UPI पर शुल्क के खिलाफ 22 राज्यों के व्यापारी एकजुट, MP को दिए जाएंगे मांग पत्र

Edited By Kalash,Updated: 01 Oct, 2026 01:57 PM

upi payment charges protest

यू.पी.आई. भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत व्यापारी शुल्क के विरोध में भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के नेतृत्व में देशव्यापी आंदोलन तेज हो गया है।

अमृतसर (इन्द्रजीत): यू.पी.आई. भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत व्यापारी शुल्क के विरोध में भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के नेतृत्व में देशव्यापी आंदोलन तेज हो गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू लाल गुप्ता एवं राष्ट्रीय महासचिव मुकंद मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित वर्चुअल बैठक में 22 राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर रणनीति तय की। बैठक में पंजाब का प्रतिनिधित्व पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्यारे लाल सेठ, महासचिव एवं राष्ट्रीय महासचिव समीर जैन तथा भारतीय उद्योग व्यापार मंडल पंजाब इकाई के अध्यक्ष रंजन अग्रवाल ने किया।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 2 अक्तूबर को यू.पी.आई. शुल्क विरोध दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इसके तहत देशभर के सांसदों को शुल्क समाप्त करने के लिए ज्ञापन सौंपा जाएगा तथा बाजारों में यू.पी.आई. पर शुल्क बंद करो और 0.4 प्रतिशत शुल्क स्वीकार्य नहीं जैसे संदेशों वाले बैनर एवं स्टिकर लगाए जाएंगे, 2 अक्तूबर के बाद सभी ज्ञापन एवं व्यापारियों की प्रतिक्रियाएं एकत्र कर केंद्र सरकार तथा संबंधित संस्थाओं के समक्ष प्रस्तुत की जाएंगी।

बाजार स्तर तक व्यापारी संगठनों को जोड़ा जाएगा : रंजन अग्रवाल 

रंजन अग्रवाल ने कहा कि पंजाब में इस अभियान को बाजार स्तर तक पहुंचाया जाएगा और व्यापारी संगठनों को जोड़ा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापारी डिजिटल भुगतान के विरोध में नहीं हैं, लेकिन व्यापारियों पर अतिरिक्त भुगतान लागत डालना उचित नहीं है। छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के सामने पहले से ही बैंक ब्याज, कर्मचारियों के वेतन, बिजली, किराया, परिवहन, माल रखने की लागत, उधारी एवं कर अनुपालन जैसी अनेक चुनौतियां हैं, ऐसे में अतिरिक्त लेनदेन शुल्क उनके सीमित लाभ और कार्यशील पूंजी को प्रभावित करेगा।

छोटे व्यापारियों पर बोझ न्याय संगत नहीं : समीर जैन 

समीर जैन ने कहा कि यू.पी.आई. व्यवस्था को मजबूत करने की लागत का भार केवल छोटे व्यापारियों पर डालना न्यायसंगत नहीं है। यू.पी.आई. से नकदी प्रबंधन और नोटों की छपाई व वितरण की लागत में बचत होती है, इसलिए इसके व्यापक आर्थिक लाभों का मूल्यांकन होना चाहिए। 75 हजार रुपए या उससे अधिक के पात्र लेनदेन पर अधिकतम 300 रुपए शुल्क की सीमा के बावजूद अधिक संख्या में होने वाले लेनदेन से मासिक संचय का बोझ बढ़ सकता है। प्यारे लाल सेठ ने कहा कि व्यापारी वर्ग यू.पी.आई. और डिजीटल अर्थव्यवस्था का समर्थक है, विरोध केवल अतिरिक्त शुल्क का है। संगठनों ने दोहराया कि उद्देश्य डिजिटल भुगतान रोकना नहीं, बल्कि पारदर्शी, न्यायसंगत और टिकाऊ भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

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