पब्लिक की सलाह से होगा वन टाइम सैटलमैंट पॉलिसी में बदलाव, सरकार ने मांगे सुझाव

Edited By Vatika,Updated: 01 Jul, 2019 12:56 PM

one time settlement policy

अवैध निर्माणों को रैगुलर करने के मामले में कैप्टन अमरेंद्र सिंह द्वारा दिए गए ऑर्डर पर अमल शुरू हो गया है जिसके तहत पब्लिक की

लुधियाना (हितेश): अवैध निर्माणों को रैगुलर करने के मामले में कैप्टन अमरेंद्र सिंह द्वारा दिए गए ऑर्डर पर अमल शुरू हो गया है जिसके तहत पब्लिक की सलाह से वन टाइम सैटलमैंट पॉलिसी में बदलाव किया जाएगा जिसके लिए सरकार ने बाकायदा लोगों से सुझाव मांगे हैं।

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यहां बताना उचित होगा कि अवैध निर्माणों को रैगुलर करने के लिए लोकल बॉडीज विभाग द्वारा मार्च माह में जो पॉलिसी जारी की गई थी, उसके अधीन कोई खास आवेदन नहीं दिए गए। यह मामला पिछले दिनों हुई अर्बन रिन्यूअल व रिफॉम्र्स ग्रुप की मीटिंग के दौरान कई मंत्रियों व विधायकों द्वारा चीफ  मिनिस्टर के सामने उठाया गया जिसके लिए पॉलिसी में शर्तें व फीस काफी ज्यादा होने का हवाला दिया गया। इस पर कैप्टन ने पॉलिसी में सुधार करने के लिए मंजूरी दे दी है जिस पर अमल के रूप में लोकल बॉडीज विभाग ने पब्लिक नोटिस जारी कर दिया है और लोगों को पॉलिसी में सुधार लाने बारे सुझाव देने के लिए कहा गया है।

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सिद्धू की जिद पड़ गई भारी
इस पॉलिसी के फेल होने का ठीकरा पूर्व लोकल बॉडीज मंत्री नवजोत सिद्धू पर फोड़ा जा रहा है, क्योंकि उनके द्वारा शर्तों व फीस लगाने को लेकर जिद की गई जिस बारे में मंत्रियों द्वारा एतराज जताने के बाद कैप्टन द्वारा कैबिनेट सब कमेटी का गठन किया गया जिसके मैंबर्स द्वारा की गई सिफारिशों को सिद्धू द्वारा नजरअंदाज कर दिया गया।

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रैवेन्यू जुटाने के सपने पर फिरा पानी
इस पॉलिसी के जरिए करोड़ों का रैवेन्यू जुटाने का टारगेट रखा गया था जिस पैसे से विकास कार्यों में तेजी लाने की बात भी कही गई लेकिन पॉलिसी फेल होने की वजह से रैवेन्यू जुटाने के सपने पर पानी फिर गया है।

इस वजह से फेल हुई है पॉलिसी

  • 1000 रुपए वर्ग फुट रखी गई थी कमर्शियल बिल्डिंग को रैगुलर करने की फीस।
  •  सिर्फ डिक्लेयर सड़कों पर बनी हुई अवैध बिल्डिंग को किया जा सकता था रैगुलर।
  •    पार्किंग के लिए वैकल्पिक जगह देने की रखी गई शर्त।
  •   जगह न देने की सूरत में देनी थी फीस।

    इस कैटेगरी के लोगों को होगा पॉलिसी का फायदा 
  •  पूरे पंजाब में नक्शा पास करवाए बिना बनी हुई है बिल्डिंग।
  • ओवर कवरेज के भी हैं मामले।
  • पार्किंग के लिए नहीं छोड़ी गई जगह।
  •  नॉन-कम्पाऊंडेबल कैटेगरी में आती है बिल्डिंग।
  •  गिराने या सील करने की बनती है कार्रवाई
  •   कोर्ट व सरकार के पास पैंङ्क्षडग हैं शिकायतें

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