सिख्स फॉर जस्टिस को नहीं मिला समर्थन, फिर बदला रैफरैंडम-2020 का नाम

Edited By swetha,Updated: 05 Feb, 2020 09:35 AM

sikhs for justice did not get support then renamed refrandom 2020

अन्य धर्मों को भी वोट करने की अपील कर रहा है गुरपतवंत सिंह पन्नू

नई दिल्ली(विशेष): भारत में वैबसाइट ब्लॉक होने, ट्विटर और एप पर रोक लगने के बाद खालिस्तानी संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (एस.एफ.जे.) द्वारा देखे जा रहे बड़े सपनों की तरफ भारतीय अधिकारियों का ध्यान खिंचा है। एस.एफ.जे. ग्रेटर खालिस्तान का सपना देख रही है और इसका मुख्यालय लाहौर बताया जा रहा है। दूसरी तरफ सिख रैफरैंडम-2020 आंदोलन को पंजाब में समर्थन नहीं मिलने के कारण एस.एफ.जे. ने इसका नाम पंजाब रैफरैंडम रख दिया है। संगठन द्वारा अब दलितों और दूसरे धर्मों के लोगों को साथ इस आंदोलन में साथ जोड़ने की कोशिशें की जा रही हैं।

अन्य धर्मों को भी वोट करने की अपील कर रहा है गुरपतवंत सिंह पन्नू
एस.एफ.जे. के प्रचारक गुरपतवंत सिंह पन्नू को सिखों, मुसलमानों के अलावा ‘सिख रैफरैंडम-2020’ नाम के एक फेसबुक ग्रुप पर हाल ही में पोस्ट की गई वीडियो में सभी ईसाइयों और हिंदुओं से अपने ड्रीम प्रोजैक्ट रैफरैंडम-2020 के लिए वोट करने की अपील करते देखा जा सकता है। पन्नू ने कहा, ‘‘रैफरैंडम बंद नहीं हो रहा और यह सभी मुस्लिमों और ईसाई भाइयों के लिए भी है। इसके लिए हम हर घर में पंजीकरण फॉर्म भेजेंगे और मतदान 6 जून, 2020 से शुरू होगा। भारत में अचल संपत्ति वाले हिंदू वोट नहीं दे सकते हैं क्योंकि वहां पर प्रतिबंध है।’’

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फेसबुक पेजों और ‘सिख रैफरैंडम 2020’ जैसे समूहों तक सीमित है पन्नू की गतिविधियां
हालांकि भारत द्वारा विरोध जताए जाने के बाद पन्नू की गतिविधि अब कुछ फेसबुक पेजों और ‘सिख रैफरैंडम 2020’ जैसे समूहों तक सीमित है। एस.एफ.जे. के अलगाववादी भारत विरोधी मोबाइल एप ‘2020 रैफरैंडम’ को नवम्बर, 2019 के दौरान गूगल द्वारा भारत सरकार के आपत्ति जताए जाने के बाद नीचे ले जाया गया था।भारत के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में एस.एफ.जे. और पन्नू के खिलाफ लगभग एक दर्जन आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। सिख रैफरैंडम-2020 फेसबुक ग्रुप पर पोस्ट की गई एक वीडियो में भारतीय और पाकिस्तानी आग को दिखाया गया है और उसके बाद लाहौर में मुख्यालय के साथ ग्रेटर खालिस्तान का नक्शा दिखाई देता है।एस.एफ.जे. द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बावजूद पंजाब के सिखों ने इसके जनमत संग्रह का जवाब नहीं दिया। इस संगठनने अपने सम्मेलनों में शामिल होने के लिए लोगों को नौकरी और मुफ्त हवाई टिकट भी दिए थे जिनमें कुछेक ने भाग लिया था।

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यह पहली बार नहीं कि रैफरैंडम का नाम बदला गया हो
दूसरी तरफ समर्थन नहीं मिलने पर एस.एफ.जे. ने अपने खालिस्तान सपने को पुनर्गठित किया है। इसे कई बार अपना शीर्षक बदलने के लिए भी मजबूर किया गया है। अपनी वैबसाइट और ट्विटर हैंडल ब्लॉक करने से पहले जो मूल नामकरण ‘2020 रैफरैंडम’ था, उसे बदलकर ‘सिख रैफरैंडम-2020’ कर दिया गया और हाल ही में ‘पंजाब इंडीपैंडैंस रैफरैंडम-2020’ नाम दिया गया है। गुरपतवंत सिंह पन्नू और उनके साथी पंजाब में दर्ज कई मामलों में वांछित हैं। उन पर आतंकी फंडिंग के अलावा भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का भी आरोप है। सिख रैफरैंडम-2020 फेसबुक ग्रुप पर पोस्ट किए गए कुछ वीडियो यह भी संकेत देते हैं कि वे राइट-विंग हिंदू संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) के खिलाफ भी अभियान चला रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तान के एक गैंगवार में मारे गए खालिस्तानी आतंकवादी हैप्पी सिंह उर्फ पी.एच.डी. को पंजाब में आर.एस.एस. नेताओं की टार्गेट किलिंग का मास्टरमाइंड माना जाता है। जांच में पता चला है कि एस.एफ.जे. ने इनमें से कुछ टार्गेट किलिंग के लिए वित्तपोषित किया था।

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आई.एस.आई. के एजैंडे को आगे बढ़ा रहा है खालिस्तानी संगठन
पंजाब सहित देश के दूसरे भागों में आतंकी गतिविधियां बढ़ाने और देश में अस्थिरता का माहौल पैदा करने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजैंसी आई.एस.आई. लंबे समय से कोशिश कर रही है। खुफिया एजैंसियों के अनुसार खालिस्तान संगठन सिख्स फॉर जस्टिस को भी आई.एस.आई. द्वारा फंडिंग करवाई जा रही है। यही नहीं, इस संगठन को भारत में मोस्ट वांटेड आतंकियों हरदीप सिंह निज्झर और परमजीत सिंह पम्मा सहित कई मुस्लिम संगठनों का समर्थन प्राप्त है तथा ये लोग और संगठन एस.एफ.जे. को वित्तीय मदद कर रहे हैं। खुफिया एजैंसियों के अनुसार आई.एस.आई. एस.एफ.जे. को अपने मिशन में कामयाब करवाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पाक सेना का लैफ्टिनैंट कर्नल शाहिद मोहम्मद मल्ही आंदोलन को बढ़ावा दे रहा है और अमरीका, कनाडा और यू.के. में खालिस्तान समर्थकों को एकजुट करने में लगा है।   

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