पंजाब भर के स्कूल वैन चालकों की बठिंडा में महापंचायत, दी सख्त चेतावनी

Edited By Kamini,Updated: 03 Sep, 2026 02:15 PM

mahapanchayat of school van drivers in bathinda

पंजाब भर के निजी स्कूलों से जुड़ी स्कूल वैनों के चालकों ने अपनी मांगों को लेकर बठिंडा में महापंचायत की।

बठिंडा (विजय वर्मा): पंजाब भर के निजी स्कूलों से जुड़ी स्कूल वैनों के चालकों ने अपनी मांगों को लेकर बठिंडा में महापंचायत की। इसमें पंजाब के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में स्कूल वैन चालक और इस कारोबार से जुड़े लोग शामिल हुए। महापंचायत के दौरान सरकार की नीतियों के खिलाफ रोष जताते हुए स्कूल वैनों के लिए अलग पॉलिसी बनाने की मांग की गई।

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पंजाब स्कूल वैन एसोसिएशन के प्रधान गुरप्रीत हैप्पी ने कहा कि सरकार स्कूल वैनों के मामले में दोहरे मापदंड अपना रही है। स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने वाली वैनों को सामान्य कमर्शियल वाहनों की श्रेणी में रखकर ऐसे नियम और टैक्स लागू किए जा रहे हैं, जिन्हें छोटे वैन चालकों के लिए पूरा करना बेहद मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूल वैनों पर सालाना करीब 30 हजार रुपये तक का टैक्स लिया जा रहा है।

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इसके अलावा सरकार द्वारा पुराने जीपीएस सिस्टम को बदलकर नया सिस्टम लगाने की शर्त के कारण वैन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनके अनुसार नया जीपीएस सिस्टम लगाने पर 35 हजार रुपये से लेकर ढाई लाख रुपये तक खर्च आने की बात सामने आ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि छोटे स्तर पर स्कूल वैन चलाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले लोग इतना बड़ा खर्च कैसे उठा सकते हैं।

365 दिनों में सिर्फ 220 दिन चलती हैं स्कूल वैन

गुरप्रीत हैप्पी ने कहा कि स्कूल वैनों का इस्तेमाल सामान्य कमर्शियल वाहनों से बिल्कुल अलग है। स्कूल वैन साल के 365 दिनों में से करीब 220 दिन ही चलती हैं और आमतौर पर इनका रोजाना सफर भी 50 किलोमीटर से अधिक नहीं होता। इसके बावजूद उनसे कमर्शियल वाहनों के बराबर टैक्स और अन्य फीस वसूली जा रही हैं। उन्होंने मांग की कि स्कूल वैनों की पासिंग कम से कम पांच साल के लिए की जाए, ताकि हर साल पासिंग और इससे जुड़े खर्चों के कारण वैन चालकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

नए-नए नियमों के नाम पर जुर्माना वसूलने का आरोप

वैन चालकों ने आरोप लगाया कि सरकारी विभागों की ओर से स्कूल वैनों के लिए लगातार नए नियम लागू किए जा रहे हैं और नियमों के उल्लंघन के नाम पर भारी जुर्माने वसूले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले ही महंगाई, डीजल, बीमा, मरम्मत और अन्य खर्चों से जूझ रहे वैन चालकों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन गया है। उन्होंने सरकार पर वैन चालकों के साथ भेदभाव करने और नए-नए नियमों के जरिए उनका काम मुश्किल बनाने का भी आरोप लगाया।

मांगें नहीं मानी तो बड़े संघर्ष की चेतावनी

एसोसिएशन नेताओं ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर सरकार से कई बार अपील कर चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसके चलते वैन चालकों को मजबूर होकर पंजाब भर में स्कूल वैनों का चक्का जाम करने जैसा सख्त कदम उठाना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि इस हड़ताल के कारण 80 प्रतिशत से अधिक स्कूल वैन बंद रहीं, जिससे हजारों बच्चों और उनके अभिभावकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। एसोसिएशन ने इस असुविधा के लिए बच्चों और अभिभावकों से माफी भी मांगी, लेकिन साथ ही कहा कि अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने के लिए संघर्ष के अलावा उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। वैन चालकों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो संघर्ष को और बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए पीछे नहीं हटेंगे और जरूरत पड़ी तो पंजाब स्तर पर इससे भी बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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