अब मान सरकार की मेडिकल सुविधा की खुली पोल! फ्री दवा के बोर्ड तो सिर्फ दिखावा? चौंका देगी सच्चाई

Edited By Kalash,Updated: 21 Feb, 2026 05:54 PM

punjab government medical facilities exposed

पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़े सुधारों के दावे किए जा रहे हैं।

बरनाला (विवेक सिंधवानी, रवि): पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़े सुधारों के दावे किए जा रहे हैं। ‘आम आदमी क्लिनिक’ और पंजाब हेल्थ सिस्टम्स कॉर्पोरेशन के माध्यम से मरीजों को मुफ्त दवाइयां देने के लिए अस्पतालों में बड़े-बड़े बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों में लिखा है कि यदि डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा अस्पताल में न मिले, तो तुरंत मोबाइल नंबर 73472-00994 या मेडिकल हेल्पलाइन 104 पर संपर्क करें। लेकिन सिविल अस्पताल बरनाला में यह सरकारी प्रचार और दावे खोखले दिखाई दे रहे हैं।

पर्ची ने खोल दी सरकारी व्यवस्थाओं की पोल 

ताजा मामला सिविल अस्पताल बरनाला की एक ओपीडी पर्ची से सामने आया है। रजिस्ट्रेशन नंबर 2405 वाली यह पर्ची, जो 21 फरवरी को हरदेव कौर नामक मरीज के नाम पर बनी थी, सरकारी दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस सरकारी पर्ची पर डॉक्टर ने एक स्टैंप लगाई है, जिस पर साफ लिखा है कि मरीज को जो दवा चाहिए, वह सरकारी सप्लाई में उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति सरकार के उन दावों की सच्चाई उजागर करती है, जिनमें कहा जाता है कि मरीजों को 100% दवाइयां अस्पताल के अंदर ही मिलेंगी। एक ओर सरकार मरीजों को शिकायत के लिए जागरूक कर रही है, दूसरी ओर अस्पताल का स्टाफ खुद ही स्टैंप लगाकर दवाइयों की कमी की पुष्टि कर रहा है।

सिविल सर्जन द्वारा डॉक्टर को ‘कारण बताओ’ नोटिस 

इस मामले पर जब सिविल सर्जन बरनाला डॉ. हरीपाल सिंह से बात की गई, तो उन्होंने भी इस पर आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह स्टैंप न तो सरकारी है और न ही विभागीय। डॉ. हरीपाल सिंह ने बताया, “यह स्टैंप संबंधित डॉक्टर ने निजी स्तर पर बनवाई है। हमने इस मामले को गंभीरता से लिया है और डॉक्टर से पूछा गया है कि उन्होंने ऐसा क्यों किया।”

डिप्टी कमिश्नर ने जांच का दिया भरोसा 

डिप्टी कमिश्नर हरप्रीत सिंह (आईएएस) ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला उनके ध्यान में आ चुका है। उन्होंने दवाइयों की कमी के दावों को नकारते हुए कहा कि अस्पताल में दवाइयों की कोई कमी नहीं है। डीसी ने कहा, “मैं पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवा रहा हूँ। यदि किसी स्तर पर लापरवाही मिली, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।”

हालाँकि प्रशासन जांच की बात कर रहा है, लेकिन आम लोगों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि गरीब मरीज सरकारी अस्पताल इसलिए आते हैं ताकि उन्हें मुफ्त दवाइयां मिल सकें। लेकिन यदि अस्पताल खुद ही ऐसी स्टैंप लगाकर उन्हें दवा से वंचित करेगा, तो वे महंगी दवाइयां बाहर से कैसे खरीद पाएंगे? लोगों की मांग है कि केवल बोर्ड लगाने या हेल्पलाइन नंबर जारी करने से स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं सुधरेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।

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