Edited By Subhash Kapoor,Updated: 12 Nov, 2025 08:19 PM

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्टूडेंट्स को सुझाव दिया है कि कोई भी भाषा सामने वाले को इंप्रेस करने के लिए नहीं बोलें, बल्कि इस तरह से बोलें कि आपको बोलने में कोई परेशानी न हो और सामने वाले को आपकी बात के साथ भावनाएं भी समझ आ जाएं।
लुधियाना (विक्की) : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्टूडेंट्स को सुझाव दिया है कि कोई भी भाषा सामने वाले को इंप्रेस करने के लिए नहीं बोलें, बल्कि इस तरह से बोलें कि आपको बोलने में कोई परेशानी न हो और सामने वाले को आपकी बात के साथ भावनाएं भी समझ आ जाएं। बेशक आप मातृ भाषा ही बोलकर अपनी बात दूसरों को समझाने का प्रयास करें।
सतपाल मित्तल स्कूल में आयोजित एक समारोह के दौरान स्टूडेंट्स के साथ इंटरेक्शन करते समय प्रधान ने जब स्टूडेंट्स से सवाल करने शुरू किए तो सबसे पहले उन्होंने भाषा से ही अपनी बात शुरू की। धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी बात शुरू करते हुए विद्यार्थियों से पूछा कि वे कक्षा में किस भाषा का प्रयोग करना पसंद करते हैं। इस दौरान कुछ विद्यार्थियों ने अंग्रेजी, कुछ ने हिंदी और कुछ ने पंजाबी को अपनी पसंद बताया। इस पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि भाषा वही अपनानी चाहिए जिसमें व्यक्ति अपनी बात सहजता से व्यक्त कर सके।
उन्होंने बताया कि किसी विषय को समझने के लिए सरल भाषा का उपयोग सबसे प्रभावशाली होता है क्योंकि इससे ज्ञान ग्रहण करने की प्रक्रिया आसान बनती है। मातृभाषा के प्रयोग से आत्मविश्वास बढ़ता है और सीखने में आनंद आता है। जाने-माने उद्योगपति राकेश भारती मित्तल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसी शहर के एक उद्यमी ने मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में देश की बड़ी कंपनी स्थापित कर दिखाई। इस दौरान विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव सांझा किए।