि के नाम पर कभी-कभार जांच अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आता। विशेषज्ञों के अनुसार शहर को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सबसे पहले सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट को उत्साहित करने की जरूरत है। वार्षिक योजनाओं में अधिक पौधारोपण और पुराने वाहनों के उपयोग को कम करने पर जोर दिया जाना चाहिए।

प्रदूषण बोर्ड व स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय
प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के उच्च अधिकारी एक्सियन सुखदेव सिंह ने कहा कि हम औद्योगिक इकाइयों की लगातार जांच कर रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाली कई फैक्ट्रियों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। वायु गुणवत्ता में और सुधार के लिए लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष वायु पिछले वर्ष 2024 की तुलना में कहीं अधिक स्वच्छ और ताज़ा है। हालांकि, यह अभी भी शत प्रतिशत शुद्ध नहीं है। अक्सर देखा जाता है कि लोग सड़कों या गलियाें में कूड़ा जलाते हैं। इस लापरवाही से वायु अत्यधिक प्रदूषित होती है।

क्या कहना है महामारी अधिकारी का?
डिस्ट्रिक इपिडिम्योलॉजिस्ट ऑफिसर डा. हरजोत कौर ने कहा कि हवा में बढ़ता प्रदूषण बच्चों और बुजुर्गों के फेफड़ों को सीधा प्रभावित कर रहा है। हमारे पास प्रतिदिन श्वसन संबंधी समस्याओं से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। लोगों को महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए डॉ. हरजोत कौर ने कहा कि प्रदूषित क्षेत्रों में जाते समय मास्क का उपयोग अवश्य करें। बढ़ते प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए प्रत्येक नागरिक को जिम्मेदार होना होगा। यह प्रदूषित हवा बच्चों और बुजुर्गों या किसी भी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए समस्या पैदा कर सकती है, वहीं गर्भवती महिलाओं को भी इससे पूरी तरह बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को घर से बाहर निकलते समय खासकर भीड़भाड़ वाले चौराहों या यातायात क्षेत्रों में, मास्क का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए, इससे जहरीले कणों से बचाव होगा।

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