न पितातुल्य कैप्टन का हठ हारा और न ही पुत्र समान सिद्धू का स्वाभिमान

Edited By Suraj Thakur,Updated: 22 Jul, 2019 11:30 AM

dispute between captain and sidhu

पंजब कैबिनेट से इस्तीफा दे चुके पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस में शामिल होने से पहले ही सी.एम. कैप्टन अमरेंद्र सिंह को अखरने लगे थे। विधानसभा चुनाव से पहले भी डिप्टी सी.एम. के लिए सिद्धू के नाम की चर्चा थी, जिन्हें बतौर कांग्रेस...

जालंधर(सूरज ठाकुर):पंजब कैबिनेट से इस्तीफा दे चुके पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस में शामिल होने से पहले ही सी.एम. कैप्टन अमरेंद्र सिंह को अखरने लगे थे। विधानसभा चुनाव से पहले भी डिप्टी सी.एम. के लिए सिद्धू के नाम की चर्चा थी, जिन्हें बतौर कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरेंद्र पहले ही नकार रहे थे। 2017 में कांग्रेस के सत्ता में आते ही सिद्धू के डिप्टी सी.एम. बनने के मंसूबों पर पानी फिर गया क्योंकि बहुमत से कांग्रेस की जीत होने पर हाईकमान ने कैप्टन की सुनी। वहीं से ही दोनों के बीच विवादों की पटकथा शुरू हो गई थी। इसके बाद विवाद इतने गहराए कि न कैप्टन का हठ हारा और न ही सिद्धू का स्वाभिमान। ऐसा माना जा रहा है कि सिद्धू कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के करीबी हैं। वह कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे। बहरहाल जब तक सिद्धू कांग्रेस में हैं उनका कैप्टन के साथ शीतयुद्ध जारी रहेगा। 

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2016 में भाजपा से दिया इस्तीफा
सिद्धू 2014 में अमृतसर से टिकट काटे जाने से नाराज थे, हालांकि 22 अप्रैल, 2016 को उन्हें मोदी सरकार ने राज्यसभा सदस्य मनोनीत कर दिया था लेकिन 26 अप्रैल को शपथ लेने के बाद 18 जुलाई को उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दिया। उन्होंने 14 सितम्बर, 2016 को उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को अपना इस्तीफा भी भेज दिया। इसके बाद उनकी पत्नी व पूर्व विधायक डा. नवजोत कौर ने भी 8 अक्तूबर, 2016 को भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। 2017 में पंजाब विधानसभा के चुनाव थे और दोनों पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे थे। इस बीच ‘आप’ में शामिल होने की चर्चाएं चलीं लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ी। वहीं चौथे मोर्चे की भी बात नहीं बनी। 

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कांग्रेस में एंट्री की कहानी
अक्तूबर, 2016 में पंजाब में सिद्धू के कांग्रेस आलाकमान से संपर्क में होने की चर्चा चली। इस दौरान पंजाब कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरेंद्र सिंह थे। सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर 28 नवम्बर, 2016 को कांग्रेस में शामिल हो गईं, अब यह तय था कि नवजोत सिंह सिद्धू भी कांग्रेस में शामिल होंगे। पंजाब में 4 फरवरी, 2017 को विधानसभा चुनाव घोषित हो चुके थे। 10 जनवरी, 2017 को उनके डिप्टी सी.एम. बनने की अटकलें इतनी ज्यादा तेज हो चुकी थीं कि कांग्रेस आलाकमान ने उनकी शर्त मान ली है। इसी बीच 11 जनवरी, 2017 को कैप्टन ने दावा किया कि सिद्धू का कांग्रेस में शामिल होने का फैसला बिना शर्त है। उन्होंने कहा कि सिद्धू अमृतसर पूर्व विधानसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार होंगे। 15 जनवरी को राहुल गांधी की मौजूदगी में सिद्धू ने कांग्रेस ज्वाइन की।

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लोकसभा चुनाव में बिगड़ी बात
लोकसभा चुनाव में पंजाब में 4 सीटें हारने के बाद पंजाब कांग्रेस ने सिद्धू को जिम्मेदार ठहराया। इससे पूर्व वह पत्नी नवजोत कौर को चुनाव में टिकट न देने के लिए भी खफा थे। सी.एम. कैप्टन अमरेंद्र ने 6 जून को मंत्रिमंडल के पुनर्गठन में नवजोत सिंह सिद्धू से स्थानीय निकाय, पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों का विभाग लेकर उन्हें बिजली विभाग दिया था। नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने नए मंत्रालय का प्रभार संभालने से इंकार कर दिया। सिद्धू ने राहुल से मुलाकात के अगले दिन 10 जून को इस्तीफा लिखा और उसे 14 जुलाई को सार्वजनिक करते हुए पद छोडऩे का ऐलान कर दिया। इस्तीफा कैप्टन ने शनिवार सुबह मंजूर कर लिया था और कुछ घंटों बाद राज्यपाल ने भी इस्तीफे पर मोहर लगा दी।

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चुनाव जीतने के बाद
11 मार्च को भारी बहुमत से कांग्रेस के विधानसभा चुनाव जीतने पर 12 मार्च को फिर से सिद्धू की डिप्टी सी.एम. बनने की बात उठी। 16 मार्च, 2017 को शपथ ग्रहण समारोह में सिद्धू को डिप्टी सी.एम. न बनाए जाने को लेकर कैप्टन ने आलाकमान को संतुष्ट कर उन्हें कैबिनेट रैंक देकर स्थानीय निकाय और पर्यटन मंत्रालय दे दिया। मीडिया में छपीरिपोर्ट में सिद्धू ने यह कह कर दावेदारी की कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता, हालांकि उन्होंने कहा कि मैं राहुल की सेना का एक सैनिक हूं। पंजाब सरकार में मेरी भूमिका वही तय करेंगे।

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सी.एम. की सीट पर बैठ आए चर्चा में
सरकार बनने के बाद पहले विधानसभा सत्र में ही अचानक सिद्धू सी.एम. की सीट पर बैठ गए। यह शायद पहली घटना थी जो उनकी महत्वाकांक्षा के कारण चर्चा में भी रही। इस बीच पाकिस्तान में सत्ता बदलाव हुआ और वह अपने मित्र इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में जा पहुंचे, इसका कैप्टन ने विरोध किया। वहां पाक आर्मी चीफ  बाजवा से गले मिलने पर वह राजनीतिक दलों के निशाने पर आ गए। करतारपुर कॉरीडोर उद्घाटन समारोह में खालिस्तान समर्थक गोपाल चावला के साथ फोटो वायरल होने पर उन्हें विपक्षी दलों ने गद्दार की संज्ञा दी। इस बीच कांग्रेस के साथियों ने भी मुद्दों को तूल दिया। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ चुनाव प्रचार के दौरान भी उनकी परफॉर्मैंस बढिय़ा रही।

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