नेशनल हाईवे की मरम्मत के दौरान लापरवाही, लोगों की जान से सरेआम खिलवाड़

Edited By Kalash,Updated: 07 Feb, 2026 01:44 PM

national highway repair negligence

पंजाब से गुजरने वाले नेशनल हाईवे सहित अन्य मुख्य सड़कों की मरम्मत के दौरान संबंधित कंपनियों और ठेकेदारों द्वारा की जा रही घोर लापरवाही के कारण आम लोगों की जान-माल के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।

गुरदासपुर (हरमन): पंजाब से गुजरने वाले नेशनल हाईवे सहित अन्य मुख्य सड़कों की मरम्मत के दौरान संबंधित कंपनियों और ठेकेदारों द्वारा की जा रही घोर लापरवाही के कारण आम लोगों की जान-माल के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। सड़क मरम्मत के नाम पर अक्सर सड़क का एक हिस्सा पूरी तरह बंद करके सारी ट्रैफिक को गलत दिशा (रॉन्ग साइड) की ओर डायवर्ट कर दिया जाता है, जो कि घातक हादसों का मुख्य कारण बन रहा है।

पिछले समय के दौरान एक तरफ का रास्ता बंद होने के कारण गलत दिशा में चल रही ट्रैफिक की सामने से आ रहे वाहनों के साथ भयानक टक्करें हो चुकी हैं, जिनमें कई लोगों की कीमती जानें जा चुकी हैं और भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। इस सब के बावजूद न तो नेशनल हाईवे अथॉरिटी और न ही संबंधित कंपनियां इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान दे रही हैं।

वर्णनीय है कि पंजाब के विभिन्न इलाकों से गुजरने वाले नेशनल हाईवे की मरम्मत और देख-रेख का काम अलग-अलग बड़ी कंपनियों के पास है। ये कंपनियां टूटी सड़क की मरम्मत के समय बिना उचित सुरक्षा प्रबंध किए सड़क का एक हिस्सा बंद करके ट्रैफिक को गलत दिशा में डायवर्ट कर देती हैं।

ऐसी स्थिति में सामने से आ रही ट्रैफिक अक्सर तेज रफ्तार में होती है, जिससे टक्कर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सितम की बात यह है कि जब ट्रैफिक को गलत दिशा में डायवर्ट किया जाता है, तो डायवर्जन की शुरुआत वाले स्थान पर कुछ चेतावनी बोर्ड लगा दिए जाते हैं, लेकिन आगे एक से पांच किलोमीटर तक सड़क का हिस्सा किसी भी प्रकार के सूचना बोर्ड, रिफ्लेक्टर, कोन या अस्थायी पार्टिशन के बिना ही छोड़ दिया जाता है। इस कारण कई बार सही दिशा में आ रहे वाहनों के चालकों को गलत दिशा से आ रहे वाहन समय पर नजर नहीं आते या भ्रम के कारण अचानक बड़े हादसे घटित हो जाते हैं।

लोगों का कहना है कि जब भी सड़क की मरम्मत के दौरान ट्रैफिक को गलत दिशा में डायवर्ट किया जाए, तो उस पूरे सड़क हिस्से में शुरू से अंत तक स्पष्ट और रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड, अस्थायी पार्टिशन या कोन लगाए जाएं और रात के समय हादसों से बचाव के लिए फ्लैश लाइटों का प्रयोग किया जाए, ताकि ट्रैफिक सुचारू रूप से गुजर सके और लोगों को जान के नुकसान का डर न रहे।

बड़ी चिंता की बात यह है कि ऐसी घटनाएं बार-बार होने के बावजूद न तो कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके की जांच करता है और न ही लापरवाह कंपनियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई की जा रही है। लोगों ने मांग की है कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा मौके पर निगरानी टीमें तैनात कर ठेकेदारों से सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाए, अन्यथा यह लापरवाही और भी कई कीमती जानें ले सकती है।

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