'मालवा क्षेत्र में कैंसर के दंश ने निगली हजारों जिंदगियां'

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Tuesday, July 18, 2017-10:25 AM

श्री मुक्तसर साहिब (तनेजा): गुरुओं, पीरों व शहीदों की धरती के नाम से मशहूर पंजाब को मालूम नहीं किस की नजर लग गई व कैंसर की नामुराद बीमारी का दंश लोगों को निगल रहा है। अब तक हजारों कैंसर पीड़ित जिंदगी व मौत की लड़ाई लड़ते हुए अपनी जिंदगियों से हाथ धो बैठे हैं, जबकि हजारों अभी भी चारपाई पकड़े हुए हैं। भले ही पूरे पंजाब में कैंसर की बीमारी से ग्रस्त मरीज हैं, परंतु मालवा क्षेत्र के श्री मुक्तसर साहिब, फरीदकोट, फाजिल्का, फिरोजपुर, मोगा, मानसा, संगरूर व भटिंडा आदि जिलों में तो इस बीमारी ने अपने पैर पूरी तरह पसार लिए हैं।

मालवे के कई गांव तो ऐसे हैं जहां कैंसर से मरने वालों की संख्या 50 से अधिक हो चुकी है जबकि इसके अतिरिक्त लगभग प्रत्येक गांव में कैंसर से मौतें हो चुकी हैं। इस बीमारी का मुख्य कारण पीने वाला खराब पानी समझा जा रहा है, क्योंकि मालवा क्षेत्र के अधिकतर भागों में धरती के नीचे का पानी खराब है। वैसे तो पानी नहरों के माध्यम से भी इस क्षेत्र को सप्लाई हो रहा है परंतु नहरों में भी गत लंबे समय से गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। डाक्टरों के अनुसार फसलों व सब्जियों पर किया जा रहा अधिक कीटनाशक दवाइयों का उपयोग, खादों व खराब पानी से तैयार की जा रही सब्जियां भी इस बीमारी का मुख्य कारण है।

राज्य में नहीं है कैंसर के इलाज के लिए बड़ा अस्पताल   
पंजाब में कैंसर की बीमारी का कोई बड़ा अस्पताल नहीं है जिस कारण मालवे के कैंसर पीड़ितों को अपना उपचार करवाने के लिए दूर-दूर के अस्पतालों में जाना पड़ता है जबकि अधिकतर लोग तो राजस्थान के शहर बीकानेर की ओर ही रुख करते हैं। हैरानी वाली बात यह है कि बीकानेर के कैंसर अस्पताल में पंजाब के मरीजों की संख्या हमेशा सैंकड़ों में रहती है। ऐसा लगता है कि जैसे पंजाब को कैंसर ने खा लिया है। बहुत से कैंसर पीड़ितों के पारिवारिक सदस्यों का कहना है कि इस बीमारी का उपचार बहुत महंगा है। पैसे की तंगी के कारण घरों का गुजारा करना मुश्किल हो गया है।

यदि कैंसर के उपचार के लिए मालवा क्षेत्र में ही किसी शहर में बड़ा अस्पताल बना दिया जाए तो खर्चा कम हो सकता है। समय की सरकारों व कई सियासी नेताओं ने इस क्षेत्र में अस्पताल बनाने के लिए लोगों को आश्वासन तो बहुत दिए परंतु अभी तक किया कुछ भी नहीं। क्षेत्र के लोगों ने पंजाब सरकार से मांग की है कि कैंसर का बड़ा अस्पताल बनाकर उसमें कैंसर के मरीजों का नि:शुल्क उपचार किया जाए, प्रत्येक गांव में शिविर लगाकर मरीजों की जांच की जाए, जबकि समाज सेवी संगठनों को भी इस ओर आगे आना चाहिए, क्योंकि अनेकों गरीब लोग उपचार के बिना ही मर जाते हैं।  

हर आयु वर्ग इस नामुराद बीमारी की चपेट में
जानकारी के अनुसार क्षेत्र के कई परिवार तो ऐसे भी है जिन के 2 या 2 से अधिक व्यक्तियों की मौत कैंसर से हुई है। डाक्टरों से मिले विवरण के अनुसार कैंसर के मरीजों में महिलाओं की संख्या 65 प्रतिशत है। महिलाओं में छाती का कैंसर अधिक है। वैसे गले के कैंसर, पेट का कैंसर व ब्लड कैंसर वाले मरीजों की संख्या भी कम नहीं है। यह देखने में आया है कि इस खतरनाक बीमारी ने प्रत्येक वर्ग की आयु के व्यक्तियों को अपनी चपेट में जकड़ा है यहां तक कि छोटे बच्चों को भी नहीं बख्शा। मिली रिपोर्ट के अनुसार 2001 से लेकर गत 16 वर्षों में 40 हजार से अधिक मौतें कैंसर की बीमारी से हुई हैं। 

राज्य भर में 10 हजार है मरीजों की संख्या  
वर्तमान में भी पंजाबभर में 10 हजार से अधिक व्यक्ति इस खतरनाक बीमारी से पीड़ित हैं। मरीजों का उपचार करवाने के लिए कई व्यक्तियों की जमीनें व घर भी बिकगए हैं। कई व्यक्ति तो आढ़तियों व साहूकारों के अतिरिक्त रिश्तेदारों से भी उधार पैसे लेकर भारी कर्जदार हो गए हैं। कैसी विडम्बना है कि सिर पर कर्ज की गठरी और मरीज फिर भी नहीं बचा। पंजाब सरकार को इस भयंकर बीमारी की ओर ध्यान देने की जरूरत है, नहीं तो कैंसर प्रत्येक व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लेगा।

कैंसर पीड़ितों के लिए बजट कम शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी जिसका बजट करोड़ों रुपए का है, द्वारा भी कैंसर पीड़ितों के लिए बजट रखा गया है परंतु जिला श्री मुक्तसर साहिब में शिरोमणि कमेटी द्वारा बहुत कम कैंसर पीड़ित परिवारों की मदद की गई है। कमेटी के प्रबंधकों से जब इस संबंध में पूछा गया कि जिला श्री मुक्तसर साहिब के कितने मरीजों को कितने रुपए की सहायता अब तक मुहैया करवाई जा चुकी है तो वह इस संबंधी सही आंकड़े तो बता नहीं सके, सिर्फ इतना ही कहा कि हम परिवारों की मदद कर रहे हैं।

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