धान की फसल पर वायरस का Attack! चिंता में डूबे किसान

Edited By Kamini,Updated: 22 Sep, 2025 10:26 AM

virus attack on rice crop

राज्य में आई बाढ़ के कारण आम लोगों और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

भवानीगढ़ (विकास मित्तल): राज्य में आई बाढ़ के कारण आम लोगों और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, स्थानीय क्षेत्र में धान की फसल पर वायरस के हमले के कारण किसानों द्वारा अपने बेटों की तरह उगाई जाने वाली धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद होने के कगार पर है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं।

इस संबंध में, निकटवर्ती गांव काकड़ा के किसान हरविंदर काकड़ा, राजवंत सिंह और रछपाल सिंह आदि ने बताया कि चाइना नामक वायरस ने उनकी धान की फसल पर हमला कर उसे नष्ट कर दिया है। किसानों ने बताया कि अब जहां धान की फसल लगभग पककर पूरी तरह तैयार हो चुकी है और फसल की ऊंचाई 3 से साढ़े 3 फीट है, वहीं उक्त वायरस के हमले के कारण धान की फसल की ऊंचाई केवल आधा फीट ही रह गई है। किसानों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अगर ऐसा ही रहा तो इस बार उन्हें जमीन के ठेके भी नहीं मिलेंगे क्योंकि उन्हें वायरस से बचाव के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।

किसानों ने बताया कि जब उन्होंने कृषि विशेषज्ञों से बात की तो उन्होंने सुझाव दिया कि वायरस के कारण सूख रहे धान के पौधों को जड़ समेत उखाड़कर ज़मीन में गाड़ दिया जाए। लेकिन किसानों का कहना है कि 80 प्रतिशत बर्बाद हो चुकी फसल को ज़मीन में कैसे दबाया जा सकता है। उन्होंने सरकार के प्रति रोष व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मान की कथनी और करनी में अंतर है क्योंकि जब आप सरकार बनी थी तो उन्होंने कहा था कि अधिकारी लोगों की समस्याएं सुनने के लिए उनके पास पहुंचेंगे, लेकिन अभी तक कोई भी सरकारी अधिकारी गाँवों में नहीं पहुंचा है और न ही किसानों की कोई सुध ली जा रही है। इस अवसर पर किसानों ने कहा कि उन्हें चिंता है कि ज़मीन के ठेके देने के लिए उन्हें अपनी जमीन बेचनी पड़ सकती है। उन्होंने मांग की कि संबंधित विभाग जल्द से जल्द किसानों की बर्बाद हो रही फसल को बचाने के लिए आगे आए ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।

धान पर 'ब्लैक स्टिक' नामक वायरस का असर: जिला कृषि अधिकारी

उधर, जिला कृषि अधिकारी धरमिंदर सिंह सिद्धू ने बताया कि धान की फसल ब्लैक स्टिक नामक वायरस से प्रभावित हो रही है, जो एक पुराना वायरस है। विभाग लगातार फसलों का निरीक्षण कर रहा है। इस वायरस रोग ने पूसा-44 को ज़्यादा प्रभावित किया है और 20 जून से पहले धान की लगभग 131 किस्में प्रभावित हुई थीं। हालांकि, हॉपर पर नियंत्रण करके इस वायरस रोग को और फैलने से रोका जा सकता है।

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