AAP सरकार में ‘मां बोली’ का उड़ रहा मजाक, सरकारी बोर्डों ने खोली भगवंत मान सरकार की पोल

Edited By Urmila,Updated: 21 Feb, 2026 04:44 PM

claims of language respect fail in punjab

आज जहां पूरी दुनिया में 'अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस' मनाया जा रहा है और समस्त पंजाबी अपनी भाषा पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

बरनाला (विवेक सिंधवानी, रवि): आज जहां पूरी दुनिया में 'अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस' मनाया जा रहा है और समस्त पंजाबी अपनी भाषा पर गर्व महसूस कर रहे हैं, वहीं सिविल अस्पताल बरनाला में लगे सरकारी बोर्ड पंजाबी मातृभाषा का सरेआम मजाक उड़ाते नजर आ रहे हैं। पंजाब सरकार द्वारा मरीजों को सुविधाओं के बारे में जागरूक करने के लिए लगाए गए बोर्डों पर पंजाबी लिखते समय की गई गंभीर गलतियां स्वास्थ्य विभाग के गैर-जिम्मेदाराना रवैये की कहानी बयां कर रही हैं।

सरकारी बोर्डों पर भाषा का निकला जुलूस

अस्पताल प्रशासन द्वारा मरीजों को दवाओं की उपलब्धता और शिकायत दर्ज करवाने के लिए जो जागरूकता बोर्ड लगाए गए हैं, उनमें शब्दों का चयन और बनावट बेहद शर्मनाक है। बोर्ड की शुरूआत में ही विभाग का नाम गलत लिखा गया है। 'पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉर्पोरेशन' की जगह यहां 'पंजाब हेल्थ सिस्टेमज़ कॉर्पोरेशन' लिखकर मातृभाषा की धज्जियां उड़ाई गई हैं।

'संदेश' बना 'संदेस' और 'शिकायत' बनी 'सिकाईत'

हद तो तब हो गई जब मरीजों को दिए जाने वाले 'संदेश' (ਸੰਦੇਸ਼) को 'संदेस' (ਸੰਦੇਸ) लिख दिया गया। इतना ही नहीं, किसी भी तरह की दिक्कत आने पर मरीजों को 'शिकायत' (ਸ਼ਿਕਾਇਤ) करने के लिए कहा गया है, पर बोर्ड पर इसे 'सिकाईत' (ਸਿਕਾਇਤ) लिखा हुआ है। पंजाबी भाषा में 'श' (ਸ पैर बिंदी) का अपना महत्व है, लेकिन सरकारी बोर्ड तैयार करने वालों ने इस बुनियादी नियम को भी ताक पर रख दिया है।

पंजाबी प्रेमियों में भारी रोष

अस्पताल आने वाले मरीजों और स्थानीय पंजाबी प्रेमियों ने इसकी सख्त निंदा की है। उन्होंने कहा कि एक ओर पंजाब सरकार पंजाबी को हर दफ्तर में मुख्य भाषा के रूप में लागू करने के दावे कर रही है और मातृभाषा दिवस पर बड़े समागम आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर सरकारी संस्थानों में ही भाषा का इस तरह हनन किया जा रहा है। ये गलतियां साबित करती हैं कि बोर्ड लगाते समय किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इसकी जांच करना जरूरी नहीं समझा।

लोगों ने मांग की है कि मातृभाषा दिवस के अवसर पर प्रशासन अपनी गलती सुधारे और इन गलत बोर्डों को तुरंत हटाकर शुद्ध पंजाबी में नए बोर्ड लगाए। मातृभाषा का सम्मान केवल भाषणों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सरकारी कामकाज में भी इसकी शुद्धता कायम रहनी चाहिए।

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