हमें अपना 5 हजार साल पुराना विरासती खेती पेशा बचाने हेतू एकजुट होने की जरूरत: सिद्धू

Edited By Mohit,Updated: 28 Sep, 2020 10:14 PM

navjot singh sidhu

पूर्व कैबिनेट मंत्री पंजाब व विधायक नवजोत सिंह सिद्धू ने आज नजदीकी गांव मानवालां में एक...........

धूरी (संजीव जैन): पूर्व कैबिनेट मंत्री पंजाब व विधायक नवजोत सिंह सिद्धू ने आज नजदीकी गांव मानवालां में एक इकट्ठ को संबोधित करते हुए कहा कि हमें अपने 5 हजार साल पुराने विरासती खेती पेशे को बचाने के लिए केन्द्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट हो कर लड़ने व सभी राजनीतिक पार्टियों को अपने सियासी हितों से ऊपर उठ कर किसानों के साथ खड़े होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि हम अब भी एकजुट ना हुए तो आने वाले समय में अंबानी और अडानी जैसों का राज होगा। इससे पहले पूर्व हलका विधायक धनवंत सिंह ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि मैं नवजोत सिंह सिद्धू के पिता की वजह से ही राजनीति में आया था तथा सिद्धू परिवार के साथ मेरा नाखून-मांस का रिश्ता है।

नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने शायराना अंदाज से शुरू किए संबोधन में कहा कि आज लड़ाई पगड़ी की है तथा पंजाब के सभी लोग मेरी पगड़ी के एक-एक लड़ जैसे हैं। उन्होंने केन्द्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों का विरोध करते हुए कहा कि हरी क्रांति लाकर देश को अन्न के मामले में आत्मनिर्भर करने वाले पंजाब के किसानों को आज केन्द्र धक्के खाने के लिए मजबूर कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर तो पूंजीपतियों के 5-5 लाख करोड़ रुपए के कर्जे माफ किए जा रहे हैं तथा 15 लाख करोड़ रुपए लेकर देश के बड़े उद्योगपति विदेशों को भाग गए हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों की फसल का एम.एस.पी भी खत्म किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमरीका और यूरोप के देशों में फेल हुए सिस्टम को हम पर जबरन थोपा जा रहा है तथा केन्द्र सरकार द्वारा फसलों का मंडीकरन करके किसानों को मजदूर बनाने की साजिश रची जा रही है।

नवजोत सिद्धू ने कहा कि सरकार लोगों की मुश्किलों को हल करने के लिए होती हैं, पीठ दिखाने के लिए नही तथा यदि पंजाब सरकार दूध पर एम.एस.पी देती है, तो फिर केन्द्र सरकार फसलों पर एम.एस.पी क्यों नही दे सकती? उन्होंने कहा कि जरूरत फसलों के भंडारण के लिए गोदामों की क्षमता बढ़ाने की है तथा सरकार को बाहर से दालें आदि मंगवाने की बजाए देश के किसानों को यह फसलें पैदा करने के लिए उत्साहित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों ने अपनी फसलों का सही मूल्य लेना है, तो सहकारिता सिस्टम को अपनाने की जरूरत है, जिसके लिए राज्य सरकार को भी किसानों की मदद करनी चाहिए।

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