पंजाब के मंत्री बोले, सिद्धू की बगावत न रोकी तो कांग्रेस हार जाएगी

Edited By Vatika,Updated: 11 May, 2021 10:00 AM

congress will lose if sidhu s rebellion is not stopped

पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के मुख्यमंत्री पर लगातार हमले के विरोध में कई मंत्री खुलकर मैदान में आ गए हैं।

चंडीगढ़(अश्वनी): पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के मुख्यमंत्री पर लगातार हमले के विरोध में कई मंत्री खुलकर मैदान में आ गए हैं। कैबिनेट मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा, साधु सिंह धर्मसोत व एक अन्य मंत्री ने एकसुर में कांग्रेस हाईकमान से अपील की कि नवजोत सिद्धू के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

मंत्रियों ने कहा कि विधायक सिद्धू द्वारा कै. अमरेंद्र पर निजी किस्म के हमले करना पार्टी विरोधी काम है, जो तुरंत ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग करता है।  सिद्धू द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ लगातार टिप्पणियों को एक लोकतंत्रीय राजनीतिक दल के नाराज मैंबर का गुस्सा कहकर अब और अनदेखा नहीं किया जा सकता। यह खुली बगावत उस समय कांग्रेस के हितों को चोट पहुंचा रही है जब विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय रह गया है। मंत्रियों ने चेतावनी के लहजे में कहा कि सिद्धू के खिलाफ अब कार्रवाई न की तो पार्टी की प्रदेश इकाई में अशांति फैल जाएगी जो पार्टी के लिए उस समय बेहद घातक सिद्ध होगी जबकि 5 राज्यों के हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को बड़ा धक्का लगा है।

मंत्रियों ने कहा कि यह अब बिल्कुल साफ हो चुका है कि सिद्धू की नीयत ठीक नहीं है और उन्हें सिर्फ निजी और राजनीतिक हितों की चिंता है। वह अपने आरोपों द्वारा कै. अमरेंद्र के खिलाफ पंजाब कांग्रेस में विरोध का माहौल सृजन करना चाहते हैं जबकि कै. अमरेंद्र ने 2017 चुनाव में पार्टी को बड़ी जीत दिलाई और उसके बाद राज्य में हर बड़े चुनाव में भी पार्टी की जीत का झंडा बुलंद किया है।

‘सिद्धू के खिलाफ कदम नहीं उठाया तो बगावत करने वालों को शह मिलेगी’
सिद्धू द्वारा सोशल मीडिया पर अपनाए जा रहे हमलावर रुख को कांग्रेस हाईकमान पर दबाव डाल कर गैर-वाजिब मांगें मनवाने की कोशिश करार देते हुए मंत्रियों ने कहा कि पार्टी ने लगातार हो रहे झूठे प्रचार के खिलाफ कोई कदम न उठाया तो अन्य बागियों व ऊंचा उडऩे के इच्छुक सदस्यों को खुले तौर पर कांग्रेस की लीडरशिप के खिलाफ आवाज उठाने की शह मिलेगी। मंत्रियों ने कहा कि यह साफ हो चुका है कि सिद्धू न मानने का फैसला कर चुके हैं और निजी हितों के लिए संकुचित राजनीति खेल रहे हैं। मंत्रियों ने हाईकमान को अपील की कि इस बगावत पर समय रहते रोक लगाई जाए।

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