Edited By Vatika,Updated: 02 Jul, 2026 12:20 PM

महंगाई का असर अब निर्माण कार्यों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ईंटों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम और गरीब वर्ग की चिंताएं बढ़ा
पंजाब डेस्क: महंगाई का असर अब निर्माण कार्यों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ईंटों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम और गरीब वर्ग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। वर्षों की मेहनत की कमाई जोड़कर अपने सपनों का घर बनाने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए अब मकान बनवाना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ समय पहले की तुलना में ईंटों की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है। वर्तमान में एक हजार ईंटों की कीमत 8,000 से 9,000 रुपये तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर मकान निर्माण की कुल लागत पर पड़ रहा है। ईंटों के साथ-साथ सीमेंट, सरिया, रेत और मजदूरी के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में एक सामान्य परिवार के लिए नया घर बनवाना बड़ी चुनौती बन गया है। लोगों का कहना है कि पहले जितनी राशि में मकान का बड़ा हिस्सा तैयार हो जाता था, अब उसी रकम में मुश्किल से नींव का काम पूरा हो पाता है।
महंगाई के कारण कई परिवारों ने अपने मकान का निर्माण बीच में ही रोक दिया है, जबकि कई लोगों ने फिलहाल घर बनाने की योजना टाल दी है। निर्माण सामग्री से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के चलते ग्राहकों की संख्या भी कम हो गई है। पहले जहां रोजाना कई लोग ईंटें और अन्य निर्माण सामग्री खरीदने आते थे, वहीं अब अधिकांश लोग सिर्फ भाव पूछकर लौट जाते हैं। इसका असर निर्माण कारोबार के साथ-साथ मजदूरों के रोजगार पर भी पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि महंगाई का सबसे ज्यादा बोझ गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। लोगों का कहना है कि हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना एक पक्का घर हो, लेकिन मौजूदा हालात में यह सपना पूरा करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। यदि निर्माण सामग्री की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अपना घर बनाना सिर्फ एक सपना बनकर रह जाएगा।