पंजाब में दिल दहला देने वाली घटना! कुत्तों ने नोच-नोच मार डाली माता-पिता की इकलौती बेटी

Edited By Kamini,Updated: 11 Jun, 2026 01:52 PM

daughter mauled to death by dogs

आवारा कुत्तों के झुंड के हमले में 8 साल की मासूम बच्ची कीर्ति की मौत हो गई।

मोरिंडा (अरनौली): मोरिंडा से दुखदायी खबर सामने आई है। शहर के वार्ड नंबर 1 में हुई इस बेहद दर्दनाक घटना से पूरे इलाके में मातम छा गया है। आवारा कुत्तों के झुंड के हमले में 8 साल की मासूम बच्ची कीर्ति की मौत हो गई। इस हादसे ने न सिर्फ परिवार की दुनिया उजाड़ दी है, बल्कि शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को एक बार फिर गंभीर चर्चा का विषय बना दिया है।

परिवार वालों के मुताबिक, कीर्ति शाम करीब 4 बजे दूध लेने घर से बाहर गई थी। इसी दौरान आवारा कुत्तों के झुंड ने अचानक उस पर हमला कर दिया। बच्ची की चीखें सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और बड़ी मुश्किल से उसे कुत्तों से बचाया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गई। परिवार और स्थानीय लोगों ने बच्ची को तुरंत इलाज के लिए एक प्राइवेट अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे PGI रेफर कर दिया लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कीर्ति की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। यह दुखद खबर सुनकर परिवार में कोहराम मच गया।

3 साल पहले पिता की हो गई थी मौत 

यह घटना इस बात से और भी दुखद हो गई है कि कीर्ति के पिता की 3 साल पहले मौत हो गई थी। अब मां पूनम देवी ने भी अपनी इकलौती बेटी को हमेशा के लिए खो दिया है। इलाके के लोगों का कहना है कि इस दुख को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। घटना के बाद इलाके के लोगों में भारी रोष है। इलाके के लोगों का आरोप है कि इलाके में आवारा कुत्तों की समस्या काफी समय से चली आ रही है और इस बारे में कई बार नगर परिषद और प्रशासन को अवगत कराया गया लेकिन कोई असरदार कार्रवाई नहीं की गई।

अगर शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होती तो शायद मासूमों की जान बच सकती थी। स्थानीय व्यापारी परदुम्मन सिंह ने कहा कि ये कुत्ते पहले भी कई लोगों को अपना निशाना बना चुके हैं। उनका कहना है कि अगर शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की गई होती तो शायद आज मासूमों की जान बच सकती थी। शहर के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं और इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराया जाए। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ़ एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि पब्लिक सेफ्टी से जुड़े मामलों को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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