हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद पूर्व सरपंचों को नहीं मिला मानदेय, दी सख्त चेतावनी

Edited By Kamini,Updated: 27 Jun, 2026 05:55 PM

former sarpanchs issue a warning

माननीय हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद पूर्व सरपंचों को उनका बनता मानदेय न दिए जाने के कारण पूर्व पंचायती नुमाइंदों में सरकार और बी.डी.पी.ओ. दफ्तरों के खिलाफ भारी रोष पाया जा रहा है।

हाजीपुर (जोशी): माननीय हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद पूर्व सरपंचों को उनका बनता मानदेय न दिए जाने के कारण पूर्व पंचायती नुमाइंदों में सरकार और बी.डी.पी.ओ. दफ्तरों के खिलाफ भारी रोष पाया जा रहा है। इस संबंध में जानकारी देते हुए पूर्व सरपंच जगदीश सिंह सुंदरपुर, मनमोहन सिंह बडालियां और सुरिंदर कुमार रिंकू बडालियां ने संयुक्त रूप से बताया कि माननीय हाईकोर्ट द्वारा साल 2013 से 2023 तक के बनते मानदेय का भुगतान एक निश्चित तिथि से पहले करने के निर्देश जारी किए गए थे।

इसमें कहा गया था कि जिन ग्राम पंचायतों के पास अपनी आय के स्रोत हैं, वे अपने स्तर पर मानदेय का भुगतान करेंगी और जिन पंचायतों के पास आय के साधन नहीं हैं, उनके सरपंचों को पंचायत समितियों या जिला परिषद के फंड में से भुगतान किया जाना था। विभाग द्वारा इस संबंधी पूरी रिपोर्ट डायरेक्टर-कम-विशेष सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग को नवंबर 2025 में भेजी जानी थी। लेकिन अलग-अलग ब्लॉकों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा, जिसका उच्च अधिकारियों द्वारा गंभीर नोटिस लिया गया है। इसके तहत ब्लॉक हाजीपुर द्वारा महज नाममात्र का भुगतान किया गया और बाकी ब्लॉकों द्वारा भी पूरा भुगतान नहीं किया गया।

जिला विकास एवं पंचायत अफसर होशियारपुर ने पत्र जारी कर स्पष्ट किया है कि पूर्व सरपंचों द्वारा मुख्य कार्यालय को लगातार शिकायतें भेजी जा रही हैं कि पंचायतों के पास फंड होने के बावजूद उन्हें मानदेय नहीं दिया जा रहा है। डी.डी.पी.ओ. ने सख्त लहजे में कहा है कि यदि मानदेय न मिलने के कारण पूर्व सरपंच हाईकोर्ट में कोई रिट दायर करते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी। पूर्व सरपंचों ने सरकार और पंचायत विभाग को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि माननीय हाईकोर्ट और डी.डी.पी.ओ. होशियारपुर के आदेशों के बावजूद उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि उनका बनता मानदेय तुरंत जारी नहीं किया गया, तो वे इंसाफ के लिए फिर से माननीय हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होंगे।

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