गुरु नगरी में स्वाइन फ्लू ने दी दस्तक, दिखे ये लक्षण तो न करें नजरअंदाज

Edited By Kalash,Updated: 31 Aug, 2026 12:27 PM

swine flue case

पंजाब के विभिन्न हिस्सों में इन्फ्लूएंजा और सांस संबंधी बीमारियों के मामलों के बीच अब अमृतसर में भी स्वाइन फ्लू के 2 मामले सामने आए हैं।

अमृतसर (दलजीत): पंजाब के विभिन्न हिस्सों में इन्फ्लूएंजा और सांस संबंधी बीमारियों के मामलों के बीच अब अमृतसर में भी स्वाइन फ्लू के 2 मामले सामने आए हैं। पिछले करीब 10 दिनों के दौरान गुरु नानक देव अस्पताल में दाखिल 2 मरीजों की स्वाइन फ्लू संबंधी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें एक 65 वर्षीय महिला और एक 14 वर्षीय बच्चा शामिल है। दोनों मरीज इलाज के बाद पूरी तरह ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं। हालांकि दो केस सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और गुरु नानक देव अस्पताल प्रशासन ने चौकसी बढ़ा दी है। पंजाब स्वास्थ्य विभाग द्वारा 24 अगस्त को जारी एडवाइजरी के बाद जिले में इन्फ्लूएंजा लाइक इलनेस और सीवियर एक्यूट रैस्पिरेटरी इंफैक्शन की निगरानी और सख्त कर दी गई है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की ओ.पी.डी. में फ्लू कॉर्नर बनाने, संदिग्ध मरीजों की पहचान और आवश्यकतानुसार टैस्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

गुरु नानक देव अस्पताल में आरक्षित रखे 23 बैड 

गुरु नानक देव अस्पताल के इंचार्ज डा. कर्मजीत सिंह ने बताया कि स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए अस्पताल में 23 बैड आरक्षित रखे गए हैं। इसके अलावा एमरजैंसी में डॉक्टरों की विशेष टीम तैनात की गई है, जो 24 घंटे मुस्तैदी से ड्यूटी निभा रही है। उन्होंने बताया कि दोनों पॉजिटिव मरीजों का समय पर इलाज किया गया और अब दोनों ठीक होकर घर जा चुके हैं। उन्होंनेे कहा कि अस्पताल की ओ.पी.डी. में सख्त हिदायतें दी गई हैं कि खांसी, जुकाम और बुखार की शिकायत लेकर आने वाले संदिग्ध मरीजों की आवश्यकतानुसार स्वाइन फ्लू संबंधी जांच करवाई जाए। अस्पताल प्रशासन हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। डा. नरेश चावला ने कहा कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन्स का पालन करना चाहिए। खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित मरीज को तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

205 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की ओ.पी.डी. में फ्लू कॉर्नर 

सिविल सर्जन डॉक्टर रश्मि विज ने बताया कि अमृतसर जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा करीब 205 सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों की ओ.पी.डी. में फ्लू कॉर्नर बनाने के आदेश दिए गए हैं। इन फ्लू कॉर्नरों में फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की अलग से पहचान की जाएगी और जरूरत पड़ने पर टैस्टिंग करवाई जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को आई.एल.आई. और एस.ए.आर.आई. मामलों में असामान्य वृद्धि, अस्पतालों में दाखिलों, मरीजों के क्लस्टर और मौतों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए हैं। गंभीर या हाई-रिस्क मरीजों को आवश्यकतानुसार उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रैफर करने के लिए भी कहा गया है।

2 विशेष आइसोलेशन वार्ड, करीब 40 बैड तैयार 

जिला स्तर पर भी स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 2 विशेष आइसोलेशन वार्डों में करीब 40 बैड तैयार रखे गए हैं। जरूरत पड़ने पर संदिग्ध या पुष्टि वाले मरीजों को इन वार्डों में अलग-अलग रख कर इलाज किया जा सकेगा। सीनियर स्टाफ की ड्यूटी लगाने के प्रबंध भी किए गए हैं।

सिविल सर्जन ने बुलाई एमरजैंसी बैठक 

सिविल सर्जन डा. रश्मि विज द्वारा सीनियर स्वास्थ्य अधिकारियों की एक एमरजैंसी बैठक कर जिले में स्वाइन फ्लू और अन्य श्वसन संक्रमणों से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया गया। उनकी ओर से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की ओ.पी.डी. में फ्लू कॉर्नर बनाने और संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान व जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने लोगों से स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करने और फ्लू जैसे लक्षण होने पर समय पर मैडीकल सलाह लेने की अपील की।

लैब में रोज आ रहे 10 से 12 संदिग्ध सैंपल 

सरकारी मैडीकल कॉलेज अमृतसर की अत्याधुनिक तकनीकों से लैस लैब में जालंधर और अमृतसर के सरकारी अस्पतालों से रोजाना करीब 10 से 12 स्वाइन फ्लू के संदिग्ध सैंपल जांच के लिए पहुंच रहे हैं। लैब इंचार्ज डॉ. के.डी. सिंह के नेतृत्व में टीम द्वारा सैंपलों की सुरक्षित तरीके से जांच करके रिपोर्ट संबंधित अथॉरिटी को भेजी जा रही है। डा. के.डी. सिंह के नेतृत्व वाली लैब टीम ने कोरोना महामारी के दौरान भी दिन-रात काम करके जांच प्रबंधों में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी कार्यशैली और टीम की सेवा को देखते हुए उन्हें सरकार और विभाग द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।

अस्पतालों को ओसेल्टामिविर व ऑक्सीजन का स्टॉक रखने के आदेश 

स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी सरकारी अस्पतालों को जरूरी एंटीवायरल दवाएं, विशेष रूप से ओसेल्टामिविर, ऑक्सीजन, वैंटीलेटर और अन्य आवश्यक लॉजिस्टिक्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। श्वसन संबंधी सैम्पल के समय पर कलैक्शन, पैकिंग, ट्रांसपोर्ट और मंजूरशुदा लैब में टैस्टिंग पर भी जोर दिया गया है।

खांसी-जुकाम को हल्के में न लें लोग 

डाक्टर रजनीश शर्मा के अनुसार बुखार, खांसी, गले में दर्द, शरीर में दर्द, थकान और नाक बहना इन्फ्लूएंजा के आम लक्षण हो सकते हैं। यदि सांस लेने में तकलीफ हो, लक्षण बढ़ें या मरीज की हालत गंभीर हो तो तुरंत डाक्टरी सलाह लेनी चाहिए। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और अन्य हाई-रिस्क मरीजों में लापरवाही से बचने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से बिना डाक्टरी सलाह के एंटीवायरल या अन्य दवाएं खुद लेने से बचने की अपील की है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी, हाथों की सफाई, खांसते और छींकते समय मुंह ढकना और आवश्यकतानुसार मास्क का उपयोग संक्रमण के फैलाव को रोकने में मददगार हो सकता है।

स्वास्थ्य विभाग का संदेश: ‘घबराएं नहीं, सावधान रहें’

सरकारी टी.बी. अस्पताल के सीनियर डॉक्टर संदीप महाजन के अनुसार अमृतसर में स्वाइन फ्लू के दो केस सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा निगरानी और टैस्टिंग बढ़ा दी गई है। दोनों मरीजों के ठीक होकर घर लौटने के कारण फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। विभाग का ध्यान अब संदिग्ध मरीजों की जल्द पहचान, समय पर टैस्टिंग और गंभीर मरीजों को तुरंत इलाज मुहैया करवाने पर है।

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