JEE, NEET & UGC NET में बड़ा बदलाव, अब 'फेस रिकॉग्निशन' से होगी एंट्री

Edited By Urmila,Updated: 27 Dec, 2025 10:59 AM

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नेशनल टैस्टिंग एजैंसी (एन.टी.ए.) द्वारा आयोजित की जाने वाली जे.ई.ई., नीट और यू.जी.सी. नैट जैसी बड़ी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

लुधियाना (विक्की) : नेशनल टैस्टिंग एजैंसी (एन.टी.ए.) द्वारा आयोजित की जाने वाली जे.ई.ई., नीट और यू.जी.सी. नैट जैसी बड़ी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। अब परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने (इम्पर्सनेशन) को रोकने के लिए 'लाइव फोटो' और 'फेस रिकॉग्निशन' (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) का नियम अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।

मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने जानकारी दी कि अब एन.टी.ए. की हर परीक्षा के आवेदन फॉर्म भरते समय छात्र को अपनी लाइव फोटोग्राफ अपलोड करनी होगी। इसके साथ ही छात्र को अपनी लेटेस्ट फोटोग्राफी की स्कैन इमेज (जी.पी.जी./ जी.पी.ई.जी. फॉर्मेट) भी देनी होगी। इस नई व्यवस्था के बाद अब छात्र वर्षों पुरानी फोटो अपलोड नहीं कर सकेंगे। परीक्षा केंद्र पर पहुंचने पर छात्र की लाइव फोटो का मिलान आवेदन के समय ली गई फोटो से किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि फॉर्म भरने वाला छात्र ही परीक्षा देने आया है।

बायोमैट्रिक और ए.आई. का सख्त पहरा

इस बार परीक्षा केंद्रों पर डबल चैक की व्यवस्था होगी। फेस रिकॉग्निशन एक बायोमैट्रिक प्रणाली है, जिसके लिए विभाग ने निविदा (टैंडर) भी जारी कर दी है। इसके अलावा एग्जाम सैंटरों पर सी.सी.टी.वी. और ए.आई. (आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस) जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए हर गतिविधि पर कड़ी निगाह रखी जाएगी। परीक्षा केंद्रों पर तैनात किए जाने वाले ज्यादातर ऑब्जर्वर सरकारी संस्थानों से ही होंगे ताकि व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे।

परीक्षा प्रणाली को डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाने के लिए ई-के.वाई.सी. का नियम भी लागू किया गया है। आधार ऑथैंटिकेशन के माध्यम से यू.आई.डी.ए.आई. के केंद्रीय डेटा रिपॉजिटरी से छात्र के नाम, जन्म तिथि और फोटो का मिलान किया जाएगा। चूंकि आधार कार्ड में माता-पिता का नाम नहीं होता, इसलिए यह जानकारी छात्रों को ऑनलाइन फॉर्म में अलग से भरनी होगी। इसके साथ ही मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि छात्रों को परेशानी से बचाने के लिए उन्हें उनके निवास स्थान से ज्यादा दूर के स्कूल (सैंटर) अलॉट न किए जाएं।

कोचिंग कल्चर पर लगाम की तैयारी

उच्च शिक्षा विभाग अब इस बात पर भी शोध कर रहा है कि आई.आई.टी. जैसे संस्थानों में दाखिला लेने वाले कितने छात्र कोचिंग लेकर आते हैं और कितने बिना कोचिंग के। इसके लिए जे.ई.ई. मेन और एडवांस्ड का डेटा खंगाला जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि भविष्य में कोचिंग सैंटरों पर छात्रों की निर्भरता को कम किया जा सके।

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