पंजाब में पहली बार राज्यसभा सीटों के लिए मचेगा घमासान

Edited By Sunita sarangal, Updated: 22 Jan, 2022 05:25 PM

there will be a fight for the rajya sabha seats in punjab

पंजाब में चल रहे विधानसभा चुनाव के शोर के बीच इस साल राज्यसभा का चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है। पंजाब में राज्यसभा के 7 सदस्य.......

जालंधर(नरेश कुमार): पंजाब में चल रहे विधानसभा चुनाव के शोर के बीच इस साल राज्यसभा का चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है। पंजाब में राज्यसभा के 7 सदस्य हैं और मौजूदा समय में राज्यसभा की तीन-तीन सीटों पर कांग्रेस और एक सीट पर भाजपा का कब्जा है लेकिन जिस तरीके से पंजाब में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने के संकेत मिल रहे हैं उसे देख कर लगता है कि विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के तुरंत बाद होने वाले इन चुनावों में भी सियासी दलों में भारी घमासान मचेगा। विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 मार्च को आएंगे। इसके कुछ दिन बाद ही राज्यसभा चुनाव की नोटिफिकेशन जारी हो जाएगी क्योंकि पंजाब में राज्यसभा के 5 सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल तक ही है और उससे पहले चुनाव की प्रक्रिया पूरी करनी जरुरी है। लिहाजा चुनावी नतीजों में किसी को स्पष्ट बहुमत न मिला तो एक तरफ जोड़ तोड़ की सरकार बनाने के लिए घमासान चल रहा होगा तो दूसरी तरफ राज्यसभा के सदस्यों के लिए जोड़ तोड़ की राजनीती चलेगी। पंजाब से आने वाले राज्यसभा के दो अन्य सदस्यों का कार्यकाल भी 4 जुलाई को पूरा होगा और इनके लिए भी घमासान मचना तय है।

10 साल बाद मिलेगा विधायकों को वोट करने का मौका
वैसे तो राज्यसभा के दो तिहाई सदस्यों का चुनाव हर दो साल के बाद होता है लेकिन पंजाब में एक साथ ही सात सदस्यों के लिए चुनाव होता है और राज्यसभा के सदस्य का कार्यकाल 6 साल होने के कारण पंजाब में विधानसभा के सदस्यों को दस साल में एक बार ही राज्यसभा के लिए मतदान का मौका मिलता है। 2017 में हुए चुनाव के दौरान विधानसभा में पहुंचे सदस्यों को राज्यसभा चुनाव में मतदान का मौका नहीं मिला था और अब नई विधानसभा के सभी सदस्यों को राज्यसभा चुनाव में मतदान का मौका मिलेगा।

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पंजाब में पहली बार आ सकती है चुनाव की नौबत 
पंजाब विधानसभा में किसी को स्पष्ट बहुमत न मिलने के संकेतों के चलते राज्यसभा के चुनाव में पहली बार दिलचस्प स्थिति पैदा होने जा रही है। दरअसल इससे पहले पंजाब में अकाली दल, भाजपा या कांग्रेस के पास ही विधानसभा की सीटें होती थी लिहाजा आपसी सहमती से दोनों पक्षों के तीन या चार सदस्य राज्यसभा में चले जाते थे और चुनाव की नौबत नहीं आती थी लेकिन इस बार यदि चुनावी नतीजे में विधानसभा सीटों का विभिन्न पार्टियों में बिखराव नजर आया तो सभी पार्टियां अपने ज्यादा से ज्यादा सदस्य राज्यसभा में भेजने की कोशिश में जुटेंगी जिससे दिलचस्प स्थिति पैदा हो सकती है। 

कैसे चुना जाता है राज्यसभा का सदस्य 
राज्यसभा का सदस्य विधायकों के वोट से तय होता है। इसके लिए एक फार्मूला के तहत विधायक के एक वोट की वेल्यू तय की जाती है। फार्मूले के तहत विधानसभा में कुल सीटों की संख्या को 100 के साथ गुणा किया जाता है और इसके पश्चात इसे उस राज्य की खाली होने वाली राज्यसभा की सीटों में 1 अंक जोड़ कर कुल संख्या से विभाजित किया जाता है। इसके बाद जो जवाब निकलेगा उसे 100 से विभाजित किया जाता है और इसके बाद उतने विधायकों की संख्या निकलती है जिनका समर्थन राज्यसभा के चुनाव के लिए जरूरी है। पंजाब के मामले में 117 सीटों को 100 से गुना करने पर यह संख्या 11700 आएगी और इसके बाद इसे पहले चरण में खाली होने वाली सीटों की संख्या (5+1) से विभाजित किया जाएगा तो यह 1950 आएगा इसे 100 से विभाजित करने पर 19.50 आएगा। लिहाजा एक राज्यसभा सदस्य के लिए 20 विधायकों के वोट की जरूरत होगी और यदि चुनाव 7 सीटों पर एक साथ हुआ तो यह संख्या कम हो कर 15 विधायक रह सकती है। 

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आप के विधायकों को पहली बार मिलेगा मौका 
पिछले चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी के 20 विधायक चुन कर विधानसभा पहुंचे थे लेकिन इन विधायकों को राज्यसभा सदस्य चुनने का मौका नहीं मिला था लेकिन इस चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी की टिकट पर जीत कर आने वाले विधानसभा के सदस्यों को राज्यसभा में चुनाव का अवसर भी मिलेगा और यदि आम आदमी पार्टी विधायकों की संख्या ज्यादा हुई तो पंजाब से भी आम आदमी पार्टी राज्यसभा का सदस्य चुन कर संसद में जा सकता है। इससे पहले दिल्ली के चुनाव में जीतने के बाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा में तीन सदस्य हैं। 

राष्ट्रपति शासन लगने के कारण बिगड़ा पंजाब का गणित 
देश एक अन्य राज्यों में राज्यसभा की सीटों के लिए हर दो साल बाद मतदान होता है लेकिन पंजाब में 1987 से 1992 तक राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के कारण पंजाब में यह गणित गड़बड़ाया हुआ है। विधानसभा के सदस्यों को हर दस साल बाद ही राज्यसभा में मतदान का अवसर मिलता है। 1987 में विधानसभा भंग होने के कारण पंजाब के विधायक राज्यसभा सदस्यों का चुनाव नहीं कर सके थे और बाद में 1992 में सभी राज्यसभा सदस्यों का चयन 1992 में हुआ था। लिहाजा उसके बाद से यह सिलसिला चल रहा है और पंजाब के सदस्य एक ही बार चुने जाते हैं।

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