चुनाव आयोग के संयुक्त बयान ने कांग्रेस और ‘AAP’ के झूठ का पर्दाफाश किया: केवल ढिल्लों

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 27 Sep, 2026 07:59 PM

kewal singh dhillon statement

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा है कि जब-जब कांग्रेस और विपक्षी दल जनता की अदालत में हारते हैं, तो अपनी खीझ निकालने के लिए कभी वोटिंग मशीनों पर और कभी देश की संवैधानिक संस्थाओं पर अपना गुस्सा निकालते हैं।...

चंडीगढ़ : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा है कि जब-जब कांग्रेस और विपक्षी दल जनता की अदालत में हारते हैं, तो अपनी खीझ निकालने के लिए कभी वोटिंग मशीनों पर और कभी देश की संवैधानिक संस्थाओं पर अपना गुस्सा निकालते हैं। केंद्रीय चुनाव आयोग को लेकर चल रहे कथित ताजा विवाद को भी उन्होंने विपक्ष की इसी लाचारी का हिस्सा बताते हुए कहा कि अब इनका भांडा फूट गया है और इन्हें मुंह छिपाने की जगह नहीं मिल रही। 

ढिल्लों ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों डॉ. एस.एस. संधू तथा डॉ. विवेक जोशी की 26 सितंबर को हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया है कि देशभर में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) समेत सभी प्रमुख फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। चाहे वह 24 जून 2025 का मूल आदेश हो या विभिन्न चरणों की समय-सारणी, सभी फैसले पूरे आयोग की पूर्ण सहमति से लिए गए हैं।

क्या अब कांग्रेस और ‘आप’ अपना स्टैंड स्पष्ट करेंगे?
उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) से सवाल किया कि चुनाव आयोग की शनिवार को हुई बैठक और उसके बाद जारी संयुक्त प्रेस बयान के बाद क्या वे अब अपना रुख स्पष्ट करेंगे?

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की बैठक और सभी फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने संबंधी प्रेस बयान ने विपक्षी इंडिया गठबंधन द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम, झूठ और मनगढ़ंत कहानियों की पूरी तरह पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना उसकी हताशा का प्रतीक है।

 मामला एक अधिकारी की कार्यशैली से जुड़ा था
उन्होंने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर भी विपक्ष द्वारा भ्रम पैदा किया गया, जबकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि यह पत्र किसी नीतिगत मामले या SIR से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यशैली से जुड़ा आंतरिक मामला था। इसलिए इसे SIR या आयोग की नीति से जोड़ना तथ्यों से परे है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि एक दैनिक अंग्रेजी समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट को आधार बनाकर विपक्ष ने चुनाव आयोग और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने का प्रयास किया।

केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि फॉर्म-6 को लेकर भी लोगों में भ्रम पैदा करने का प्रयास किया गया। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR से जुड़े फॉर्म-6 के घोषणा-पत्र को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने वैध ठहराया है, जबकि गैर-SIR अवधि के दौरान Registration of Electors Rules, 1960 के तहत पहले वाला फॉर्म ही लागू है। प्रक्रिया में कोई बदलाव या हेरफेर नहीं किया गया है।

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