Easy या Busy रजिस्ट्री, दफ्तरों में NOC के बाद 'फीफो' बन रही मुसीबत

Edited By Urmila,Updated: 13 Feb, 2026 04:10 PM

fifo is becoming a problem after noc in registry offices

एकतरफ जहां एन.ओ.सी. की प्रक्रिया जटिल होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अमृतसर (नीरज): एकतरफ जहां एन.ओ.सी. की प्रक्रिया जटिल होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं अब ईजी रजिस्ट्री सिस्टम में शुरु किया गया फीफो (फस्ट कम फस्ट सर्व) लोगों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है फीफो के चलते प्रापर्टी रजिस्ट्रेशन, पॉवर ऑफ अटार्नी तबदील मलकीयत सहित अन्य दस्तावेजों की ऑनलाइन अप्रूवल की प्रक्रिया इतनी सुस्त हो चुकी है कि सभी दस्तावेज पूरे होने के बावजूद लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है लोग सब-रजिस्ट्रा दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं। 

फीफो सिस्टम की बात करें तो इस सिस्टम के तहत जब तक पहली अप्वाइंटमेंट से संबंधित फाइल की सारी प्रक्रिया पूरी करके ऑनलाइन अप्रूवल नहीं हो जाती तब तक अगली ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट सब-रजिस्ट्रार की आई.डी में खुलती ही नहीं है यदि किसी व्यक्ति की फाइल किसी तकनीकी कारण, दस्तावेजों की जांच, ऐतराज, किसी गवाह की गैरमौजूदगी या अन्य कारण से रुक जाती है तो उसके चलते अन्य अप्वाइंटमेंटस अपने आप ही रुक जाती हैं। इससे उन लोगों को इंतजार करना पड़ता है जो अपनी अप्वाइंटमेंट लेने के लिए आए होते हैं।

ईजी रजिस्ट्री में पहले अपलोड किए जाते हैं दस्तावेज

ईजी रजिस्ट्री की बात करें तो पता चलता है कि इस सिस्टम के तहत लोगों को पहले संबंधित पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने पड़ते हैं और इसके बाद सब-रजिस्ट्रार की तरफ से ऑनलाइन जांच के बाद अप्रूवल मिलती है। इसके बाद ही संबंधित व्यक्ति ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट ले पाता है यदि इसके बाद भी फाइल को अप्रूवल सीरियल में इसलिए अटका दिए जाए क्योंकि पहली अप्वाइंटमेंट क्लीयर नहीं हुई है तो इससे ईजी रजिस्ट्री बिजी रजिस्ट्री बन जाती है। इस व्यवस्था से वसीका नवीस व अन्य जो रजिस्ट्रियां तैयार करने का काम करते हैं वह परेशान हैं और लोग भी परेशान हो रहे हैं।

ईजी रजिस्ट्री में टाइंम बांऊंड भी बना लोगों के लिए मुसीबत

ईजी रजिस्ट्री सिस्टम में टाइम बाऊंड ऑनलाइन अप्वाइंटमैंट सिस्टम भी लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है नए सिस्टम के तहत यदि किसी व्यक्ति की अप्वाइंटमैंट सुबह 11 बजे या फिर किसी अन्य समय पर फिक्स होती है तो आवेदनकर्त्ता को हर हाल में तय समय से पहले पहुंचकर अपनी दस्तावेजी प्रक्रिया को पूरा करना पड़ता है यदि कोई आवेदनकर्त्ता ट्रैफिक के कारण या फिर किसी अन्य कारण के चलते लेट हो जाता है।

तो नया सिस्टम अपने आप ही अप्वाइंटमैंट को पोर्टल में सब-रजिस्ट्रार की आई.डी से लॉक कर देता है। डीड राइटर्स एसोसिएशन के प्रधान नरेश शर्मा ने बताया कि यदि तकनीकी खराबी, ट्रैफिक जाम या किसी अन्य कारण के चलते लेट हो जाता है तो अप्वाइंटमैंट अपने आप रद हो जाती है। आवेदनकर्त्ता को दोबारा नए सिरे से सारी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। इससे समय बर्बाद होता है और मानसिक परेशानी भी होती है। सरकार से अपील है कि नए सिस्टम में टाइंम बाऊंड में संशोधन किया जाए ताकि लोग परेशान न हो।

जाली रजिस्ट्रिया रोकने में सिस्टम अभी भी नाकाम

सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि ईजी रजिस्ट्री सिस्टम से पारदर्शिता आई है लेकिन जाली दस्तावेजों से होने वाली जाली रजिस्ट्रियों के मामले में नया सिस्टम अभी भी फिसड्डी है। हाल ही में जाली रजिस्ट्रियों के रिकार्ड टूट चुके हैं और 1-2 नहीं बल्कि 8 जाली रजिस्ट्रियां पकड़ी। जिसकी एस.डी.एम. टू दफ्तर की तरफ से जांच करके आरोपियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज करने की लिखित सिफारिश भी की जा चुकी है।

पहले टोकन सिस्टम से आधे घंटे में हो जाती थी रजिस्ट्री

ईजी रजिस्ट्री की बात करें तो इस सिस्टम से पहले ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट लेने के बाद सब-रजिस्ट्रारों की तरफ से लोगों को टोकन दे दिया जाता था आधे घंटे में रजिस्ट्री हो जाती थी लेकिन अब ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट से लेकर अन्य सिस्टम में लोगों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है।

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