Edited By Vatika,Updated: 04 Apr, 2025 01:10 PM

पंजाब के प्रमुख शहर जालंधर में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अब तक 900 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है
जालंधर (खुराना): पंजाब के प्रमुख शहर जालंधर में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत अब तक 900 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है, लेकिन शहर की सड़कों पर बढ़ता ट्रैफिक जाम और पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की कमी आज भी गंभीर समस्या बनी हुई है। जालंधर नगर निगम की हालत इतनी दयनीय है कि शहर के चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइटों को वह ढंग से नहीं चला पा रहा। शहर की कोई लाइट सिंक्रोनाइज नहीं है जिस कारण हर जगह ट्रैफिक जाम के दृश्य देखने को मिलते हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अफसरों और नेताओं ने इस भारी-भरकम राशि का उपयोग शहर के बुनियादी ढांचे को बेहतर करने या सिटी बस सर्विस जैसे जरूरी प्रोजैक्ट्स को लागू करने की दिशा में नहीं किया बल्कि ऐसे प्रोजैक्टों पर पैसा खर्च कर दिया गया जिनकी कोई जरूरत भी नहीं थी।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद अफसरों ने कुछ ठोस नहीं किया
पिछले साल जुलाई में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जालंधर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने के लिए सिटी बस सर्विस शुरू करने के आदेश दिए थे। इसके तहत जालंधर स्मार्ट सिटी के उस समय के सीईओ ने दो संस्थाओं एस.जी. आर्किटैक्ट्स और काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमैंट एंड वाटर के साथ एक एम.ओ.यू. साइन किया था। इन संस्थाओं को मुफ्त कंसल्टैंसी सर्विसेज के जरिए यह तय करना था कि शहर में कितनी बसें, किन रूट्स पर और किस तरह की व्यवस्था की जरूरत है, लेकिन लगभग नौ महीने बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आ रही है।
स्मार्ट सिटी फंड के दुरुपयोग कारण शहर पहले जैसा ही
जालंधर की करीब 12 लाख आबादी आज ट्रैफिक जाम और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी से जूझ रही है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कई साल पहले सिटी बस प्रोजैक्ट की घोषणा की गई थी और करीब 150 बसें चलाने की बात भी कही गई थी। लेकिन इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ। मौजूदा संसाधनों के अलावा शहर पर 900 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो चुके हैं, लेकिन सड़कों की हालत वही है, ट्रैफिक जाम रोज की समस्या है और बसों का तो नामोनिशान नहीं। यह पैसा कहां गया, किसी के पास कोई जवाब नहीं है।
पहले भी लापरवाही दिखा चुके हैं अफसर
जालंधर में सिटी बस सर्विस कोई नई बात नहीं है। अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल में 10-12 साल पहले यह सर्विस शुरू की गई थी, जो कुछ समय तक सफलतापूर्वक चली। मात्र 10-20 रुपए में लोग शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक सफर कर पाते थे, लेकिन निगम अधिकारियों की लापरवाही और प्रबंधन की कमी के चलते यह सर्विस बंद हो गई।शहर में प्राइवेट वाहनों की बढ़ती संख्या ने ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक प्रभावी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम ही इन समस्याओं का समाधान हो सकता है। कंसल्टैंसी सर्विसेज के तहत यह भी तय किया जाना था कि इलैक्ट्रिक बसों जैसे पर्यावरण फ्रैंडली उपायों को कैसे लागू किया जाए, लेकिन अभी तक कोई सर्वे रिपोर्ट सामने नहीं आई है।