वीरवार से सड़कों पर उतरेगी नगर निगम की अपनी स्वीपिंग मशीन

Edited By Sunita sarangal,Updated: 22 Oct, 2019 10:16 AM

municipal corporation own sweeping machine

अकाली-भाजपा कार्यकाल दौरान तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की सिफारिश पर जालंधर नगर निगम ने मैकेनिकल रोड स्वीपिंग प्रोजैक्ट शुरू किया था

जालंधर(खुराना): अकाली-भाजपा कार्यकाल दौरान तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की सिफारिश पर जालंधर नगर निगम ने मैकेनिकल रोड स्वीपिंग प्रोजैक्ट शुरू किया था जिसके तहत करीब 30 करोड़ रुपए की लागत से 5 सालों तक प्राइवेट कम्पनी ने 2 स्वीपिंग मशीनों से शहर की चंद सड़कों को साफ करना था। इस 30 करोड़ के प्रोजैक्ट में 25 करोड़ का घपला बताकर उस समय विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने खूब हो-हल्ला मचाया था और यह मामला अदालत तक भी पहुंचा था परंतु उसके बावजूद न केवल अकाली-भाजपा कार्यकाल दौरान उक्त रोड स्वीपिंग प्रोजैक्ट चालू हो गया बल्कि कांग्रेस सरकार आने के साल बाद भी स्वीपिंग मशीनें शहर की सड़कों पर दौड़ती रहीं।

उसके बाद निगम ने प्रोजैक्ट रद्द कर दिया जिसके बाद कम्पनी ने अदालत की शरण ली और अब मामला आर्बिट्रेशन के स्तर पर है। इसी बीच नगर निगम ने स्मार्ट सिटी मिशन के फंड के तहत अपनी स्वीपिंग मशीन की खरीद कर ली है। पहली स्वीपिंग मशीन आज जालंधर पहुंच गई और वीरवार को इसका विधिवत उद्घाटन सांसद, सभी विधायकों व पार्षदों की उपस्थिति में किया जाएगा। यह ट्रक माऊंटिड स्वीपिंग मशीन रात के समय शहर की मेन सड़कों की सफाई किया करेगी। 

25 करोड़ रुपयों की बचत करके दिखाई: मेयर 
पहली स्वीपिंग मशीन शहर आने के उपलक्ष्य में मेयर जगदीश राजा ने माडल टाऊन स्थित मेयर हाऊस में एक प्रैस कांफ्रैंस आयोजित की, जिस दौरान डिप्टी मेयर हरसिमरनजीत सिंह बंटी, पार्षद जगदीश दकोहा, मनमोहन सिंह राजू, तरसेम लखौत्रा, पवन कुमार, राजीव ओंकार टिक्का तथा जगजीत सिंह जीता भी उपस्थित थे। 

मेयर ने बताया कि अकाली-भाजपा कार्यकाल दौरान प्राइवेट कम्पनी की मशीनों का प्रति माह किराया ही 48.50 लाख रुपए था। एक साल में सफाई पर 6 करोड़ तथा 5 सालों में 30 करोड़ का खर्च आना था और मशीनें भी कम्पनी पास रह जानी थीं। दूसरी ओर निगम ने जो मशीन खरीदी है उसकी कीमत 43 लाख और पुर्जों पर 7 लाख रुपए मिलाकर कुल 50 लाख रुपए होगी। 5 सालों की ए.एम.सी. भी मिलाकर कुल खर्च 83.83 लाख रुपए आएगा। 5 सालों तक प्रतिदिन का डीजल का खर्च भी जोड़ लें तो एक मशीन पर कुल खर्च 1.65 करोड़ रुपए आएगा। 

अब जल्द ही दूसरी स्वीपिंग मशीन भी निगम को प्राप्त हो जाएगी जो करीब 2.20 करोड़ मूल्य की है तथा उस पर भी 5 सालों में 83 लाख रुपए का डीजल खर्च होगा। कुल मिलाकर दोनों मशीनों को 5 साल चलाने में तेल सहित 5 करोड़ रुपए खर्च भी नहीं आएगा। इस प्रकार पिछले प्रोजैक्ट के मुकाबले निगम को 25 करोड़ रुपए की बचत होगी। साथ ही फायदा यह होगा कि मशीन भी निगम पास रहेगी और निगम इनसे जितना मर्जी और जहां मर्जी काम ले सकेगा। 

पहली वाली मशीन की कैपेसिटी 4 क्यूबिक मीटर थी जबकि इस मशीन की 6 क्यूबिक मीटर है। नई मशीन 7 घंटे हर रोज चलकर 35 किलोमीटर सड़कें साफ करेगी। मेयर ने बताया कि जी.पी.आर.एस. सिस्टम के माध्यम से इस मशीन के काम पर पूरी नजर रखी जाएगी परंतु फिर भी वह शुरूआती चरण में इस प्रोजैक्ट को सही तरीके से लागू करने हेतु खुद इसकी मॉनिटरिंग करेंगे। 

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