Edited By Kamini,Updated: 02 Jun, 2026 01:45 PM
पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम एक बार फिर पंजाब की राजनीति केंद्र में आ गया है।
चंडीगढ़ (अंकुर): पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम एक बार फिर पंजाब की राजनीति केंद्र में आ गया है। BJP में रहते हुए कांग्रेस लीडरशिप, खासकर राहुल गांधी और सोनिया गांधी को लेकर हाल ही में किए गए पॉजिटिव कमेंट्स के बाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वाड़िंग ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 2021 में कांग्रेस नहीं छोड़ी होती, तो 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की सरकार फिर से बन सकती थी।
वड़िंग के इस बयान ने न सिर्फ कैप्टन के पॉलिटिकल रोल को फिर से चर्चा में ला दिया है, बल्कि पंजाब कांग्रेस के अंदर पॉलिटिकल संकेतों को लेकर भी नए कयास शुरू कर दिए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस इतनी ही अच्छी पार्टी थी, तो कैप्टन ने इसे 2 बार क्यों छोड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कैप्टन को सब कुछ दिया। वह 2 बार मुख्यमंत्री बने, 2 बार पंजाब कांग्रेस के प्रेसिडेंट रहे और सेंटर में मिनिस्टर भी बने। अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह आज कांग्रेस की तारीफ कर रहे हैं, तो सवाल उठना लाजिमी है कि पार्टी छोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि किसी पद से हटाए जाने का मतलब पार्टी छोड़ना नहीं है। कांग्रेस में कई बड़े नेताओं ने अपने पद छोड़े हैं, लेकिन पार्टी नहीं छोड़ी है। इसलिए कैप्टन को भी पार्टी में रहकर अपनी लड़ाई लड़नी चाहिए थी। उनके जाने से कांग्रेस की एकता टूट गई।
अगर कैप्टन पार्टी में रहते तो पार्टी की इमेज और वोट बैंक दोनों मजबूत होते और हो सकता था कि कांग्रेस सत्ता में वापस आ जाती। असल में, 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को कमान सौंपी गई थी। इसके कुछ महीने बाद 2022 के चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस सिर्फ 18 सीटों पर सिमट गई। तब से यह चर्चा है कि कैप्टन के जाने से कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ है। पिछले कुछ दिनों में कैप्टन अमरिंदर सिंह की बातों ने पंजाब की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। उन्होंने राहुल गांधी की तारीफ की और कहा कि सोनिया गांधी के साथ काम करते हुए उन्हें कभी कोई दिक्कत नहीं हुई।
राहुल गांधी ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं भेजीं और परिवार के दुख के समय भी उनसे संपर्क किया। कैप्टन के ये बयान ऐसे समय में सामने आए हैं, जब पंजाब BJP में नई लीडरशिप को लेकर चर्चा हो रही है और केवल सिंह ढिल्लों को प्रेसिडेंट बनाया गया है। इस वजह से कैप्टन के कमेंट्स सिर्फ पर्सनल फीलिंग्स नहीं हैं, बल्कि एक बड़े पॉलिटिकल सिग्नल के तौर पर भी देखे जा रहे हैं।
कांग्रेस को अभी भी कैप्टन की कमी खल रही है!
पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि राजा वड़िंग का बयान सिर्फ आलोचना नहीं है। जब वह कहते हैं कि कैप्टन होते तो सरकार बन सकती थी, तो इसका मतलब यह भी है कि पंजाब कांग्रेस अभी तक उस लेवल का लीडर नहीं बना पाई है जो सभी ग्रुप्स को एक प्लेटफॉर्म पर ला सके। 2017 के इलेक्शन से पहले भी कांग्रेस की सीनियर लीडरशिप ने हाईकमान पर कैप्टन अमरिंदर सिंह को पार्टी की कमान सौंपने का प्रेशर डाला था। उस समय कैप्टन के चेहरे पर इलेक्शन लड़ा गया था और कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की थी। आज के हालात अलग हैं। पंजाब कांग्रेस में कई बड़े चेहरे हैं, लेकिन ऐसा कोई लीडर नहीं है जिसके आस-पास पूरी पार्टी एकजुट हो सके। कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान भी चिंता की बात
हाल ही में दिल्ली में हुई पंजाब कांग्रेस की मीटिंग के दौरान भी अंदरूनी मतभेद की खबरें सामने आईं। सूत्रों के मुताबिक, अलग-अलग गुटों के बीच खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है। कांग्रेस में कई नेता मौजूदा मैनेजमेंट को लेकर खुलकर अपनी असहमति जता रहे हैं। ऐसे में कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम बार-बार चर्चा में आना दिखाता है कि पार्टी अभी भी ऐसे नेता की तलाश में है जो सभी गुटों को एक साथ ला सके।
BJP में कांग्रेस जितनी जगह नहीं मिली
पॉलिटिकल गलियारों में यह भी चर्चा चल रही है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को BJP में वह पॉलिटिकल जगह नहीं मिल पाई जो उन्हें कांग्रेस में मिली थी। लंबे समय से कांग्रेस की पॉलिटिक्स में रहे कैप्टन के लिए BJP का ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर और वर्किंग कल्चर अलग है। इसीलिए कुछ लोग उनके हालिया बयानों को कांग्रेस के प्रति नरम रुख और पुराने पॉलिटिकल रिश्तों की याद के तौर पर भी देख रहे हैं। हालांकि, कैप्टन ने कभी भी कांग्रेस में वापसी की खुलकर इच्छा नहीं जताई है।
2027 के चुनाव से पहले नया पॉलिटिकल मैसेज
राजा वड़िंग का बयान ऐसे समय में आया है जब पॉलिटिकल पार्टियों ने 2027 के पंजाब असेंबली चुनाव के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कांग्रेस अपने अंदरूनी झगड़े खत्म करके एकता का मैसेज देना चाहती है, जबकि BJP पंजाब में अपना बेस बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में अमरिंदर सिंह को लेकर यह पॉलिटिकल बयानबाजी सिर्फ बीते दिनों की चर्चा नहीं है, बल्कि भविष्य की पॉलिटिक्स से भी जुड़ी है। वड़िंग के बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कांग्रेस अब भी कैप्टन अमरिंदर सिंह की पॉलिटिकल वैल्यू और असर महसूस करती है? दूसरी तरफ, कांग्रेस लीडरशिप को लेकर कैप्टन के नरम बयान भी कई पॉलिटिकल अटकलों को जन्म दे रहे हैं। फिलहाल, कैप्टन की वापसी की कोई संभावना नहीं है, लेकिन एक बात तय है: 2027 के चुनाव से पहले पंजाब की पॉलिटिक्स में कैप्टन का नाम एक बार फिर चर्चा का मुख्य टॉपिक बनता दिख रहा है। वारिंग के बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गरमा सकता है।
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