जिला प्रशासन सख्त: नशा तस्करी और गौ-वंश की सुरक्षा के लिए नई पाबंदियां लागू

Edited By Kalash,Updated: 05 Feb, 2026 05:00 PM

restrictions in punjab

जिले में नशा तस्करी को रोकने और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जिला मैजिस्ट्रेट बरनाला ने सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कई महत्वपूर्ण पाबंदियां लागू की हैं।

बरनाला (विवेक सिंधवानी, रवि): जिले में नशा तस्करी को रोकने और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जिला मैजिस्ट्रेट बरनाला ने सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कई महत्वपूर्ण पाबंदियां लागू की हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। प्रशासन द्वारा जारी ये सभी निषेधाज्ञा आदेश 14 मार्च 2026 तक जिले में प्रभावी रहेंगे। जिला मैजिस्ट्रेट ने आम जनता और व्यापारियों से अपील की है कि वे समाज की सुरक्षा और बेहतर भविष्य के लिए इन नियमों का पालन करें और प्रशासन का सहयोग करें।

प्रैगाबालिन की बिक्री के लिए कड़े नियम 

जिला मैजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, जिले में प्रैगाबालिन (75 एम.जी. से अधिक) क्षमता वाले कैप्सूल, गोलियां, पाऊडर या तरल रूप में इसके भंडारण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। आदेश के तहत होलसेलर, रिटेलर, कैमिस्ट और अस्पताल की फार्मैसी अब 75 एम.जी. तक की प्रैगाबालिन दवा भी बिना 'ओरिजिनल प्रिस्क्रिप्शन' (डॉक्टर की असली पर्ची) के नहीं बेच सकेंगे।

कैमिस्टों को इस दवा की खरीद और बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। पर्ची पर दवा देने की तारीख, दवा की मात्रा और कैमिस्ट की मुहर लगी होनी चाहिए ताकि एक ही पर्ची पर बार-बार दवा न ली जा सके। ड्रग इंस्पैक्टर और पुलिस की टीमें समय-समय पर मैडीकल स्टोर्स की औचक चैकिंग करेंगी।

गौ-वंश की ढुलाई पर पूर्ण प्रतिबंध और शर्तें

नशीली दवाओं के साथ-साथ जिला प्रशासन ने गौ-वंश की सुरक्षा को लेकर भी सख्त आदेश जारी किए हैं। जिले के भीतर गौ-वंश की ढुलाई के लिए अब वैध दस्तावेजी प्रमाण का होना अनिवार्य होगा। विशेष रूप से सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले (रात के समय) गौ-वंश की किसी भी प्रकार की ढुलाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिला मैजिस्ट्रेट ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जिन लोगों ने पशु रखे हुए हैं, वे 'डिप्टी डायरैक्टर पशुपालन' के पास अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से करवाएं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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