Edited By Kalash,Updated: 16 Apr, 2026 02:35 PM

मिडल ईस्ट जंग में अमेरिका-ईरान वार्ता असफल होने के बाद एक बार फिर से घरेलू गैस सिलेंडरों का कालाबाजारी करने वाली कुछ गैस एजैंसियों की बांछें खिल गई हैं
अमृतसर (नीरज): मिडल ईस्ट जंग में अमेरिका-ईरान वार्ता असफल होने के बाद एक बार फिर से घरेलू गैस सिलेंडरों का कालाबाजारी करने वाली कुछ गैस एजैंसियों की बांछें खिल गई हैं आलम यह है कि 35 दिन बीतने के बाद भी घरेलू गैस सिलेंडर बुक करने का साफ्टवेयर इस समय ठप्प पड़ा हुआ है। जिस व्यक्ति को पहले सिलेंडर मिल गया था उसको 25 दिन बाद बुकिंग करवाने के लिए मैसेज आया था लेकिन 25 दिन बाद बुकिंग करने पर बुकिंग ही नहीं हो रही है उल्टा गैस एजैंसी से संपंर्क साधने संबंधी मैसेज आ रहा है जिससे जनता में भारी परेशानी है।
जानकारी के अनुसार पांच सितारा होटलों से लेकर छोटे होटलों, रैस्टोरैंटों व ढाबों आदि में फिलहाल अस्थायी विक्लप तैयार कर लिए हैं जिसमें भट्ठी आदि शामिल हैं लेकिन फिर भी इन व्यापारिक प्रतिष्ठानों जिसमें बड़े होटलों से लेकर छोटे होटल आदि में 3500 रुपये से लेकर 3800 रुपये के बीच सिलेंडर की ब्लैक हो रही है और प्रशासन चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पा रहा है हालांकि डीसी दलविन्दरजीत सिंह की तरफ से फूड एंड सिवल सप्लाई विभाग के अधिकारियों को छापेमारी करने के आदेश जारी किए गए हैं लेकिन जिस प्रकार से गैस एजैंसियों में हालात नजर आ रहे हैं उससे साबित होता है कि डीसी के आदेश का इमानदारी से पालन नहीं किया जा रहा है।
ज्यादातर होटलों ने अपनाए वैकल्पिक साधन
श्री अमृतसर साहिब की बात करें तो यहां की अर्थव्यवस्था टूरिज्म इंडस्ट्री पर निर्भर है और मिड ऑफ मार्च से लेकर जून के अंत तक टूरिस्टों की भारी आमद रहती है रोजाना हजारों की संख्या में टूरिस्ट आ रहे हैं यहां तक कि इस समय अटारी बार्डर स्थित टूरिस्ट गैलरी भी छोटी पड़ चुकी है और लोगों को बाहर खड़े होकर परेड देखने को मजबूर होना पड़ रहा है कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई अभी भी बंद है ऐसे में ज्यादातर होटलों ने वैकल्पिक साधन अपना लिए हैं जिसमें डीजल की भटठियां, इंडक्शन चूल्हा व ब्लैक में लिए जाने वाला घरेलू सिलेंडर शामिल हैं। हर एक होटल मालिक को लाखों रुपये खर्च करके भटठियां खरीदने को मजबूर होना पड़ा है क्योंकि सरकार की प्राथमिकता की सूचि में कमर्शियल गैस सिलेंडर होटलों के लिए अभी भी नहीं है।
विवाह शादियों वाले घर परेशान
विवाह शादी समागमों वाले घर भी इस समय काफी परेशान हैं क्योंकि खाने पीने का सामान बनाने के लिए हलवाईयों के लिए गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं लोग प्रशासन व फूड सप्लाई विभाग के पास आवेदन दे रहे हैं लेकिन विभाग कानूनी रुप से ऐसे घरों को सिलेंडर नहीं दिलवा सकता है हां ब्लैक में जरुर किसी ना किसी गैस एजैंसी से दो से तीन गुना दाम पर सिलेंडर मिल जाता है सबसे बड़ी बात यह है कि अभी तक विभाग ने कितने ब्लैक वाले सिलेंडर पकड़े हैं इसकी सूचि ही विभाग के पास नहीं है जो मिलीभुगत की तरफ साफ इशारा करता है।
संसद में भी गूंच उठा है गैस सिलेंडरों को मुद्दा
होटलों, रैस्टोरैंटस व ढाबों आदि को सीजन में भी कमर्शियल गैस सिलेंडर ना मिलने का मुद्दा सांसद गुरजीत सिंह औजला की तरफ से संसद में भी उठाया गया है जिसमें सरकार से मांग की गई है कि अमृतसर की अर्थव्यवस्था टूरिज्म इंडस्ट्री पर निर्भर है इसलिए यहां के होटलों के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडरों की डिलीवरी में खास छूट दी जाए लेकिन अभी तक इस मामले में कोई साकारात्मक परिणाम नहीं निकले हैं जिससे होटल मालिकों का आर्थिक शोषण हो रहा है।
हर व्यक्ति पर पड़ रही मंहगाई की मार
मिडल ईस्ट जंग की मार इस समय हर व्यक्ति पर पड़ रही है। प्लासटिक के लिफाफे प्रति किलो 50 रुपये तक मंहगे हो गए हैं। सब्जियों के दामों में भी 15 से 20 प्रतिशत बढौतरी हो चुकी है, लौहे व सरिये के दामों में 10 प्रतिशत तक बढ़ौतरी हो चुकी है। गुरु की नगरी की बात करें तो पता चलता है कि यहां आने वाले टूरिस्टों को मंहगाई की मार पड़ रही है क्योंकि होटलों, रैस्टोरैंटस व ढाबों आदि की तरफ से अपनी रसोई में गैस सिलेंडर या भट्ठी आदि के अलावा अन्य विकल्पों पर जितना भी खर्च किया गया है वह टूरिस्ट की जेब पर ही असर डालता है। आम दिनों में मिलने वाला चाय का कप 15 से 20 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है और यही हाल खाने वाली थाली का है कुछ मंहगी डिशस जो कि ज्यादा आग लेती हैं वह मैन्यू से गायब ही हो चुकी हैं।
ब्लैक करने वाली एजैंसियों पर सख्त एक्शन ले प्रशासन
वॉयस ऑफ अमृतसर के प्रधान विजय अग्रवाल ने कहा कि प्रशासन से लिखित रुप से मांग की है कि जो गैस एजैंसियां कमर्शियल व घरेलू गैस सिलेंडरों की ब्लैक कर रही हैं उनकी शिनाख्त करके ऐसी एजैंसियों पर जरुरी वस्तुओं के एक्ट के तहत सख्त एक्शन लिया जाए क्योंकि होटल वाले तो परेशान ही हैं वहीं आम जनता को भी घरेलू सिलेंडर लेने के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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