पंजाब के कर्मचारियों-पेंशनरों के हक पर डाका, अब अदालत को भी गुमराह कर रही भगवंत मान सरकार: तरुण चुघ

Edited By Kamini,Updated: 06 Oct, 2026 05:52 PM

tarun chugh

पंजाब के कर्मचारियों-पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते को लेकर तरुण चुघ ने पंजाब को घेरा है।

पंजाब डेस्क: पंजाब के कर्मचारियों-पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते को लेकर तरुण चुघ ने पंजाब को घेरा है। भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने लंबित महंगाई भत्ते (DA/DR) के मामले में भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अपने कर्मचारियों को उनका जायज हक देने से बचने के लिए सरकार पहले सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया की आड़ में समय खरीदती रही और अब हाईकोर्ट में उसके दावों पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

तरुण चुघ ने कहा कि 3 अगस्त को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और PSPCL की अपीलें खारिज करते हुए राज्य सरकार को सभी कर्मचारियों और पेंशनरों की लंबित DA/DR किस्तों का भुगतान 2 सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि पंजाब में कार्यरत IAS, IPS और IFS अधिकारियों पर लागू केंद्र सरकार की दरों के अनुरूप DA/DR दिया जाए तथा डिफॉल्ट की स्थिति में बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा।

चुघ ने कहा कि इसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर करने की बात कही, लेकिन वह एक महीने से अधिक समय तक defects में पड़ी रही। 5 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने राज्य के रवैये पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में कानूनी उपाय अपनाने की आड़ में केवल समय खरीदने का प्रयास कर रही है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार अदालत के साथ लुका-छिपी का खेल क्यों खेल रही है, यह समझ से परे है। उन्होंने कहा कि 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से प्राप्त रिपोर्ट ने सरकार के दावे की पोल खोल दी। रिपोर्ट के अनुसार पंजाब सरकार की SLP में कमियां दूर नहीं की गई थी और PSPCL की अपील भी  कमियां थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया मुख्य सचिव द्वारा जानबूझकर तथ्यों का गलत प्रस्तुतीकरण किए जाने की बात दर्ज की और उनके खिलाफ Criminal contempt की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए, इस संबंध में नोटिस जारी किया।

तरुण चुघ ने कहा, “भगवंत मान जी, सुप्रीम कोर्ट में अपील करना आपका अधिकार है, लेकिन अदालत में अपनी अपील की वास्तविक स्थिति को लेकर गलत तथ्य प्रस्तुत करना किसी भी सरकार के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता। पंजाब की जनता और खासकर हमारे कर्मचारी-पेंशनर यह जानना चाहते हैं कि उनके हक का पैसा देने के बजाय सरकार आखिर किस बात का इंतजार कर रही है?” उन्होंने कहा, “DA कोई भीख नहीं है। यह कर्मचारियों और पेंशनरों का अधिकार है। जिन्होंने दशकों तक पंजाब की सेवा की, उन्हें अपना बकाया पाने के लिए बार-बार अदालत के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। दूसरी तरफ सरकार कानूनी प्रक्रिया के पीछे छिपकर समय खरीदने में लगी है। यह कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ अन्याय है।”

चुघ ने कहा कि अब यह मामला केवल DA/DR के भुगतान तक सीमित नहीं रह गया है। हाईकोर्ट की ताजा कार्यवाही ने पंजाब सरकार के कामकाज और अदालत के आदेशों के प्रति उसकी गंभीरता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों के अधिकारों की लड़ाई को पूरी मजबूती से उठाएगी और सरकार को उनके सभी लंबित DA/DR का भुगतान करने के लिए मजबूर करेगी। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार को राजनीतिक बहाने, कानूनी दांव-पेच और समय खरीदने की राजनीति छोड़कर कर्मचारियों और पेंशनरों का हक देना चाहिए तथा न्यायपालिका के आदेशों का सम्मान करना चाहिए।

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