Edited By Kamini,Updated: 15 May, 2026 02:06 PM

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी या संदिग्ध लेन-देन के नाम पर बैंक खातों को पूरी तरह फ्रीज करने की कार्रवाई पर एक और महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है।
चंडीगढ़ (गम्भीर): पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने साइबर धोखाधड़ी या संदिग्ध लेन-देन के नाम पर बैंक खातों को पूरी तरह फ्रीज करने की कार्रवाई पर एक और महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि जांच एजैंसियां या बैंक बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाएं किसी नागरिक के पूरे बैंक खाते पर रोक नहीं लगा सकते। जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने याचिकाकर्त्ता ईशान की याचिका स्वीकार करते हुए पंजाब नैशनल बैंक को उसका बैंक खाता एक सप्ताह के भीतर खोलने का निर्देश दिया है।
इससे पहले भी ऐसा ही मामला सुनवाई के लिए हाईकोर्ट में आया था। मामले में याची ने कोर्ट को बताया कि उसके खाते को बिना किसी पूर्व सूचना के फ्रीज कर दिया गया। बैंक ने कथित तौर पर कानून प्रवर्तन एजैंसियों के निर्देश पर यह कदम उठाया। खाते में 1,01,886 रुपए की कुछ संदिग्ध एंट्रियां दर्ज थीं, जिन्हें बैंक ने संदिग्ध राशि मान लिया, लेकिन याची न तो किसी एफ.आई.आर. में नामजद था और न ही किसी वित्तीय अपराध में उसकी भूमिका का कोई ब्यौरा था। इसके अलावा सक्षम मैजिस्ट्रेट का कोई अटैचमैंट आदेश भी उपलब्ध नहीं था। हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि याची का पूरा बैंक खाता बहाल किया जाए, जबकि विवादित 1,01,886 रुपए की राशि फिलहाल फ्रीज रहेगी।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर किसी अकाउंट में संदिग्ध रकम है, तो भी पूरी बैंकिंग एक्टिविटी रोकना गलत, मनमाना और नागरिक के रोजी-रोटी के अधिकार पर बेवजह हमला है। कोर्ट ने कहा कि किसी बेगुनाह अकाउंट होल्डर को सिर्फ इसलिए सज़ा नहीं दी जा सकती क्योंकि किसी तीसरे पक्ष ने उसके अकाउंट में संदिग्ध रकम जमा कर दी है। कोर्ट ने आदेश दिया कि पिटीशनर का पूरा बैंक अकाउंट फिर से चालू किया जाए, जबकि 1,01,886 रुपये की विवादित रकम अभी फ्रीज रहेगी और उसका इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि अगर भविष्य में जांच के दौरान किसी भी अपराध में पिटीशनर की भूमिका सामने आती है, तो संबंधित एजेंसियां कानून के मुताबिक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगी।
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