भाजपा में जा सकते हैं नवजोत सिंह सिद्धू!

Edited By Vaneet,Updated: 08 Aug, 2020 10:27 AM

navjot singh sidhu can go to bjp

कैप्टन सरकार से नाराज चल रहे पूर्व क्रिकेटर और पंजाब के पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू 2022 के विधानसभा चुनाव दौरान..

पटियाला(राजेश): कैप्टन सरकार से नाराज चल रहे पूर्व क्रिकेटर और पंजाब के पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू 2022 के विधानसभा चुनाव दौरान किस पार्टी में जाएंगे, इस बारे लगभग डेढ़ साल से अनुमान ही लगाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह की तरफ से स्थानीय निकाय विभाग वापस लेने के बाद सिद्धू ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद चर्चाएं शुरू हो गई थीं कि वह कांग्रेस को छोड़ेंगे परन्तु राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सिद्धू को मना लिया था, जिस कारण वह फिलहाल कांग्रेस में ही बने हुए हैं पर उनकी तरफ से साधी गई चुप्पी कई राजनीतिक संदेश दे रही है। 

सिद्धू की तरफ से खोले गए टी.वी. चैनल पर भी समय-समय पर वह कैप्टन सरकार के खिलाफ भड़ास निकालते रहते हैं। करतारपुर कॉरिडोर मामले में पंजाब का सिख मानसिक तौर पर सिद्धू के साथ जुड़ गया है, जिसकी मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह, शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल और आम आदमी पार्टी को अच्छी तरह जानकारी है। मौजूदा दौर में सिद्धू पंजाब की राजनीति का वह ब्रांड या धुरा बन चुके हैं कि 2022 में वह जिस तरफ जाएंगे पंजाब की राजनीति का रुख उधर  ही हो जाएगा। 

पंजाब के राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि सिद्धू को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मानसा में प्रैस कांफ्रैंस दौरान बीबी नवजोत कौर सिद्धू ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि भाजपा अकाली दल के साथ नाता तोड़ती है तो नवजोत सिंह सिद्धू भाजपा में जा सकते हैं। मौजूदा अकाली-भाजपा गठबंधन के रिश्तों में आई खटास और अकाली दल की तरफ से श्री राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम से बनाई गई दूरी और फिर से शुद्ध पंथक एजैंडा अपनाए जाने के बाद सिद्धू किसी भी समय भाजपा में जा सकते हैं। भाजपा सिद्धू की पुरानी पार्टी है और वह 3 बार इसी पार्टी की टिकट से सांसद बन चुके हैं। आज भी भाजपा लीडरशिप का एक बड़ा वर्ग सिद्धू को चाहता है। सबको पता है कि सिद्धू की ईमानदाराना छवि और भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम के कारण पंजाब के लोग उन्हें पसंद करते हैं। जो भी पार्टी 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में नवजोत सिंह सिद्धू को अपना चेहरा बनाएगी, उसे बड़ा राजनैतिक लाभ मिलने से इंकार नहीं किया जा सकता। सिद्धू फिलहाल कांग्रेस पार्टी में हैं परंतु कांग्रेस में लगातार उन्हें अनदेखा और जलील किया जा रहा है। सिद्धू के विधानसभा हलके में विकास कार्य नहीं करवाए जा रहे, जिस बारे वह कई बार मीडिया में कह चुके हैं। 

मौजूदा कांग्रेस सरकार सिद्धू के खिलाफ इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट अमृतसर के चेयरमैन से बयान दिलवा कर उन्हें राजनीतिक तौर पर डाऊन करने की कोशिश कर रही है और यह संदेश देना चाहती है कि सिद्धू का कद इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट के चेयरमैन के बराबर है। सिद्धू धड़ा सब कुछ खामोशी से सहन कर रहा है। आम तौर पर बड़बोले माने जाने वाले सिद्धू ने पिछले डेढ़ साल से जिस तरह अपनी जुबान पर ताला लगाया हुआ है, उससे स्पष्ट होता है कि सिद्धू समय आने पर कोई बड़ा राजनीतिक धमाका करेंगे। उनकी खामोशी ही उनकी ताकत बनती जा रही है। पंजाब का एक बड़ा वर्ग खासकर नौजवान सिद्धू की कार्यशैली से बेहद प्रभावित हैं। 

सिद्धू का एकमात्र एजैंडा श्री गुरु गं्रथ साहिब जी की बेअदबी के दोषियों को जेल भेजना और जिन लोगों ने पंजाब को लूटा है, उनकी लूट का हिसाब पंजाब के लोगों को देना है। मौजूदा दौर में यह बात उभर कर सामने आ रही है कि अकाली लीडरशिप और सत्ता पर काबिज कांग्रेस की टॉप लीडरशिप घी-खिचड़ी है। यही कारण है कि साढ़े 3 साल बीतने पर भी बादल परिवार और 10 साल तक रही बादल सरकार के किसी भी काम की जांच नहीं करवाई गई बल्कि कांग्रेस सरकार में बादल परिवार के कारोबार बढ़े ही हैंं। इन हालातों में सिद्धू को एक प्लेटफार्म की जरूरत है जो या तो भारतीय जनता पार्टी दे सकती है या फिर आम आदमी पार्टी। 

यदि भाजपा अकाली दल के साथ रिश्ता तोड़ती है तो भाजपा के पास सिद्धू के रूप में एक जबरदस्त विकल्प है। भाजपा नवजोत सिंह सिद्धू को अपना फेस बना कर और ढींडसा ग्रुप के साथ तालमेल करके पड़ोसी राज्य हरियाणा की तरह पंजाब की सत्ता पर काबिज हो सकती है। इस बारे भाजपा में भी मंथन चल रहा है। भाजपा की लैबोरेटरी इस दिशा में काम कर रही है कि आखिर 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का क्या फार्मूला हो-अकाली दल को छोड़ा जाए या सीटें बढ़ा कर अकाली दल के साथ ही गठजोड़ रखा जाए। 

भाजपा अर्बन और सैमी अर्बन की 45-50 सीटों पर अपना हक जता सकती है। ऐसे में अकाली दल भाजपा को किसी भी हालत में 50 सीटें नहीं देगा, जिस कारण भाजपा की अकाली दल से जुदाई हो सकती है। फिलहाल भाजपा, नवजोत सिंह सिद्धू और अकाली दल समय का इंतजार कर रहे हैं। सारी स्थिति और 2022 का रोड मैप अप्रैल-2021 तक स्पष्ट हो जाएगा।

Related Story

    Trending Topics

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!