बाढ़ और बारिश के बाद धान की फसल पर गहराया संकट, चिंता में किसान

Edited By Kamini,Updated: 27 Sep, 2025 05:52 PM

the crisis deepens on the paddy crop

बाढ़ और बारिश के बाद किसानों की चिंता बढ़ती ही जा रही है, जोकि कम होने का नाम ही नहीं ले रहीं है।

जीरा: बाढ़ और बारिश के बाद किसानों की चिंता बढ़ती ही जा रही है, जोकि कम होने का नाम ही नहीं ले रहीं है। आसपास के इलाकों में बाढ़ और लगातार बारिश के बाद अब धान की फसल पर हल्दी रोग (शीथ ब्लाइट) का गंभीर हमला देखा जा रहा है, जिससे किसान बेहद चिंतित हैं। कई जगहों पर फसल पीली पड़नी शुरू हो गई है और धान के तनों व पत्तियों पर पीले धब्बे तथा सड़न के लक्षण स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। खेतों की स्थिति देखते हुए किसान रोग के फैलाव को रोकने के लिए दवाओं का छिड़काव करने में जुट गए हैं।

किसानों का कहना है कि पहले ही बाढ़ के कारण फसल को काफी नुकसान हुआ था और अब रोगों के प्रकोप ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। इस संबंध में जानकारी देते हुए कृषि विशेषज्ञ गुरसाहिब सिंह संधू (गांव बूले) ने बताया कि हल्दी रोग ज्यादातर नमी वाले मौसम और खेतों में पानी ठहरने के कारण फैलता है। उन्होंने कहा कि किसानों को तुरंत खेतों से पानी की निकासी सुनिश्चित करनी चाहिए, क्योंकि अधिक नमी ही इस रोग के फैलने का मुख्य कारण है।

कृषि विशेषज्ञ ने सलाह दी कि किसान ट्राईसाइक्लाजोल या मैनकोजेब जैसी दवाओं का उचित मात्रा में छिड़काव करें और जिन खेतों में रोग अधिक फैल चुका हो, वहां 6-7 दिन के अंतराल पर दूसरा स्प्रे भी जरूर करें। उन्होंने कहा कि दवा के साथ-साथ किसानों को समय-समय पर खेतों का निरीक्षण करते रहना चाहिए, ताकि रोग दोबारा न फैले। उन्होंने यह भी बताया कि जिन खेतों में हल्दी रोग का हमला हो चुका है, वहां अधिक खाद नहीं डालनी चाहिए, क्योंकि इससे रोग और तीव्र हो सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क में रहें और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही उपचार करें। गुरसाहिब सिंह संधू ने कहा कि समय पर सही स्प्रे और खेतों की देखभाल से धान की फसल को बचाया जा सकता है और नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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