अमृतसर तक नहीं बनेगा डैडीकेटिड फ्रेट कॉरीडोर, रेलवे ने खारिज किया सुझाव

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Sunday, August 13, 2017-2:47 AM

चंडीगढ़(अश्वनी कुमार): अमृतसर तक डैडीकेटिड फ्रेट कॉरीडोर की उम्मीद धराशाही हो गई है। रेलवे ने वाणिज्य मामलों की संसदीय स्थायी समिति के उस सुझाव को खारिज कर दिया है, जिसमें समिति ने कॉरीडोर को अमृतसर तक बढ़ाने की बात कही थी। 

रेलवे ने स्पष्ट किया है कि ईस्टर्न डैडीकेटिड फ्रेट कॉरीडोर को पश्चिम बंगाल के दनकुनी से पंजाब के लुधियाना शहर तक ही अमल में लाया जा रहा है। यह निर्णय इस रूट पर ट्रैफिक व कई स्तर पर किए गए अध्ययन के बाद लिया गया है इसलिए लुधियाना से अटारी बॉर्डर तक इसे विस्तार दे पाना संभव नहीं है। अटारी बॉर्डर तक मौजूदा रेलवे लाइन का ही प्रयोग किया जाएगा, जो फीडर रूट के तौर पर काम करेगी।

समिति ने यह रिपोर्ट राज्यसभा को सौंपी है। दरअसल, अमृतसर तक कॉरीडोर के मामले पर समिति का सुझाव था कि कॉरीडोर को विस्तार देने से अटारी बॉर्डर के जरिए भारत-पाकिस्तान के बीच कारोबार करने वाले उद्यमियों को अधिक से अधिक लाभ मिलेगा। उस पर अगर पाकिस्तान नैगेटिव लिस्ट में संशोधन करता है तो पाकिस्तान को निर्यात की जाने वाली वस्तुओं की संख्या बढ़ेगी, जिससे रेलवे लाइन पर ट्रैफिक बढ़ जाएगा। इसलिए जरूरी है भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाए। 

ऐसा नहीं होना चाहिए कि जब डिमांड बढ़े व स्थानीय उद्यमी अपनी मांग रखें, तब उस पर निर्णय लिया जाए। समिति ने माझा क्षेत्र में आतंकवाद का भी हवाला देते हुए कहा कि यह क्षेत्र आतंकवाद से काफी प्रभावित रहा है इसलिए सरकार का यह दायित्व बनता है कि इस क्षेत्र के विकास पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान केंद्रित हो ताकि जनता को आर्थिक तरक्की मिले। 

अटारी बॉर्डर पर सभी वस्तुओं का निर्यात खोलने का दिया सुझाव
समिति ने अटारी बॉर्डर से पाकिस्तान को सभी तरह के उत्पाद निर्यात किए जाने पर भी जोर दिया है। वाणिज्य मंत्रालय व विदेश मंत्रालय को सुझाव देते हुए समिति ने कहा है कि वाघा बॉर्डर के जरिए केवल 137 उत्पादों के निर्यात की पाबंदी खत्म करने की पहल होनी चाहिए ताकि आर्थिक विकास को बल मिले। पाकिस्तान ने वाघा बॉर्डर से महज 137 वस्तुओं के आयात को मंजूरी दी हुई है। पाकिस्तान ने 1209 ऐसे उत्पाद तक चिन्हित किए हैं जिन्हें भारत से आयात नहीं किया जा सकता। रोक लगाई गई वस्तुओं व उत्पादों को पाकिस्तान ने नैगेटिव लिस्ट में डाला हुआ है। समिति ने इस नैगेटिव लिस्ट को भी खत्म करने का सुझाव दिया है ताकि कॉरीडोर के जरिए कारोबार को बल मिले। इसी कड़ी में समिति ने फिरोजपुर के हुसैनीवाला बॉर्डर व फाजिल्का के सादकी बॉर्डर को भी खोलने का सुझाव दिया है। मंत्रालय फिलहाल इन सुझावों पर विचार कर रहा है। 

मास्टर प्लान को अमलीजामा पहनाएं
इंडस्ट्रियल मैन्यूफैक्चरिंग हब्स के मास्टर प्लान को जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाया जाए ताकि जब कॉरीडोर चालू हो तो उद्यमियों को लाभ मिले। इस सुझाव पर रेलवे ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उत्तराखंड व पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से चिन्हित किए गए हब के मास्टर प्लान का खाका तैयार कर लिया गया है। जहां तक सवाल पंजाब का है तो सरकार से अनुरोध किया गया है कि चिन्हित हब के लिए जल्द से जल्द जगह उपलब्ध करवाई जाए। 

मल्टी मॉडल लॉजेस्टिक हब अपर्याप्त
संसदीय स्थायी समिति ने पंजाब के उद्यमियों से बातचीत के बाद पाया है कि मौजूदा समय में कॉरीडोर को ध्यान में रखते हुए जो मल्टी मॉडल लॉजेस्टिक हब निर्मित किए गए हैं वह क्षमता के मुताबिक भविष्य की जरूरतों के हिसाब से नाकाफी हैं। खासतौर पर जब कॉरीडोर चालू हो जाएगा तो मांग बढ़ जाएगी। इसलिए रेलवे व डैडीकेटिड फ्रेट कॉरीडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस कॉरीडोर पर जरूरत के हिसाब से क्षमता वाले मल्टी मॉडल लॉजेस्टिक हब निर्मित किए जाएं। रेलवे ने कहा है कि आने वाले समय में कॉरीडोर के आसपास ढांचागत सुविधाओं में इजाफा किया जाएगा। इस संबंध में कॉर्पोरेशन को सुझाव भेज दिए गए हैं। 

कृषि प्रधान राज्य होने के चलते पंजाब में भू-अधिग्रहण महंगा सौदा
समिति ने कॉरीडोर सहित ढांचागत सुविधाओं के लिए भू-अधिग्रहण पर भी कई सुझाव दिए हैं। चूंकि पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है, इसलिए यहां पर भू-अधिग्रहण करना न केवल पेचीदा है बल्कि महंगा सौदा भी है। इसलिए समिति ने सुझाव दिया है कि पब्लिक सैक्टर अंडरटेकिंग के पास सरप्लस भूमि को इस्तेमाल किया जा सकता है। रेलवे व फ्रेट कॉरीडोर कॉर्पोरेशन ने आश्वासन दिया है कि ढांचागत निर्माण सहित इंडस्ट्रियल मैन्यूफैक्चरिंग कलस्टर के निर्धारित साइज को भी कम करने पर विचार किया जा रहा है। 

समिति का कहना था कि कॉरीडोर को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने पर जोर देना चाहिए ताकि दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरीडोर जैसी स्थितियां पैदा न हों। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरीडोर 2007 में मंजूर किया गया था इसलिए उद्यमियों ने अपने कारोबार को यह सोचकर विस्तार दिया कि यह 2012 तक मुकम्मल हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसीलिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ऐसी स्थितियां ईस्टर्न डैडीकेटिड फ्रेट कॉरीडोर पर पैदा न हों। ऐसा इसलिए भी है कि इस कॉरीडोर को 2014 में कैबिनेट ने मंजूर किया था लेकिन अभी तक इंडस्ट्रियल मैन्यूफैक्चरिंग कलस्टर की पूरी प्लानिंग साकार नहीं हो पाई है।

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