कड़ाके की ठंड में छुट्टियों के 'एक्स्ट्रा डोज' ने बढ़ाई टैंशन, बिगड़ा शैड्यूल

Edited By Kalash,Updated: 01 Jan, 2026 11:50 AM

students trouble exams

पंजाब सरकार द्वारा कड़ाके की ठंड को देखते हुए स्कूलों की छुट्टियां 7 जनवरी तक बढ़ाने के फैसले ने जहां बच्चों को रजाई में दुबके रहने का एक और मौका दे दिया है

लुधियाना (विक्की): पंजाब सरकार द्वारा कड़ाके की ठंड को देखते हुए स्कूलों की छुट्टियां 7 जनवरी तक बढ़ाने के फैसले ने जहां बच्चों को रजाई में दुबके रहने का एक और मौका दे दिया है, वहीं निजी स्कूलों और अभिभावकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देशों पर इस छुट्टी का ऐलान तो कर दिया लेकिन इस एक फैसले ने खासकर निजी स्कूलों के पूरे शैक्षणिक कैलेंडर' को हिलाकर रख दिया है। खासकर 10वीं और 12वीं के उन विद्यार्थियों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है जिनके लिए जनवरी का पहला हफ्ता प्री-बोर्ड और रिवीजन के लिहाज से सबसे अहम रहने वाला था। अब स्कूलों के सामने चुनौती यह है कि वे बोर्ड परीक्षाओं से ठीक पहले सिलेबस और टैस्ट्स को सीमित समय में कैसे पूरा करेंगे।

स्कूल फिर से सरकार के एकाएक लिए गए फैसले का दबी जुबान में विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इस एक हफ्ते ने पूरा शैड्यूल बिगाड़ कर रख दिया है। इस सप्ताह में कई स्कूलों ने अध्यापकों की सी.बी.एस.ई. ट्रेनिंग रखी हुई हैं और अन्य में प्री-बोर्ड एग्जाम रखे हुए हैं ताकि उनके रिजल्ट के आधार पर एवरेज बच्चों की एक्स्ट्रा क्लासेज की रूपरेखा तैयार की जा सके, क्योंकि सी.बी.एस.ई. की परीक्षा आने वाले 45 दिन में शुरू होने वाली है।

दोबारा शैड्यूल बनाने की चुनौती

छुट्टियां बढ़ने का सबसे बड़ा खामियाजा उन रणनीतियों को भुगतना पड़ रहा है जो स्कूलों ने बोर्ड परीक्षाओं के लिए तैयार की थीं। जनवरी के पहले सप्ताह में कई स्कूलों ने प्री-बोर्ड परीक्षाएं, रिवीजन क्लासेज और सी.बी.एस.ई. की महत्वपूर्ण वर्कशॉप्स रखी थीं जिन्हें अब आनन-फानन में टालना पड़ा है। स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि वे बच्चों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद थे। स्कूलों में हीटर से लेकर गर्म पानी तक के पुख्ता इंतजाम थे जिससे बच्चे घर के मुकाबले स्कूल परिसर में ज्यादा सुरक्षित और अनुशासित रहते। अब अचानक छुट्टियां बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई की जो लय बनी हुई थी, वह पूरी तरह टूट गई है। शिक्षकों का मानना है कि घर पर रहकर विद्यार्थी उस गंभीरता से तैयारी नहीं कर पाते जो स्कूल के माहौल में मुमकिन है।

वर्किंग पेरैंट्स के लिए बच्चों की निगरानी बनी बड़ी सिरदर्दी

सिर्फ स्कूल ही नहीं, बल्कि नौकरीपेशा अभिभावकों के लिए भी ये बढ़ी हुई छुट्टियां किसी आफत से कम नहीं हैं। वर्किंग पेरैंट्स का कहना है कि दफ्तर के काम के साथ बच्चों की दिनभर की निगरानी और उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करना एक बड़ा टास्क बन गया है। बच्चों की देखरेख और ऑफिस की जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बैठाना अब उनके लिए बड़ी चुनौती है। वहीं विद्यार्थियों का दर्द भी कम नहीं है, बोर्ड परीक्षाएं सिर पर हैं और ऐसे में शिक्षकों के मार्गदर्शन और डाऊट क्लीयरिंग सैशन से दूर रहकर उन्हें अपनी तैयारी अधूरी लग रही है। कुल मिलाकर, सरकार का यह राहत भरा फैसला अब शिक्षा के नजरिए से बड़ी आफत बनता नजर आ रहा है।

क्या कहते हैं अभिभावक

अभिभावक सुनील कुमार ने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं से पहले का यह समय सबसे अहम होता है लेकिन छुट्टियां बढ़ने से बच्चों की पढ़ाई का अनुशासन बिगड़ गया है और घर पर पढ़ाई पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा। अभिभावक रीना गुप्ता ने कहा कि वर्किंग पेरैंट्स के लिए बच्चों की दिनचर्या संभालना बेहद मुश्किल हो गया है, क्योंकि स्कूल बंद होने से बच्चों का समय मोबाइल और अन्य गतिविधियों में अधिक जा रहा है।

स्कूलों में पहले से ही हीटर, गर्म पानी और स्वास्थ्य सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्थाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद छुट्टियां बढ़ने से प्री-बोर्ड परीक्षाएं, सी.बी.एस.ई. वर्कशॉप्स और बोर्ड परीक्षा तैयारी का पूरा शैड्यूल प्रभावित हो गया है। सरकार को अगर छुट्टियां करनी ही थीं तो प्राइमरी तक के बच्चों को कर देती लेकिन 10वीं से 12वी तक के छात्रों के लिए ये दिन बड़े ही महत्वपूर्व होते हैं।

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