विधानसभा हलका पठानकोट: पड़ोसी प्रांतों में उद्योगों को पलायन होने से नहीं रोक पाई सरकारें

  • विधानसभा हलका पठानकोट: पड़ोसी प्रांतों में उद्योगों को पलायन होने से नहीं रोक पाई सरकारें
You Are HerePunjab
Friday, December 16, 2016-2:22 PM

पठानकोट (शारदा): राज्य के नवसृजित जिला पठानकोट के अधीन आते तीनों निर्वाचण क्षेत्रों यानि समूचे जिले की कुल आबादी 7,20,309 तथा 4,53,546 मतदाता हैं। तीनों निर्वाचण क्षेत्रों में सबसे कम वोटर जिले की राजनीतिक की धुरी माने जाने वाले हलका पठानकोट के हैं। यहां पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे अश्विनी शर्मा मौजूदा विधायक हैं।

मुख्य मुद्दा
इस हलके का मुख्य मुद्दा रोजगार की समस्या है। पिछले लम्बे समय से रोजगार सृजना के मामले में सरकारें इस हलके की अनदेखी करती आई हैं। सरकार के लाख दावों के बावजूद इस हलके में बड़े पैमाने पर इंडस्ट्री स्थापित नहीं हो सकी। वहीं पड़ोसी प्रांत हिमाचल प्रदेश जो कि महज 5 किलोमीटर व जम्मू-कश्मीर जो कि 17 किलोमीटर की दूर पर सटा है, को केन्द्र से मिली हुई विशेष औद्योगिक रियायतों के चलते इस क्षेत्र का अधिकांश व्यापार व उद्योग पड़ोसी प्रांतों में पलायन कर चुका है। सिटी रेलवे स्टेशन से अधिकांश रेलगाडिय़ां बाहरी स्टेशन पठानकोट कैंट में स्थानांतरित होने से नगर का रहा-सहा व्यापार भी चौपट हो गया है।

आस-पास बड़े पैमाने पर कैंटोनमैंट क्षेत्र, सैन्य आयुध भंडार के साथ एयरबेस स्थित है, डिफैंस क्षेत्र की परिधि बढऩे से शहर आगे बढऩे की बजाय और सिकुड़ रहा है। वहीं नगर की जर्जर ट्रैफिक व्यवस्था जग जाहिर है। प्रशासन के लाख प्रयासों व जिला बनने के बाद भी यह समस्या मुंह बाएं खड़ी है। ट्रैफिक की भरमार है तथा सड़कें अतिक्रमणों से सिकुड़ती जा रही हैं। रही-सही कसर नगर के बीचोबीच से गुजरने वाली नैरोगेज रेलवे लाइन ने पूरी कर दी है। पठानकोट से हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा व पालम वैली की ओर आने-जाने वाली दर्जन भर नैरोगेज रेलगाडिय़ों के गुजरने के लिए इस रेलवे फाटक को बंद करना पड़ता है जिसके कारण नगर के आधा दर्जन रेलवे फाटकों पर लम्बा जाम लग जाता है तथा यह शहर कुछ समय तक रूका हुआ अथवा धीरे-धीरे सरकता नजर आता है। वहीं करीब 40 करोड़ की लागत से निर्मित आधुनिक यात्री सुविधाओं वाले सिविल एयरपोर्ट पर लम्बे अर्से से यात्री फ्लाइट नहीं उतरी है जिससे महत्वपूर्ण एयरपोर्ट सफेद हाथी बनकर रह गया है। लोगों को इसके फिर से यात्री सेवाओं से गुलजार होने का इंतजार है।


वायदे
-सीवरेज व्यवस्था में सुधार
-सरकारी कॉलेज, सुदृढ़ सफाई व ट्रैफिक व्यवस्था
-सडक़ों की हालत सुधारना
-बड़े प्रोजैक्ट, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था।

