‘डिजिटल अरैस्ट’ के नाम पर ठगी के बढ़ रहे मामले, जनता से की सतर्क रहने की अपील

Edited By Kalash,Updated: 05 Sep, 2026 10:25 AM

beware of digital arrest

साइबर अपराधियों द्वारा पुलिस या किसी केंद्रीय जांच एजैंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों को डराने और ‘डिजिटल अरैस्ट’ के नाम पर ठगी करने के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस कमिश्नर सतिंद्र सिंह ने आम जनता से सतर्क रहने की अपील की है।

जालंधर (धवन): साइबर अपराधियों द्वारा पुलिस या किसी केंद्रीय जांच एजैंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों को डराने और ‘डिजिटल अरैस्ट’ के नाम पर ठगी करने के बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस कमिश्नर सतिंद्र सिंह ने आम जनता से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस कमिश्नरेट जालंधर की ओर से जारी जागरूकता संदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी पुलिस अधिकारी या सरकारी एजैंसी द्वारा फोन अथवा वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को ‘डिजिटल अरैस्ट’ नहीं किया जा सकता। साइबर ठग झूठी धमकियों के जरिए लोगों को मानसिक रूप से भयभीत करते हैं और बाद में उनसे पैसे, ओ.टी.पी. तथा बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं।

पुलिस के अनुसार, ठग फोन पर यह दावा कर सकते हैं कि संबंधित व्यक्ति का आधार कार्ड, मोबाइल नंबर या बैंक खाता किसी अपराध से जुड़ा हुआ है। इसके बाद वे खुद को पुलिस अधिकारी या केंद्रीय जांच एजैंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर रहने, किसी से संपर्क न करने तथा कथित जांच पूरी होने तक ‘डिजिटल अरैस्ट’ में रहने की धमकी देते हैं।

पुलिस कमिश्नर सतिंदर सिंह ने कहा कि कई मामलों में साइबर ठग जांच से बचाने या मामला खत्म करने के नाम पर पीड़ित से पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की मांग साइबर ठगी का संकेत हो सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कोई अज्ञात व्यक्ति पुलिस या किसी सरकारी विभाग का अधिकारी बनकर फोन करे और आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी दे तो घबराएं नहीं और किसी भी तरह का भुगतान न करें।

निम्न सावधानियां बरतें 

अनजान लिंक पर क्लिक न करें।

ओ.टी.पी., पिन, पासवर्ड या बैंक खाते से संबंधित जानकारी किसी के साथ सांझा न करें।

किसी के दबाव या धमकी में आकर पैसे ट्रांसफर न करें।

अज्ञात व्यक्ति के कहने पर कोई ऐप इंस्टॉल न करें और स्क्रीन शेयर न करें।

संदिग्ध वीडियो कॉल या फोन आने पर तुरंत कॉल डिस्कनेक्ट कर दें।

संबंधित पुलिस विभाग से स्वयं आधिकारिक माध्यम से संपर्क कर मामले की पुष्टि करें।

ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें शिकायत 

पुलिस ने नागरिकों से कहा कि यदि वे साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं या उनके बैंक खाते से पैसे निकल जाते हैं तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हैल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें। समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को रोकने तथा आगे की कार्रवाई में मदद मिल सकती है। पुलिस कमिश्नरेट जालंधर ने लोगों से अपील की है कि वे डर के बजाय सतर्कता को हथियार बनाएं और परिवार के बुजुर्गों सहित अन्य लोगों को भी ‘डिजिटल अरैस्ट’ जैसे साइबर फ्रॉड के प्रति जागरूक करें।

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