ऑस्ट्रेलिया भेजने के नाम पर ठगी! 34 पंजाबी युवा तिमोर-लेस्ते में फंसे, परिवारों ने लगाई मदद की गुहार

Edited By Urmila,Updated: 05 Sep, 2026 02:14 PM

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ऑस्ट्रेलिया में रोजगार और बेहतर भविष्य के सपने लेकर विदेश गए पंजाब के 33 और राजस्थान के एक युवा के पिछले करीब 5 से 6 महीनों से इंडोनेशिया के द्वीप दिली तिमोर-लेस्ते में फंसे होने का गंभीर मामला सामने आया है।

सुल्तानपुर लोधी (धीर): ऑस्ट्रेलिया में रोजगार और बेहतर भविष्य के सपने लेकर विदेश गए पंजाब के 33 और राजस्थान के एक युवा के पिछले करीब 5 से 6 महीनों से इंडोनेशिया के द्वीप दिली तिमोर-लेस्ते में फंसे होने का गंभीर मामला सामने आया है। इन युवाओं के 8 पीड़ित परिवारों ने राज्यसभा सदस्य पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल से वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क कर अपने बच्चों की सुरक्षित वतन वापसी के लिए मदद की गुहार लगाई।

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निर्मल कुटिया सुल्तानपुर लोधी पहुंचे पीड़ित परिवारों ने बताया कि एजैंटों ने ऑस्ट्रेलिया में रोजगार दिलाने का भरोसा देकर प्रत्येक परिवार से करीब 5 से 11 लाख रुपये तक की राशि ली। परिवारों के अनुसार कुल करीब 3 करोड़ रुपये एजैंटों को दिए। परिवारों के अनुसार इसके बाद युवाओं को भारत के अलग-अलग हवाई अड्डों से 2 से 6 दिनों के लंबे सफर के बाद बाली और मलेशिया के रास्ते दिली तिमोर-लेस्ते भेजा गया।

युवाओं द्वारा एकजुट होकर विरोध करने के बाद उन्हें पासपोर्ट वापस मिलने की बात भी सामने आई है। स्थानीय पुलिस द्वारा विजय नामक व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने की जानकारी भी मिली है। अब तक करीब 10 युवा अपने प्रयासों और खर्चे पर भारत वापस लौट चुके हैं, जबकि 34 युवा अभी भी तिमोर-लेस्ते में फंसे बताए जा रहे हैं।

फंसे युवाओं में मोगा के 8, जालंधर के 7, फिरोजपुर के 6, लुधियाना के 5, फाजिल्का के 2 तथा तरनतारन, कपूरथला, पटियाला और जलालाबाद से संबंधित एक-एक युवा शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं एक युवा राजस्थान का रहने वाला है।  यासों से उनके बच्चों की जल्द और सुरक्षित भारत वापसी हो सकेगी।

वापस लौटे युवाओं ने सुनाई अपनी आपबीती

जालंधर के संदीप सिंह और राजप्रीत सिंह ने बताया कि उनके साथ 10 युवा लंबे संघर्ष के बाद भारत लौटे हैं। उन्होंने बताया कि पासपोर्ट अपने कब्जे में लेने के बाद उन्हें डराया-धमकाया जाता था और उनकी इच्छा के विरुद्ध काम करवाया जाता था। उनके अनुसार मेहनत की पूरी कमाई भी नहीं दी जाती थी और कई बार बहुत कम भोजन में गुजारा करना पड़ता था। युवाओं ने दावा किया कि उन्हें वहां एक तरह से बंधक बनाकर रखा गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि विजय द्वारा पहले भी कई युवाओं को वहां बंधक बनाकर रखा गया था।

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