कितने हुए वफा
नगर के लमीनी क्षेत्र में सरकारी तौर पर सरकार ने एक बिल्डिंग स्थापित करके सरकारी कॉलेज के नाम पर शिक्षण संस्थान की स्थापना तो कर दी है परन्तु इसमें पढऩे वाले विद्याॢथयों व अभिभावकों में इस बात को लेकर रोष है कि सरकारी कॉलेज के नाम पर सरकार ने युनिवॢसटी कैम्पस ही स्थापित किया है यहां भी युनिवॢसटी स्तर पर ही विद्याॢथयों से भारी फीसें व अन्य शुल्क वसूले जाते हैं। ट्रैफिक व्यवस्था जिला बनने के बाद और बद से बदतर हुई है। हर समय मुख्य चौराहों पर जाम लगा रहता है तथा अतिक्रमणों की भरमार है। पार्किंग नाम की व्यवस्था दूर-दूर तक नजर नहीं आती। सीवरेज व्यवस्था नगर के अंदरूणी क्षेत्रों में अक्सर ठप्प रहती है। बरसात के दिनों में तो स्थिति कोढ़ में खाज समान हो जाती है तथा गंदगीयुक्त सीवरेज ओवर फ्लो होकर यां तो लोगों के घर में घुस जाता है अन्यथा रिहायशी आबादी में जाकर दस्तक देता है। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने का वायदा सौ फीसदी वफा नहीं हो पाया है। कई स्थानों पर गंदगीयुक्त पानी के चलते कई बार पीलिया, डायरिया व हैजा आदि के संक्रमण के मामले प्रति वर्ष सामने आते हैं। वहीं सरकार के दावों के बावजूद अभी तक खेल स्टेडियम पूरा नहीं हो पाया है। स्टेडियम की इमारत का आधा भाग गिर भी चुका है जिसका दोबारा निर्माण किया गया है।

दावों की हकीकत
कई सडक़ें जो कि निर्माण के बाद ही दम तोड़ती नजर आई हैं। उनमें निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवालिया निशान खड़े हुए हैं। ढांगू रोड की हालिया निर्मित सुंदरनगर क्षेत्र में कई स्थानों पर धंस गई थी जिसको लेकर जनता ने स्वर मुखर किए थे। नैरोगेज रेलवे फाटक को शिफ्ट करने की कई बार योजना बनी तथा दावे किए परन्तु ग्राऊंड स्तर पर स्थिति जस की तस है। आधा दर्जन नैरोगज रेलवे फाटक शहर को भागों में विभाजित करते हैं। हर चुनावी सीजन में जनता को इन्हें शिफ्ट करने को लॉलीपाप मिलता है परन्तु समस्य पुराने ढर्रे पर ही है। न ही ट्रैफिक समस्या से निपटने के लिए नगर के परिदृश्य पर अभी तक अन्य महानगरों समान फ्लाई ओवर नजर आए हैं जबकि कार्पोरेशन व जिला बनने के बाद इस नगर को राज्य के छठे उभरते हुए महानगर समान आंका जा रहा है। सैन्य आयुध भंडार के आस-पास एक हजार वर्गगज में निर्माण पर पाबंदी है जिससे इस क्षेत्रों में करोड़ों रुपए के हुए निवेश पर प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है तथा प्रभावित परिधि में रहने वाले लोगों के सिर पर अक्सर किसी भी समय गाज करने की तलवार लटकी रहती है।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष का दावा
वहीं कांगेस अध्यक्ष अनिल विज ने सत्तापक्ष व प्रदेश सरकार के विकास संबंध सभी वायदों व दावों को झूठ का कोरा पुलिदां करार देते हुए कहा कि जिन सडक़ों का विकास करने के दावे सत्तारूढ़ भाजपा कर रही है उनमें से कई तो निर्माण कुछ ही दिनों बाद टूटना व उखडऩा शुरू हो गए थे। बहुत सारे प्रोजैक्ट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए हैं। पिछले एक दशक से नगर की ट्रैफिक समस्या जनता के लिए जी का जंजाल बनी हुई है। प्रदेश सरकार क्षेत्र में रोजगार सृजन नहीं कर पाई तथा न ही इस क्षेत्र के हुए व्यापार व उद्योग के पलायन को रोक सकी है जिसका परिणाम यह निकला है कि आज यह क्षेत्र आॢथक रूप से कंगाल होकर रह गया है। छोटे-मोटे दुकानदार भी मंदी की जद में है तथा रही-सही कसर नोटबंदी ने पूरी कर दी है।

