Edited By Urmila,Updated: 09 Oct, 2026 11:00 AM

पंजाब में बिजली नियमों को लेकर नया बदलाव लागू किया गया है। पावरकॉम ने बिजली अधिनियम में केंद्र सरकार की ओर से किए गए संशोधनों को अपनाते हुए अधिकारियों को नई व्यवस्था के मुताबिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
जालंधर : पंजाब में बिजली नियमों को लेकर नया बदलाव लागू किया गया है। पावरकॉम ने बिजली अधिनियम में केंद्र सरकार की ओर से किए गए संशोधनों को अपनाते हुए अधिकारियों को नई व्यवस्था के मुताबिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसका असर घरेलू कनेक्शन से लेकर दुकानों और फैक्ट्रियों तक पर पड़ेगा। जालंधर में करीब 5.50 लाख बिजली उपभोक्ता इसके दायरे में आएंगे। नई व्यवस्था के तहत कुछ उल्लंघनों के लिए जेल की सजा के बजाय जुर्माना वसूलने पर जोर दिया गया है। पावरकॉम की ओर से जारी नोटिफिकेशन के बाद मुख्य इंजीनियरों, तकनीकी अधिकारियों और एनफोर्समेंट विंग को भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं। ये बदलाव 1 जून से लागू किए जाने की जानकारी दी गई है।
आदेश नहीं मानने पर 10 लाख तक जुर्माना
बिजली विभाग या आयोग के निर्देशों की अनदेखी करने पर अब संबंधित प्रावधान के तहत 10 हजार से 10 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि उल्लंघन जारी रहता है तो रोजाना 1,000 से 10,000 रुपए तक अतिरिक्त पेनल्टी भी लग सकती है। पहले इस प्रावधान के तहत तीन महीने तक की जेल का विकल्प भी मौजूद था।
बिजली के सामान को नुकसान पहुंचाया तो भी कार्रवाई
बिजली के खंभे, तार या पावरकॉम की अन्य संपत्ति को लापरवाही से नुकसान पहुंचाने वालों पर भी आर्थिक दंड लगाया जाएगा। ऐसे मामलों में जुर्माने की राशि 5,000 रुपए से एक लाख रुपए तक रखी गई है। दोबारा गलती करने पर भी जुर्माना लगाया जा सकता है।
दुकानों और उद्योगों के लिए अलग-अलग फीस
बिजली से जुड़े कुछ मामलों में अदालत की लंबी प्रक्रिया से बचने के लिए कंपाउंडिंग फीस की दरें निर्धारित की गई हैं। तय दरों के मुताबिक औद्योगिक उपभोक्ताओं को 20 हजार रुपए प्रति किलोवाट, कमर्शियल उपभोक्ताओं को 10 हजार रुपए प्रति किलोवाट, कृषि उपभोक्ताओं को 2,000 रुपए प्रति हॉर्स पावर और घरेलू उपभोक्ताओं को 4,000 रुपए प्रति किलोवाट के हिसाब से फीस देनी होगी। वहीं, मीटर या बिजली उपकरणों से छेड़छाड़ के मामले में 10 हजार रुपए की एकमुश्त कंपाउंडिंग फीस निर्धारित की गई है।
हर तीन साल बाद बढ़ेगी पेनल्टी
नए नियमों में जुर्माने की न्यूनतम दरों को हर तीन साल बाद 10 प्रतिशत बढ़ाने का प्रावधान भी बताया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बिजली चोरी के हर मामले में केवल जुर्माना ही लगेगा। गंभीर मामलों में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई जारी रह सकती है।
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