हड़ताल खत्म, लेकिन ऑटोमेटेड ड्राइविंग टैस्ट सैंटर में मुसीबतें नहीं हुई खत्म, हजारों आवेदकों का काम अटका

Edited By Kalash,Updated: 02 Sep, 2026 10:46 AM

automated driving test center people trouble

पंजाब स्टेट मिनिस्ट्रियल स्टाफ यूनियन (पी.एस.एम.एस.यू.) की करीब 10 दिनों तक चली कलम बंद-कम्प्यूटर बंद हड़ताल का असर अब भी सरकारी कामकाज पर साफ दिखाई दे रहा है।

जालंधर (चोपड़ा): पंजाब स्टेट मिनिस्ट्रियल स्टाफ यूनियन (पी.एस.एम.एस.यू.) की करीब 10 दिनों तक चली कलम बंद-कम्प्यूटर बंद हड़ताल का असर अब भी सरकारी कामकाज पर साफ दिखाई दे रहा है। हड़ताल के दौरान रीजनल ट्रांसपोर्ट कार्यालय के अधीन नजदीक बस स्टैंड स्थित ऑटोमेटेड ड्राइविंग टैस्ट सैंटर का कामकाज भी बुरी तरह प्रभावित रहा। ऑनलाइन अपॉइंटमैंट लेने के बावजूद हजारों आवेदक ड्राइविंग लाइसैंस, लर्निंग लाइसैंस, लाइसेंस रिन्यूवल तथा अन्य जरूरी दस्तावेजों से संबंधित प्रक्रियाएं पूरी नहीं करवा सके। अब हड़ताल समाप्त होने के बाद सैंटर दोबारा खुला है, लेकिन लंबित आवेदनों का दबाव इतना बढ़ गया है कि व्यवस्था पटरी पर लौटने की बजाय लोगों के लिए नई परेशानी खड़ी करती दिखाई दे रही है।

मंगलवार को सैंटर के बाहर और अंदर आवेदकों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। इनमें युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और नौकरीपेशा लोग भी शामिल थे। लोग निर्धारित समय पर ऑनलाइन अप्वाइंटमैंट लेकर पहुंचे, लेकिन भारी भीड़ के कारण उन्हें अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। सबसे गंभीर स्थिति यह रही कि सितंबर की शुरुआत में भी चिलचिलाती गर्मी के बीच आवेदकों को खुले में खड़े रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सेंटर के बाहर लंबी कतारों में खड़े लोगों के लिए पर्याप्त छायादार स्थान पर बैठने की व्यवस्था दिखाई नहीं दी। तेज धूप में अपनी बारी का इंतजार करते आवेदक बार-बार गर्मी से बचने के लिए इधर-उधर जगह तलाशते नजर आए। कई लोगों का कहना था कि जब अपॉइंटमेंट ऑनलाइन तय किया गया है तो निर्धारित समय के अनुसार काम करवाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
एक आवेदक के साथ आए कांग्रेस नेता दीपक मोदी ने कहा कि ऑनलाइन स्लॉट मिलने के बाद यह उम्मीद होती है कि निर्धारित समय पर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, लेकिन सैंटर पहुंचने पर लंबी कतार देखकर पूरा दिन खराब होने का डर सताने लगता है। दूसरे आवेदकों ने कहा कि लोगों को काम से छुट्टी लेकर यहां आना पड़ता है और घंटों इंतजार के कारण आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

करीब 10 दिन तक चले कर्मचारी आंदोलन के कारण पहले से तय अप्वाइंटमैंट और विभिन्न लाइसैंस संबंधी सेवाओं का काम प्रभावित हुआ। हड़ताल समाप्त होने के बाद अब पुराने लंबित काम के साथ रोजाना आने वाले नए आवेदनों का दबाव भी सैंटर पर पड़ रहा है। यही कारण है कि काम का बोझ अचानक कई गुना बढ़ गया है। आवेदकों का कहना है कि प्रशासन को पहले से अंदाजा होना चाहिए था कि हड़ताल खत्म होने के बाद सेंटर में सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना अधिक भीड़ उमड़ेगी। इसके बावजूद अतिरिक्त काउंटर, अतिरिक्त स्टाफ, टोकन व्यवस्था, पेयजल और छाया जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए विशेष प्रबंध नजर नहीं आए।

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    अब सैंटर खुला तो स्टाफ की कमी और अव्यवस्था ने बढ़ाई परेशानी 

    सूत्रों के अनुसार सैंटर पर उपलब्ध स्टाफ की संख्या के मुकाबले काम का बोझ काफी अधिक है। एक तरफ रोजाना नए आवेदक पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हड़ताल के दौरान लंबित हुए मामलों को भी निपटाना है। ऐसे में सीमित कर्मचारियों पर बढ़ता दबाव काम की गति को प्रभावित कर रहा है। आवेदकों का सवाल है कि यदि सरकार ऑनलाइन अप्वाइंटमैंट की सुविधा देकर लोगों को निर्धारित समय पर बुलाती है तो उसी अनुपात में सैंटर पर पर्याप्त स्टाफ और काऊंटर क्यों उपलब्ध नहीं करवाए जाते? लोगों का कहना है कि तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था मजबूत किए बिना डिजिटल अप्वाइंटमैंट प्रणाली का उद्देश्य भी अधूरा रह जाता है।

    आर.टी.ओ. कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल 

    सबसे बड़ा सवाल आर.टी.ओ. कार्यालय की तैयारी को लेकर खड़ा हो रहा है। हड़ताल के दौरान काम बंद रहने के कारण जमा हुए बैकलॉग और अब बढ़ती भीड़ को देखते हुए पहले से वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई? क्या विभाग को यह अनुमान नहीं था कि हड़ताल खत्म होते ही हजारों आवेदक सैंटर का रुख करेंगे? फिलहाल स्थिति यह है कि लाइसेंस बनवाने के लिए ऑनलाइन स्लॉट लेने वाला व्यक्ति भी सेंटर पहुंचकर लंबी कतार में खड़ा है। गर्मी में घंटों इंतजार और स्टाफ की कमी ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है।

    लोगों ने जिला प्रशासन और आरटीओ अधिकारियों से मांग की है कि लंबित मामलों के निपटारे के लिए अस्थायी तौर पर अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया जाए, अतिरिक्त काऊंटर शुरू किए जाएं, भीड़ को नियंत्रित करने तथा आवेदकों के लिए पर्याप्त छाया, बैठने और पीने के पानी का प्रबंध किया जाए। लोगों का कहना है कि जब तक बैकलॉग पूरी तरह समाप्त नहीं होता, तब तक विशेष व्यवस्था जारी रखी जानी चाहिए, ताकि लाइसैंस बनवाने के लिए आने वाले लोगों को गर्मी और अव्यवस्था की दोहरी मार न झेलनी पड़े।

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