क्या कहती हैं आम जनता
 ‘‘दु:ख का विषय है कि सरकारें स्कूलों में संस्कृति भाषा के पद को खत्म होने से नहीं रोक पाई जबकि संस्कृति विषय एक ग्रामर है। वोकेशनल ट्रेनिंग के साथ साइकोलॉजी का अध्यापक भी हो तो विद्यार्थी का सर्वागीण विकास संभव है, रोजगार असानी से मिल सकता है परन्तु किसी सरकार का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। सरकारी स्कूलों की दुखदायी स्थिति देखकर मन भर आता है क्योंकि उन्हीं के माध्यम से सही लोकतंत्र यां रामराज्य स्थापित हो सकता है।’’ -बी.डी.शर्मा रि.डी.ई.ओ. एवं थिंकर


 ‘‘गंदे नालों की समस्या पुरानी बीमारी है जिसका इलाज आज तक नहीं हो पाया है। गंदे नालों की समस्या को दूर करने के लिए कई सालों से प्रोजैक्ट बन रहे हैं परन्तु स्थिति भीभत्स है। रही सही कसर लोगों ने नालों पर अतिक्रमण करके पूरी कर दी है जिससे स्थिति कोढ़ में खाज समान बन गई है।’’ -सी.एस.लायलपुरी बुद्धिजीवी


‘‘ नगर को टूरिस्ट हब बनाने में सभी सरकारें पूरी तरह विफल रही हैं। पठानकोट ऐसा क्षेत्र यहां समूचे भारत से ट्रेनें आती हैं तथा नैशनल हाइवे से जुड़ा है। देवभूमि हिमाचल प्रदेश व कश्मीर घाटी में जाने के लिए इस नगर से होकर गुजरना पड़ता है परन्तु इसके बावजूद सरकारों की दृढ़ इच्छाशक्ति न होने से अब भी इस क्षेत्र को पर्यटन हब नहीं बना जा सका जो कि दुखद है।’’ -सतीश महिन्द्रु व्यवसायी एवं चिंतक


‘‘ पंजाब सरकार की महंगी बिजली व पड़ोसी प्रांतों में मिल रही औद्योगिक सबसिडी आदि की सुविधाओं से इस क्षेत्र का समूचा व्यापार व उद्योग चौपट हो गया यां अधिकतर इन प्रांतों में पलायन कर गया है जिसका प्रभाव स्थानीय इकोनॉमी पर भी सीधे रूप से पड़ा है। सरकार इस समस्या से निपटने में अब तक नाकामयाब रही है बावजूद इसके कि केन्द्र में भाजपा की सरकार अब है।’’  -जगदीश सैनी रि.ई.टी.ओ.


‘‘ स्थानीय व्यापार को आस-पास बिछे हुए बैरियरों के मक्कड़ जालों ने भी तहस-नहस किया है। नगर के बचे-खुचे व्यापार को सर्किल की परिधि में स्थापित बैरियरों ने तबाह किया है। दस सालों से सरकार के द्वार पर स्थानीय व्यापरी ठोकरें खा रहा है परन्तु कोई समाधान नहीं हुआ है। फंड के लिए व्यापारी व सुविधाओं मांगनें पर सरकार ने व्यापारी वर्ग को भिखारी बना दिया है।’’  -एल.आर.सोढी सचिव, व्यापार मंडल पंजाब।

 
‘‘करोड़ों रुपए की लागत से बनाए गया सिविल एयरपोर्ट सफेद हाथी बनकर रह गया है। पिछले कई वर्षों से इस एयरपोर्ट पर एक यात्री फ्लाईट नहीं उतरी है जबकि आस-पास सैन्य स्थल व एयरबेस आदि स्थित है वहीं हिमाचल प्रदेश व कश्मीर घाटी के लिए फ्लाइटों के आवागमन की परिस्थितियां भी माकूल हैं परन्तु इसके बावजूद एयरपोर्ट की विफलता ने नगर के विकास की रफ्तार कुंद कर दी है।’’   -तरुणपाल सिंह शंटी कान्टै्रक्टर


‘‘जिले की अपनी कोर्ट स्थापित हो चुकी है परन्तु अभी कई कार्यों के लिए जनता को गुरदासपुर जिले का रूख करना पड़ता है। जिले में अपनी लेबर व कंज्यूमर कोर्ट स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री बादल को क्षेत्र में संगत दर्शन के दौरान बार एसो. ने ज्ञापन भी सौंपा जिसे कैबिनेट ने मंजूरी भी दे है परन्तु अभी तक ये अदालतें जिले के कोर्ट काम्पलैक्स में स्थापित नहीं हो पाईं।’’  -अजय डढवाल प्रधान बार एसो. एवं वरिष्ठ अधिवक्ता।

 

विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You